फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   rajkamal chaudhary award to pankaj bisht

मित्रनिधि ने किया एलानः इस बार का राजकमल चौधरी सम्मान पंकज बिष्ट को

Tue, 19 Mar 2019 01:15 AM IST
दुष्यंत शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Tue, 19 Mar 2019 01:15 AM IST
विज्ञापन
rajkamal chaudhary award to pankaj bisht
पंकज बिष्ट

इस बार का राजकमल चौधरी स्मृति सम्मान सुपरिचित कथाकार पंकज बिष्ट को प्रदान किया जाएगा। सम्मान समारोह दिल्ली में 19 जून को आयोजित होगा। उल्लेखनीय है कि यह सम्मान दो वर्ष में एक बार ‘मित्रनिधि’ की ओर से प्रदान किया जाता है जिसके संरक्षक हिंदी के वरिष्ठ कवि कथाकार विष्णु चंद्र शर्मा हैं। पहला राजकमल स्मृति सम्मान सुपरिचित कवि इब्बार रब्बी को 2016 में प्रदान किया गया था। 

विज्ञापन


इस बार के निर्णायक और सुप्रतिष्ठित आलोचक जानकी प्रसाद शर्मा का कहना है कि पंकज बिष्ट समकालीन कथा साहित्य को अपनी विशिष्ट सृजनात्मकता से समृद्ध करने वाले एक प्रतिष्ठित रचनाकार हैं। 1967 में साप्ताहिक हिंदुस्तान कहानी के प्रकाशन के साथ वे शब्द की दुनिया में दाखिल होते हैं। शुरू से ही उन्होंने अधिक के बजाय सार्थक लिखने के रवैये को वरीयता दी है। 
विज्ञापन


अब तक के विकास को मद्देनजर रखते हुए कहा जा सकता है कि पंकज जी ने कहानी व उपन्यास को कथ्य की नई जमीन दी है और भाषा, शिल्प व संरचनात्मक प्रयोगों से  सृजन की नई संभावनाओं के द्वार खोले हैं। उनके ‘अंधेरे से’ (असगर वजाहत के साथ 1977), पंद्रह जमा पच्चीस’ 1980, ’बच्चे गवाह नहीं हो सकते’ 1985 और ‘टुंड्रा प्रदेश तथा अन्य कहानियां’ 1995, संग्रहों की कहानियों के अलावा ‘लेकिन दरवाजा’, ‘उस चिड़िया का नाम’ और ’पंख वाली नाव’ जैसे उपन्यास वैचारिक संयम और कलात्मक सौष्ठव की विरल मिसालें हैं। 
विज्ञापन
विज्ञापन


यह निर्विवाद है कि ‘लेकिन दरवाजा’ अनुभव और अभव्यक्ति की ताजगी की बिना पर हिंदी उपन्यास में नई रचनाशीलता की एक दस्तक साबित हुआ। वहीं ‘बच्चे गवाह नहीं हो सकते’ कहानी ने टीवी की जनविरोधी और अमानवीय भूमिका (जो अब ज्यादा क्रूर हो चुकी है )  की ओर पहली बार ध्यान आकर्षित किया। गरज यह कि नई उभरती हुई वास्तविकताओं पर उनकी गहरी निगाह रही है। ‘खरामा खरामा’ (यात्राएं) और ‘शब्द के लोग’ (सहयात्रियों के संस्मरण )किताबें उनके कथेतर गद्य की बेहतरीन बानगियां हैं।


एक संपादक और साहत्यिक पत्रकार के रूप में भी वे सुविख्यात हैं। उन्होंने भारतीय सूचना सेवा में रहते हुए ‘आजकल’ (हिंदी मासिक) का संपादन किया और अब 1999 से ’समयांतर’ मासिक का संपादन कर रहे हैं। लेखन और निजी व्यवहार में उनकी प्रतिबद्धता एकसाथ प्रतिफलित है। एक वरिष्ठ कथाकार और साहित्यिक पत्रकार के रूप में उनका विशिष्ट योगदान राजकमल चौधरी सम्मान की गरिमा के सर्वथा अनुरूप है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed