घोर कलियुग में हुबहू दोहराई गई रामायण, सीता हुई उग्र
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कुमार विश्वास और आप की एक महिला कार्यकर्ता के बीच संबंधों का विवाद फिलहाल पूरे देश में चर्चा का मुद्दा बना हुआ है। इस मामले को लेकर मीडिया और सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं भी आ रही हैं।
इन प्रतिक्रियाओं के बीच कुछ ऐसा भी है जो आपको गुदगुदाने पर मजबूर कर सकता है। दरअसल एक अंग्रेजी वेबसाइट के लेख की मानें तो आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता कुमार विश्वास के संबंधों का मौजूदा विवाद रामायण की कहानी से काफी मिलता-जुलता है।
इस पूरे विवाद में कई घटनाएं और पात्र आपस में कुछ इस तरह जुड़े हुए हैं जो रामायण की याद को ताजा कर देते हैं। इन किरदारों की गतिविधियां काफी हद तक रामायण के किरदारों से मिलते हैं।
आइए जानते हैं कि इस विवाद में कौन है राम और कौन है रावण...
कुमार कथा के 'रावण'
मौजूदा केस में कुमार विश्वास के पक्ष की तुलना रावण से की गई है। एक तरह से कहानी के अहम पात्र वही हैं। वे महिला को बहन मानने का दावा करते हैं और साथ ही पूरे मामले को राजनीतिक षड्यंत्र करार दिए जाने से भी नहीं चूकते।
कुमार कथा की 'सीता'- इस मामले में जिस आप कार्यकर्ता पर अवैध संबंधों का आरोप लगा है उसका चरित्र रामायण की सीता की तरह दिखता है। हालांकि यहां रामायण के उलट सीता खुद को अग्निपरिक्षा के बजाय रावण को अग्निपरिक्षा देने पर मजबूर करती हैं।
सीता को अपनी सफाई खुद देनी पड़ी थी लेकिन इस मामले में कुमार विश्वास को अपने संबंधों का सच सार्वजनिक करने के लिए कह रही है। ताकि उसका घर बच सके।
कुमार कथा के राम !
आप महिला कार्यकर्ता के पति की भूमिका राम से मिलती है। जिस प्रकार राम धोबी की बात सुनकर सीता को अग्निपरिक्षा के लिए मजबूर करते हैं। ठीक उसी प्रकार पर्दे से पीछे रहकर महिला के पति ने भी अपनी पत्नी को आरोपों से बरी होने के लिए अकेला छोड़ दिया है।
कुमार कथा की मंदौंदरी- कुमार विश्वास की पत्नी का पक्ष विवाद में रामायण के पात्र और रावण की पत्नी मंदौदरी से मेल खाता है। जैसे मदौंदरी रावण की करतूतों का ना खंड़न करती है और ना ही समर्थन, ठीक वैसे ही हालात कमोबेस कुमार विश्वास की पत्नी मंजू के नजर आते हैं।
कुमार कथा के कुंभकरण
दिल्ली पुलिस की गतिविधियां इस किरदार में फिट बैठती है। क्योंकि महिला के पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराने के 15 दिन बाद भी दिल्ली पुलिस नहीं जागी। अबतक पुलिस की भूमिका इस मामले में बहुत कम ही देखने को मिली है।
कुमार कथा के विभीषण- आम आदमी पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टीयों में गए लोग इस श्रेणी में आते हैं। क्योंकि शायद ही संबंधों की हकीकत इनकी नजर से दूर हों। वह भी तब जबकि किसी समय ये आम आदमी पार्टी के खास नेता रह चुके हों।