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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Questions raised again regarding tree felling in the TTZ; interim application filed with the NGT.

Delhi NCR News: टीटीजेड में पेड़ों की कटाई पर फिर उठे सवाल, एनजीटी में अंतरिम अर्जी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 31 Aug 2026 07:03 PM IST
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एफआईआर के बाद भी कटान का आरोप, पर्यावरण कार्यकर्ता ने एनजीटी से की सख्त कार्रवाई की गुजारिश, संयुक्त जांच और ड्रोन सर्वे की मांग
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। ताजमहल की सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के लिए बनाए गए ताज ट्रैपेजियम जोन (टीटीजेड) में हरे पेड़ों की कटाई के मामले फिर सामने आए हैं। सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के पर्यावरण संरक्षण संबंधी आदेशों के बावजूद आगरा के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में पेड़ों की कटाई पर रोक नहीं लग पा रही है। पर्यावरण कार्यकर्ता जगन प्रसाद तेहरिया ने इन मामलों को लेकर एनजीटी में अंतरिम अर्जी दाखिल कर टीटीजेड में पेड़ों की कटाई पर तत्काल रोक और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।
अर्जी में न्यू आगरा थाने के जीर्णोद्धार के दौरान पुराने पीपल के पेड़ को काटे जाने का मामला प्रमुखता से उठाया गया है। पेड़ काटे जाने का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस और वन विभाग ने जांच शुरू की। बिचपुरी रेलवे फाटक के सामने निजी प्लॉट में पेड़ों की कटाई का मामला भी शामिल है। आरोप है कि 16 पेड़ काटे जाने पर एफआईआर दर्ज की गई, लेकिन उसी दिन शाम को प्लॉट में बचे 15 पेड़ भी काट दिए गए। याचिकाकर्ता ने इसे प्रशासन की निगरानी और कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल उठाने वाला मामला बताया है।
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गांवों में भी नहीं थम रहा कटान
अर्जी में मलपुरा के बाईखेड़ा गांव में सात नीम के पेड़ और बरहन के सेवरा गांव में माइनर की पटरी से नीम व बबूल के आठ पेड़ काटे जाने का भी उल्लेख है। दयालबाग और यमुना के बीहड़ों में पेड़ों की कटाई के मामलों के साथ भैरों बाजार स्थित कृष्णा मेट्रो मॉल के निर्माण के दौरान हरियाली को नुकसान पहुंचाने के आरोप भी उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता के अनुसार, टीटीजेड में पर्यावरण संरक्षण के लिए नियम होने के बावजूद प्रभावी निगरानी नहीं हो रही है।
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कार्रवाई पर उठे सवाल
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि अवैध कटाई के मामलों में कार्रवाई एफआईआर या जुर्माना लगाने तक सीमित रह जाती है। दोषियों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से कानून का भय कम हो रहा है। पुराने पीपल, नीम और अर्जुन जैसे पेड़ों की कटाई को देखते हुए निगरानी व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत बताई गई है।

एनजीटी से जांच और ड्रोन सर्वे की मांग
अर्जी में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी), उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी), जिला प्रशासन और टीटीजेड प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारियों की संयुक्त समिति गठित कर स्थलीय जांच कराने की मांग की गई है। पूरे आगरा और टीटीजेड क्षेत्र में पेड़ों की कटाई पर तत्काल रोक लगाने के साथ डीएम, डीएफओ, पुलिस कमिश्नर और संबंधित अधिकारियों को तलब कर लापरवाही की जांच की मांग की गई है। दोषी अधिकारियों के खिलाफ कानूनी और विभागीय कार्रवाई तथा पेड़ों की कटाई से हुए नुकसान के आकलन के लिए ड्रोन और सैटेलाइट मैपिंग कराने की मांग भी की गई है।
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