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अरविंद को सबक सिखाना चाहते थे प्रशांत

Wed, 11 Mar 2015 05:38 PM IST
Updated Wed, 11 Mar 2015 05:38 PM IST
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Reasons of expelling prashant and yogendra from PAC

आम आदमी पार्टी ने 4 फरवरी को हुई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव को पीएसी से निकाल दिया है।

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इसके बाद से ही कयास लगाए जा रहे हैं कि इन दोनों को पार्टी से भी बाहर कर दिया जाएगा। इसी के तहत पार्टी के विधायक इनके खिलाफ हस्ताक्षर अभियान भी चला रहे हैं। आप के विधायक अरविंद केजरीवाल के नाम एक चिट्ठी लिखकर हस्ताक्षर करा रहे हैं।
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योगेंद्र और भूषण के पीएसी से निकाले जाने की वजह को कल पार्टी प्रवक्ता संजय सिंह ने मीडिया के सामने रखा। उन्होंने एक पत्र भी जारी किया जिसके अनुसार इन दोनों को पीएसी से निकाले जाने के कुल आठ कारण हैं। चिट्ठी के अनुसार पार्टी को ऐसा इसलिए करना पड़ा क्योंकि वॉलेंटियर्स में बहुत असंतोष व्याप्त हो गया था।
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जब सभी पार्टी कार्यकर्ता पार्टी को दिल्ली में जिताना चाह रहे थे तब पार्टी के तीन-चार नेता पार्टी को हराना चाहते थे। ये नेता थे प्रशांत भूषण, योगेंद्र यादव और शांति भूषण।

प्रशांत ने वॉलेंटियरों को प्रचार के लिए दिल्ली आने से रोका था

Reasons of expelling prashant and yogendra from PAC

इन लोगों द्वारा किए गए कुछ पार्टी विरोधी कार्य कुछ इस प्रकार हैं-

1) इन नेताओं ने खासतौर से प्रशांत भूषण ने दिल्ली चुनाव के दौरान दूसरे राज्यों से आने वाले वॉलेंटियरों को फोन करके दिल्ली आने से रोका। अंजली दमानिया ने इस बात की पुष्टि की है कि प्रशांत ने फोन पर वॉलेंटियरों से कहा कि आप लोग प्रचार के लिए दिल्ली मत आइए, इस बार मैं भी दिल्ली चुनावों में प्रचार नहीं कर रहा। इस बार चुनाव में पार्टी का हारना बहुत जरूरी है ताकि अरविंद केजरीवाल का दिमाग ठिकाने पर आए।

2) जब कुछ लोगों ने आम आदमी पार्टी को चंदा देना चाहा तो प्रशांत भूषण ने उन्हें चंदा देने से रोक दिया।

3) दिल्ली चुनावों के दो हफ्ते पहले जब आशीष खेतान ने प्राशांत भूषण को दिल्ली डायलॉग में लोकपाल और स्वराज के विषय पर बोलने के लिए बुलाया तो प्रशांत ने उनसे कहा कि पार्टी का प्रचार छोड़ दो, इस बार पार्टी को हारने दो।

4) इसके साथ ही प्रशांत भूषण ने पूरे दिल्ली चुनाव के प्रचार अभियान के दौरान पार्टी को डराए रखा कि वो प्रेस कॉन्फ्रेंस करके पार्टी की इमेज को नेस्तनाबूत कर देंगे। उन्हें पता था कि दिल्ली में आप और बीजेपी के बीच कांटे की टक्कर थी और उनकी एक पार्टी विरोधी बात सीधे तौर पर पार्टी को नुकसान पहुंचा देगी।

आप विरोधी गतिविधियों में लगे थे प्रशांत और शांति भूषण

Reasons of expelling prashant and yogendra from PAC

5) वहीं एक पार्टी नेता ने बताया कि जब पार्टी को दिल्ली में चुनाव के लिए कैंपेन करना चाहिए था तब वो इन प्रशांत व शांति भूषण समेत योगेंद्र को मनाने में लगी थी कि वो ‌मीडिया में कोई गलत बात न कहें। लगातार तीन दिनों तक पार्टी के 10 प्रमुख नेता इन तीनों को मनाते रहे।

6) दूसरी ओर योगेंद्र यादव ने अरविंद केजरीवाल की छवि को खराब करने के लिए नकारात्मक लेख छपवाए जिसके पर्याप्त सबूत पार्टी के पास हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण द हिंदू में अगस्त 2014 में छपा लेख है।

7) अवाम नाम के संगठन को भी अरविंद केजरीवाल की छवि खराब करने के लिए ही लाया गया। प्रशांत भूषण ने खुलेआम अवाम को सपोर्ट किया था। साथ ही साथ शांति भूषण ने अवाम के पक्ष में और आप के विरोध में खुल्लमखुल्ला बयान भी दिया था।

8) यही नहीं चुनाव से कुछ दिन पहले शांति भूषण ने बीजेपी की सीएम उम्मीदवार किरण बेदी की खूब तारीफें की थीं और कहा था कि वो अरविंद केजरीवाल से बेहतर सीएम होंगी। इसके अलावा भी शांति भूषण ने केजरीवाल के खिलाफ कई बार बयान दिए थे।

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