कोरोना के खिलाफ जंग जीतने में रेल मंत्रालय की भी अहम भूमिका
- नई दिल्ली स्थित रेलवे अस्पताल ने 100 से अधिक मरीजों को ठीक किया
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कोरोना वायरस के खिलाफ जंग जीतने में स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ ही रेल मंत्रालय भी अहम भूमिका निभा रहा है। रेल कर्मी रोज नए-नए प्रयोग कर वह सब बना रहे हैं, जिससे कोरोना वायरस के संक्रमित लोगों को बचाया जा सके। रेलवे अस्पताल भी इसमें पीछे नहीं हैं। नई दिल्ली स्थित रेलवे सेंट्रल हॉस्पिटल ने तो 100 से अधिक कोविड-19 के मरीजों को ठीक करने में कामयाबी हासिल कर ली है। इसमें बड़ी संख्या में कोरोना वॉरियर रेलवे प्रोटेक्शन स्पेशल फोर्स के जवान शामिल हैं। अभी भी इस अस्पताल में 40 से अधिक कोविड-19 के मरीजों का उपचार किया जा रहा है।
रेल मंत्रालय ने अपने सभी अस्पतालों को एडवाइजरी जारी कर निर्देश दिया है कि केंद्र सरकार में काम करने वाले सभी लोगों की बीमारी का इलाज करें। देशभर में रेलवे के अपने 129 अस्पताल हैं और 586 डिस्पेंसरी। इन अस्पतालों में अभी तक सिर्फ रेलवे कर्मियों को ही इलाज की सुविधा दी जाती थी। अब रेलवे ने सभी केंद्रीय कर्मचारियों के लिए इसे खोल दिया है। उधर, रेलवे ट्रेनों को भी आइसोलेटेड वार्ड की तरह तैयार कर चुका है, ताकि कोरोना संक्रमित मरीजों को क्वारंटीन किया जा सके। उत्तर रेलवे ने इस तरह के 540 कोच तैयार किए हैं।
1.30 लाख पीपीई किट जल्द होंगी तैयार
रेल मंत्रालय ने 3 लाख पीपीई किट बनाने का लक्ष्य अपने कर्मियों को दिया है, ताकि डॉक्टर, नर्स और पैरामेडिकल स्टाफ समेत सभी चिकित्सा कर्मियों को कोई परेशानी नहीं हो। हरियाणा स्थित जगाधरी वर्कशॉप में पीपीई किट तैयार की जा रही हैं। उत्तर रेलवे के प्रिंसिपल चीफ मेकेनिकल इंजीनियर अरुण अरोड़ा ने बताया कि इस वर्कशॉप में हर महीने 65 हजार किट तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। जल्द ही 1.30 लाख पीपीई किट तैयार कर ली जाएंगी।
ऑटोमैटिक डिस्इंफेक्शन व्हीकल बनाया
भूसावल इलेक्ट्रिकल लोको शेड ने ऑटोमैटिक डिस्इंफेक्शन व्हीकल तैयार किया है। यह पांच तरह के मिस्ट स्प्रे सिस्टम से सोडियम हाइपोक्लोराइट का छिड़काव करता है। इसका प्रयोग ट्रेनों के सेनेटाइजेशन के साथ ही रेल ट्रैक, लोको शेड, वाशिंग एरिया समेत अन्य जगहों पर भी किया जा रहा है। ऑक्सीजन सिलिंडर ट्रॉली का भी निर्माण किया जा रहा है।
मास्क और सैनिटाइजर भी बना रहे कर्मी
रेल कर्मी संक्रमण से लड़ने के लिए मास्क व सैनिटाइजर का भी निर्माण कोच फैक्ट्री में कर रहे हैं। उत्तर रेलवे ने डेढ़ लाख से अधिक मास्क तैयार करने में कामयाबी हासिल की है, तो 10 हजार लीटर से अधिक सैनिटाइजर भी बनाया है।