{"_id":"5d101bb38ebc3e43e51b8e65","slug":"rash-driving-of-dtc-buses-a-big-danger-to-passengers","type":"story","status":"publish","title_hn":"दिल्ली की सड़कों पर ‘मौत’ की दौड़, बढ़ रहा है हादसों का ग्राफ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दिल्ली की सड़कों पर ‘मौत’ की दौड़, बढ़ रहा है हादसों का ग्राफ
Mon, 24 Jun 2019 06:09 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अरुण कुमार, नई दिल्ली
अरुण कुमार, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 24 Jun 2019 06:09 AM IST
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राजधानी में डीटीसी बसों के चालकों को किलोमीटर के हिसाब से दिहाड़ी देना लोगों की जिंदगी के लिए खतरा बनता जा रहा है। लंबी दूरी तक बस चलाने के लिए उन्हें ज्यादा दिहाड़ी दी जाती है। लिहाजा, वह दिल्ली की सड़कों पर यातायात नियमों को तोड़ते हुए अंधाधुंध बस दौड़ाते हैं। इससे हादसों का ग्राफ बढ़ रहा है।
विज्ञापन
सूत्र बताते हैं, डीटीसी बसों को चलाने वाले अनुबंधित चालकों को महीने में 2250 किमी तक बस चलाने पर 5 रुपये प्रति किमी के हिसाब से दिहाड़ी देते हैं। एक माह में 2250 किमी गाड़ी चलाने के लिए चालकों एक दिन में औसतन 75 किमी गाड़ी चलानी पड़ती है।
विज्ञापन
यदि 2250 से 4500 किमी के बीच बस चलाते हैं तो उन्हें 6 रुपये प्रति किमी के हिसाब से दिहाड़ी दी जाती है। इसलिए अनुबंधित बस चालक बसों के किमी बढ़ाने के लिए यातायात नियमों को ताक पर रखकर बसों को दौड़ा रहे हैं, जिससे सड़क पर मौजूद और बसों में सवार यात्रियों की जान पर खतरा बना रहता है।
विज्ञापन
डीटीसी के एक बस चालक ने बताया कि दिल्ली में कुछ रूट छोटे हैं और कुछ रूट 150 किमी से भी लंबे हैं। इन सभी रूटों पर चालकों को 8 घंटे की ड्यूटी दी जाती है। इस समयावधि में अनुबंधित बस चालकों को बसों के किमी के हिसाब से दिहाड़ी मिलती है, ना कि ज्यादा से ज्यादा यात्रियों को ढोने के लिए। नतीजतन, चालक कई बार स्टॉप पर भी बस नहीं रोकते हैं।
ज्ञात हुआ कि दिल्ली में रूट संख्या-323 धौला कुंआ-नोएडा सेक्टर-62 और रूट संख्या-392 धौला कुंआ से नोएडा सेक्टर-62 और तीव्र मुद्रिका के रूट 150 किमी से भी ज्यादा लंबे हैं। तीव्र मुद्रिका को दिन में तीन ट्रिप लगाने होते हैं। यानी, आठ घंटे में करीब 450 किमी बस दौड़ती है।
वहीं, जो रूट छोटे हैं उनके चालक बसों के किमी बढ़ाने के लिए बसों को तेज गति में दौड़ाते हैं और इस वजह से कई बार हादसे भी होते हैं। अनुबंधित चालकों की यह मांग भी है कि यदि उनके पारिश्रमिक को ठीक से बढ़ाया जाए तो उन्हें हाय-तौबा करने की जरूरत नहीं है। ऐसे ही एक मामले में बीते शनिवार को दिल्ली के नेहरू नगर इलाके में डीटीसी लो-फ्लोर एसी बस ने कलस्टर बस को पीछे से टक्कर मार दी।
हादसे में डीटीसी बस का चालक और कई यात्री घायल हो गए। यदि कोई बस ऑनड्यूटी खराब हो जाती है तो चालक को 652 रुपये की दिहाड़ी देने का प्रावधान है।