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रेलवे ट्रैक पर ईयरफोन: युवा आ रहे ट्रेनों की चपेट में

Mon, 28 Apr 2014 08:14 PM IST
भोला पांडे/अमर उजाला, फरीदाबाद
भोला पांडे/अमर उजाला, फरीदाबाद Updated Mon, 28 Apr 2014 08:14 PM IST
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railway track: Young hit by trains coming

अस्सी व नब्बे के दशक में लोग मनोरंजन के साधन के रूप में रेडियो का इस्तेमाल करते थे, वह भी चौपाल और घरों में बैठकर गीत-संगीत का आनंद लेते थे। 21वीं सदी में आते-आते रेडियो का स्थान मोबाइल फोन ने ले लिया। अब लोगों में मोबाइल फोन से गाने सुनने का शौक बढ़ा।

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थोड़ा और सुधार होने पर लोग कान में ईयरफोन लगाकर गाने सुनने के शौकीन बन गए। एक दूसरे से हर समय संवाद बनाए रखने की सुविधा के लिए बना मोबाइल फोन अब कुछ नियम विरुद्ध आदतों से उनकी जान और कान दोनों का दुश्मन बन गया है।
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रेलवे स्टेशन हो या फिर बस स्टैंड, बाजार की सड़कें हों या फिर हाईवे, ईयरफोन लगाकर गाना सुनते हुए युवाओं को आसानी से देखा जा सकता है। ईयरफोन से रेलवे ट्रैक पर होने वाली घटनाओं को लेकर पेश है संवाददाता भोला पाण्डेय और फोटोग्राफर गौरव चौधरी की रिपोर्ट:
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साल दर साल मृतकों की संख्या में इजाफा
दिल्ली-मुंबई के मेन ट्रैक पर पड़ने वाले फरीदाबाद सेक्शन के तीन स्टेशनों ओल्ड, बल्लभगढ़ व पलवल से प्रतिदिन करीब 50 हजार यात्री लोकल सफर करते हैं। इनमें 70 प्रतिशत संख्या युवाओं की होती है। इन तीनों स्टेशनों पर बड़ी संख्या में लोगों को कानों में ईयरफोन लगाकर रेलवे ट्रैक पार करते हुए देखा जा सकता है। गाहे बगाहे ऐसे लोग ट्रेनों की चपेट में आने से अपनी जान गंवा रहे हैं। साल दर साल मृतकों की संख्या में इजाफा हो रहा है।railway track

ट्रेन से उतरते ही आ जाते हैं ट्रैक पर
शटल गाड़ियों में सफर करने वाले यात्री उतरते ही प्लेटफॉर्म पार करने के लिए सीधे ट्रैक पर आ जाते हैं। इसी बीच आने वाली तेज रफ्तार गाड़ियाें की चपेट में आकर जान गंवा बैठते हैं। आरपीएफ एवं जीआरपी के पास ऐसी कोई योजना नहीं है, जिससे इन्हें रोका जा सके। आरपीएफ फरीदाबाद व बल्लभगढ़ स्टेशन पर कभी कभार कार्रवाई करते हुए 10-12 लोगों का चालान कर खानापूर्ति कर देती है।

लड़कियों में भी तेजी से बढ़ा प्रचलन
जीआरपी के आंकड़ों की मानें, तो ट्रेन की चपेट में आने से होने वाली मौत की घटनाओं में करीब 15 प्रतिशत का कारण ईयरफोन बनता है। इतना होने के बावजूद युवाओं में इसका क्रेज दिनोंदिन और बढ़ता जा रहा है। खुद जीआरपी भी इस बात को लेकर परेशान है। यह प्रचलन लड़कियों में भी तेजी से बढ़ा है।

स्वास्थ्य की दृष्टि से नुकसानदायक
बीके अस्पताल के प्रधान चिकित्सा अधिकारी एवं ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. कृष्ण कुमार का कहना है कि ईयरफोन के कारण लोगों में धीरे-धीरे सुनने की क्षमता कम हो रही है। युवाओं को इससे बहुत नुकसान होता है। ध्यान बंटने के कारण ही युवा रेल और सड़क दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं। उनका यह भी दावा है कि ईयरफोन के अधिक उपयोग के कारण उसमें से निकलने वाली इलेक्ट्रो मैगनेटिक वेव्स दिमाग को भी प्रभावित करती हैं।


ट्रेन की चपेट में आने से हुई मौत के आंकड़े
वर्ष-----------मृतकों की संख्या------------महिलाएं
2011-----------364----------------------44
2012-----------358----------------------52
2013-----------385----------------------41
2014-----------114----------------------22 (अब तक)
(इसमें करीब 10 से 15 फीसदी ईयरफोन के कारण)

फरीदाबाद में रेलवे सुरक्षा बल के इंस्पेक्टर पीके वर्मा ने कहा, आरपीएफ हमेशा रेलवे ट्रैक पार करने वालों के खिलाफ अभियान चलाती रहती है। समय-समय पर लोगों को ईयरफोन लगाकर सफर न करने का सुझाव भी देती है, लेकिन युवाओं पर इसका असर नहीं होता।

इस प्रवृति को रोकने के लिए परिजनों को घर से ही पहल करनी होगी। केवल पुलिस के सहारे और चालान काटने भर से इस समस्या का समाधान संभव नहीं है।

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