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Delhi NCR News: अब चहारदीवारी से होगी रेलवे जमीन की सुरक्षा
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- अतिक्रमण से बचाने के लिए घनी आबादी में रेलवे की जमीन पर होगा चारदीवारी का निर्माण
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। रेलवे की जमीन को अतिक्रमण से बचाने के लिए उत्तर रेलवे अब घनी आबादी वाले इलाकों में चहारदीवारी का निर्माण कराएगा। इसमें दिल्ली समेत उन क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाएगी, जहां रेलवे की जमीन बस्तियों, बाजारों और रिहायशी इलाकों से घिरी हुई है और वहां अतिक्रमण का खतरा अधिक है। इस परियोजना को लेकर निविदा भी जारी कर दी गई है।
दिल्ली में रेलवे की जमीन कई स्थानों पर खुले हिस्सों, पटरियों और आबादी के बीच स्थित है। ऐसे में खाली जमीन पर धीरे-धीरे झुग्गी, अस्थायी दुकान, खोखा, टीन-टप्पर या अन्य ढांचे खड़े होने की आशंका रहती है। रेलवे की ओर से समय-समय पर ऐसे अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाती है, लेकिन दोबारा अतिक्रमण की समस्या सामने आ जाती है। इसी को ध्यान में रखते हुए रेलवे चहारदीवारी का निर्माण कराने जा रहा है। अभी भी कई जगहों पर रेलवे की जमीन पर चहारदीवारी है।
रेलवे की जमीन पर अतिक्रमण की समस्या पुरानी
दिल्ली में रेलवे की जमीन पर अतिक्रमण की समस्या नई नहीं है। इसमें दयाबस्ती, शकूरबस्ती, वजीरपुर के आसपास रेलवे लाइन, संजय कैंप-चाणक्यपुरी, पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन के आसपास का क्षेत्र और रेलवे लाइन के कई हिस्से शामिल हैं। दयाबस्ती क्षेत्र में रेलवे की जमीन पर लंबे समय से अतिक्रमण की समस्या रही है। दयाबस्ती और शकूरबस्ती के बीच रेलवे लाइन के किनारे अतिक्रमण और कबाड़ संबंधी गतिविधियों पर कार्रवाई भी हुई। इसके अलावा पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन, तिलक ब्रिज, बंगाली मार्केट और प्रगति मैदान के आसपास रेलवे की जमीन से जुड़े अतिक्रमण के मामले भी सामने आ चुके हैं।
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चहारदीवारी से स्पष्ट होगी रेलवे की जमीन
रेलवे का मानना है कि चहारदीवारी से जमीन की सीमा स्पष्ट होने के साथ ही नए अतिक्रमण और अनधिकृत प्रवेश पर भी रोक लगाने में मदद मिलेगी। इससे जमीन की निगरानी, रखरखाव और अतिक्रमण की पहचान करना आसान होगा। रेलवे के अपने दिशा-निर्देशों में भी अनधिकृत प्रवेश को रोकने और रेलवे ट्रैक की सुरक्षा के लिए संवेदनशील स्थानों पर चहारदीवारी या बाड़ लगाने का प्रावधान है। करीब 4.69 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना को पूरा करने के लिए 12 महीने की अवधि तय की गई है।
कई रेलखंड अतिक्रमण की दृष्टि से चुनौतीपूर्ण
