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पूर्वांचल समुदाय को साधने में जुटीं सभी पार्टियां, एक तिहाई से ज्यादा सीटों पर इनका है दबदबा

Sat, 10 Aug 2019 07:45 PM IST
शाहरुख खान न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शाहरुख खान Updated Sat, 10 Aug 2019 07:45 PM IST
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Purvanchal community dominates more than one third seats in delhi
प्रतीकात्मक फोटो
दिल्ली के सियासी मैदान में पूर्वांचल से ताल्लुक रखने वाला समुदाय बड़ी ताकत बनकर उभरा है। विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटीं तीनों प्रमुख पार्टियों की नजर इस समुदाय को साधने पर है। दिल्ली की सियासी नब्ज टटोलने के बाद ही आम आदमी पार्टी (आप) व भाजपा ने पहले से ही दिल्ली प्रदेश की कमान पूर्वांचल से ताल्लुक रखने वाले नेताओं दे रखी हैं। 
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एक कदम आगे बढ़ते हुए भाजपा ने शुक्रवार को पूर्वांचल के एक कद्दावर नेता को सह प्रभारी बनाया है। उधर, कांग्रेस में भी प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर पूर्वांचल के नेता का नाम आगे चल रहा है। दरअसल, पहले दिल्ली की सियासत में पंजाबी और वैश्य समुदाय का दबदबा था। 
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लेकिन बीते कुछ चुनावों से पूर्वांचल से ताल्लुक रखने वाले लोगों ने बढ़त बनाई है। 2013 व 2015 के विधानसभा चुनावों में आप ने इस समुदाय को वोट बैंक के तौर पर देखा और बड़े पैमाने पर पूर्वांचल के लोगों को टिकट भी दिया। 
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इसका सीधा असर परिणाम पर दिखा। आप के करीब 12 विधायक इसी समुदाय से विधानसभा में पहुंचे। इस समय भी आप की कमान पूर्वांचल के गोपाल राय के हाथ में है। जबकि सांसद संजय सिंह भी पूर्वांचल से आते हैं। 

इसके अलावा वरिष्ठ नेता दिलीप पांडेय, दुर्गेश पाठक समेत दूसरे भी कई नेता इसी समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। 2015 विधानसभा चुनाव की करारी हार के बाद भाजपा ने भी इस समुदाय की ताकत पहचानी और पूर्वांचल की मशहूर शख्सियत मनोज तिवारी को पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया। 

नतीजा यह रहा कि सत्ता विरोधी लहर होने के बावजूद भाजपा एमसीडी चुनाव जीतने में कामयाब रही। जबकि लोकसभा चुनाव में सातों सीटें अपनी झोली में डाल ली। कांग्रेस के पास हालांकि लोकसभा चुनाव तक पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के तौर पर पूर्वांचली चेहरा था। 

लेकिन इनके निधन के बाद जगह खाली हो गई है। इससे निकलने के लिए कांग्रेस एक बार फिर किसी पूर्वांचल के नेता को कमान देना चाहती है। फिलहाल सिने स्टार शत्रुघ्न सिन्हा का नाम प्रदेश अध्यक्ष पद की दौड़ में आगे चल रहा है। 

कांग्रेस रणनीतिकार बताते हैं कि अगर पूर्वांचल से इतर किसी नेता को भी प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाता है, तो उसके सहयोगी के तौर पर पूर्वांचल के किसी नेता को लगाया जाएगा।

27 विधानसभा सीटों पर पूर्वांचल समुदाय का दबदबा

आंकड़ों की बात की जाए तो लोकसभा चुनाव तक दिल्ली में करीब 1.40 करोड़ मतदाता थे। 2009 के चुनाव में इनकी संख्या 1.10 करोड़ थी। एक अनुमान के अनुसार बढ़े मतदाताओं में से करीब 65 फीसदी पूर्वांचली हैं। 

वहीं, कुल मतदाताओं में इनकी संख्या एक तिहाई से ज्यादा है। सीट के हिसाब से बात की जाए तो उत्तर-पूर्वी संसदीय सीट पर करीब 28 फीसदी, पश्चिमी दिल्ली पर करीब 22, चांदनी चौक पर करीब 18, पूर्वी दिल्ली पर करीब 16 व दक्षिणी दिल्ली पर करीब 15 फीसदी मतदाता पूर्वांचल से ताल्लुक रखने वाले  हैं। 

दूसरी तरफ 70 विधानसभा सीटों में करीब 27 सीटों पर पूर्वांचली मतदाताओं का दबदबा है। सियासी दलों के अंदरूनी सर्वे बताते हैं कि 27 सीटों पर 35-40 फीसदी वोटर पूर्वांचल के हैं।
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