राजेंद्र कुमार की जमानत पर फैसला सुरक्षित, CBI ने लगाया गवाहों को प्रभावित करने का आरोप
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दिल्ली सरकार के निलंबित प्रधान सचिव राजेंद्र कुमार की जमानत याचिका पर बचाव पक्ष और सीबीआई की दलीलें सुनने के बाद सीबीआई अदालत ने फैसला सोमवार तक सुरक्षित रख लिया। सीबीआई ने राजेंद्र कुमार पर गवाहों को धमकाने का आरोप लगाते हुए याचिका का विरोध किया।
पटियाला हाउस स्थित विशेष सीबीआई जज अरविंद कुमार ने राजेंद्र कुमार की जमानत याचिका पर बचाव पक्ष व सीबीआई की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया।
जमानत याचिका पर अदालत 25 जुलाई को फैसला सुनाएगी। पूर्व प्रधान सचिव राजेंद्र कुमार की ओर से बहस करते हुए बचाव पक्ष ने कहा कि आरोपी पिछले 18 दिनों से हिरासत में है।
इस मामले में उसकी कोई भूमिका नहीं है और न वह इस साजिश में शामिल है। बचाव पक्ष के अधिवक्ता मोहित माथुर ने कहा कि उनके मुवक्किल से साढ़े छह माह से रोजाना पूछताछ हो रही थी।
'राजेंद्र कुमार अभी तक गवाहों को धमका रहा है'
सीबीआई ने एफआईआर के साढ़े छह महीने बाद राजेंद्र कुमार को गिरफ्तार किया। इस मामले में एफआईआर दर्ज करने के फौरन बाद 15 दिसंबर को राजेंद्र कुमार के घर, दफ्तर, बैंक समेत कई स्थानों पर छापेमारी कर दस्तावेज बरामद कर चुकी थी।
अब सीबीआई को कोई पूछताछ नहीं करनी है। बचाव पक्ष ने कहा कि उनके मुवक्किल का स्वास्थ्य भी खराब है और उसकी बेटी को भी दिल से संबंधित बीमारी है।
जमानत याचिका का विरोध करते हुए सीबीआई की अधिवक्ता सोनिया माथुर व वीके ओझा ने कहा कि राजेंद्र कुमार अभी तक गवाहों को धमका रहा है। इसके अलावा अभी इस मामले में घूस के पैसे का स्रोत पता करना है और कई गवाहों के बयान दर्ज किए जाने हैं।
इससे पहले विशेष सीबीआई कोर्ट ने राजेंद्र कुमार, आईसीएसएल के एमडी आरएस कौशिक, पूर्व एमडी जीके नंदा, उप सचिव तरुण शर्मा, एंडेवर सिस्टम प्राइवेट लिमिटेड (ईएसपील) के दो निदेशक दिनेश कुमार गुप्ता व संदीप कुमार, अशोक कुमार को पुलिस रिमांड खत्म होने के बाद पिछले सप्ताह न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया था।