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आर्ट ऑफ लिविंग कार्यक्रम के अस्थाई निर्माण पर पर्यावरण मंत्रालय को फटकार

Wed, 09 Mar 2016 11:39 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 09 Mar 2016 11:39 AM IST
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rebuke to environment ministry on art of Living program temporary construction
आर्ट ऑफ ल‌िव‌िंग कार्यक्रम की तैयारी

आर्ट ऑफ लिविंग के वैश्विक सांस्कृतिक समारोह को लेकर मंगलवार को एनजीटी में सुनवाई हुई। बेंच ने पर्यावरण मंत्रालय से पूछा कि यमुना डूब क्षेत्र में अस्थायी निर्माण या संरचना के लिए पर्यावरण मंजूरी की जरूरत क्यों नहीं है। इस बारे में हलफनामा दाखिल कर आज जवाब देने का निर्देश दिया है। जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस मामले में जल संसाधन मंत्रालय से भी जवाब मांगा है।

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सुनवाई के दौरान पर्यावरण मंत्रालय की ओर से वकील ने कहा कि उनकी टीम ने कार्यक्रम स्थल का दौरा किया था। उस दौरान किसी भी तरह का कचरा और मलबा नहीं पाया गया।
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साथ ही पर्यावरण मंत्रालय की एक्सपर्ट कमेटी की टीम ने ही अस्थायी निर्माण को देखकर कहा था कि इस कार्यक्रम को पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन अधिसूचना 2006 के तहत पर्यावरण मंजूरी की जरूरत नहीं है। इसके बाद बेंच ने हलफनामा दाखिल कर विस्तृत जवाब दाखिल करने को कहा है।

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पंटून पुल की मंजूरी पर सभी ने खड़े किए हाथ

rebuke to environment ministry on art of Living program temporary construction
सांस्कटिक कार्यक्रम के लिए बन रहा पुल

ग्रीन पैनल ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) से  समारोह स्थल पर यमुना में सेना के जरिये बनाए गए पंटून पुल को लेकर भी सवाल पूछा। बेंच ने कहा कि आखिर इस पुल को बनाने के लिए किसने अनुमति दी।

इस पर न सिर्फ डीडीए बल्कि दिल्ली, सरकार और पर्यावरण मंत्रालय ने भी कहा कि उनका पुल निर्माण से कोई नाता नहीं है। डीडीए ने कहा कि उसे सिर्फ अनापत्ति प्रमाण पत्र देना था।

आर्ट ऑफ लिविंग की ओर से पेश वकील ने कहा कि उन्हें अभी तक दिल्ली पुलिस की ओर से मंजूरी नहीं दी गई है। साथ ही आपदा प्रबंधन ने भी शर्तों के साथ मंजूरी दी है। वहीं, फायर ब्रिगेड से भी मंजूरी हासिल करना बाकी है। सुनवाई के अंत में याची की ओर से पेश वकील ने कहा कि कार्यक्रम पर तत्काल रोक लगनी चाहिए। अब एनजीटी विस्तृत तौर पर आर्ट ऑफ लिविंग का पक्ष सुनेगी।

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