रेलवे की जमीन पर अतिक्रमण केवल स्टेशन के आसपास तक सीमित नहीं रहा है। दिल्ली में हजरत निजामुद्दीन-ओखला, पटेल नगर-दिल्ली कैंट, नांगलोई फाटक, सब्जी मंडी-आजादपुर, किशनगंज, आनंद विहार-मंडावली और तुगलकाबाद-फरीदाबाद जैसे रेलखंड अतिक्रमण की दृष्टि से चुनौतीपूर्ण हैं। इन इलाकों में आबादी और रेलवे लाइन के बीच दूरी कम होने के कारण रेलवे के लिए अपनी जमीन की निगरानी करना मुश्किल हो जाता है। यहां कहीं झुग्गियां हैं तो कहीं दुकानें, कबाड़ का भंडारण, पार्किंग या अन्य अस्थायी गतिविधियां रेलवे की जमीन तक पहुंच जाती हैं।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। रेलवे की जमीन को अतिक्रमण से बचाने के लिए उत्तर रेलवे अब घनी आबादी वाले इलाकों में चहारदीवारी का निर्माण कराएगा। इसमें दिल्ली समेत उन क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाएगी, जहां रेलवे की जमीन बस्तियों, बाजारों और रिहायशी इलाकों से घिरी हुई है और वहां अतिक्रमण का खतरा अधिक है। इस परियोजना को लेकर निविदा भी जारी कर दी गई है।
दिल्ली में रेलवे की जमीन कई स्थानों पर खुले हिस्सों, पटरियों और आबादी के बीच स्थित है। ऐसे में खाली जमीन पर धीरे-धीरे झुग्गी, अस्थायी दुकान, खोखा, टीन-टप्पर या अन्य ढांचे खड़े होने की आशंका रहती है। रेलवे की ओर से समय-समय पर ऐसे अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाती है, लेकिन दोबारा अतिक्रमण की समस्या सामने आ जाती है। इसी को ध्यान में रखते हुए रेलवे चहारदीवारी का निर्माण कराने जा रहा है। अभी भी कई जगहों पर रेलवे की जमीन पर चहारदीवारी है।
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रेलवे की जमीन पर अतिक्रमण की समस्या पुरानी
दिल्ली में रेलवे की जमीन पर अतिक्रमण की समस्या नई नहीं है। इसमें दयाबस्ती, शकूरबस्ती, वजीरपुर के आसपास रेलवे लाइन, संजय कैंप-चाणक्यपुरी, पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन के आसपास का क्षेत्र और रेलवे लाइन के कई हिस्से शामिल हैं। दयाबस्ती क्षेत्र में रेलवे की जमीन पर लंबे समय से अतिक्रमण की समस्या रही है। दयाबस्ती और शकूरबस्ती के बीच रेलवे लाइन के किनारे अतिक्रमण और कबाड़ संबंधी गतिविधियों पर कार्रवाई भी हुई। इसके अलावा पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन, तिलक ब्रिज, बंगाली मार्केट और प्रगति मैदान के आसपास रेलवे की जमीन से जुड़े अतिक्रमण के मामले भी सामने आ चुके हैं।
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चहारदीवारी से स्पष्ट होगी रेलवे की जमीन
रेलवे का मानना है कि चहारदीवारी से जमीन की सीमा स्पष्ट होने के साथ ही नए अतिक्रमण और अनधिकृत प्रवेश पर भी रोक लगाने में मदद मिलेगी। इससे जमीन की निगरानी, रखरखाव और अतिक्रमण की पहचान करना आसान होगा। रेलवे के अपने दिशा-निर्देशों में भी अनधिकृत प्रवेश को रोकने और रेलवे ट्रैक की सुरक्षा के लिए संवेदनशील स्थानों पर चहारदीवारी या बाड़ लगाने का प्रावधान है। करीब 4.69 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना को पूरा करने के लिए 12 महीने की अवधि तय की गई है।
कई रेलखंड अतिक्रमण की दृष्टि से चुनौतीपूर्ण
रेलवे की जमीन पर अतिक्रमण केवल स्टेशन के आसपास तक सीमित नहीं रहा है। दिल्ली में हजरत निजामुद्दीन-ओखला, पटेल नगर-दिल्ली कैंट, नांगलोई फाटक, सब्जी मंडी-आजादपुर, किशनगंज, आनंद विहार-मंडावली और तुगलकाबाद-फरीदाबाद जैसे रेलखंड अतिक्रमण की दृष्टि से चुनौतीपूर्ण हैं। इन इलाकों में आबादी और रेलवे लाइन के बीच दूरी कम होने के कारण रेलवे के लिए अपनी जमीन की निगरानी करना मुश्किल हो जाता है। यहां कहीं झुग्गियां हैं तो कहीं दुकानें, कबाड़ का भंडारण, पार्किंग या अन्य अस्थायी गतिविधियां रेलवे की जमीन तक पहुंच जाती हैं।