Delhi: विश्व पुस्तक मेले में देख सकेंगे भारतीय सेना का शौर्य, इतिहास; भारत मंडपम में आएंगे 30 देशों के प्रकाशक
विश्व पुस्तक मेला 10 जनवरी से भारत मंडपम में लगेगा। इस बार इसकी थीम इंडियन मिलिट्री हिस्ट्रीः वेलर, विजडम एट 75 है। इसमें दुनिया भारतीय सेना के इतिहास, वीरता और ज्ञान से रूबरू होगी।
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भारत मंडपम में 10 जनवरी से शुरू होने वाले विश्व पुस्तक मेला 2026 में दुनिया भारतीय सेना के इतिहास, वीरता और ज्ञान से रूबरू होगी। नौ दिवसीय पुस्तक मेले की थीम इंडियन मिलिट्री हिस्ट्री: वालोर, विजडम एट 75 रखी गई है। थीम पवेलियन के गेट का डिजाइन आईएमए देहरादून से प्रेरित है। भारत समेत 30 देशों के दर्शकों को, आजाद भारत मे 1947 को कश्मीर स्थित के बड़गाव में भारतीय सैनिकों और पाकिस्तानी कबायलियों के बीच पहला युद्ध, 1962 1965,1971, 1999 में कारगिल युद्ध से लेकर सर्जिकल स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर की भी जानकारी मिलेगी। खास बात है कि देश की सरहदों की रक्षा के लिए मिलने वाले सर्वोच्च सम्मान परमवीर चक्र, महावीर चक्र और वीर चक्र पाने वाले सैनिकों और उनके परिवारों से रूबरू होने का मौका भी मिलेगा।
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के अधीनस्थ, राष्ट्रीय पुस्तक ट्रस्ट न्यास (एनबीटी)के निदेशक लेफ्टिनेंट कर्नल युवराज मलिक ने बताया, मेले की थीम, भारतीय सेना के 75 वर्षों के इतिहास, वीरता और ज्ञान है। आजादी के बाद से, सेना, नौसेना और वायु सेना भारत की सीमाओं के रक्षक, एकता, अखंडता व सेवा प्रतीक के रूप में खड़ी हैं। उन्होंने न केवल देश की रक्षा की है, बल्कि इसे बनाने में भी मदद की है, उन मूल्यों को मज़बूत किया है, जो आज भारत को परिभाषित करते हैं। कर्तव्य, साहस और निस्वार्थ सेवा का उनका लोकाचार सहज लचीलेपन और विश्वास की एक गाथा है जो नागरिकों को प्रेरित करती रहती है। उनके योगदान को स्वीकार करने और उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए, राष्ट्रीय पुस्तक ट्रस्ट न्यास हमारे राष्ट्र के रक्षकों और शांतिदूतों का सम्मान करने की पहल कर रहा है। मेले में करीब 500 पुस्तकों का विमोचन होगा। प्रदर्शनी के साथ, इसमें सेना के जवानों द्वारा लिखित रचनाए भी शामिल हैं।
देश सबसे पहले, विविधता में एकता व सांस्कृतिक विरासत का संदेश
अधिकारी ने कहा, आजाद भारत में सेना के योगदान को डॉक्यूमेंट करना, सिर्फ लड़ाइयों को रिकॉर्ड करना नहीं है, बल्कि सांस्कृतिक विरासत के एक जरूरी हिस्से का जश्न मनाना है। विविधता में एकता की भावना को दर्शाना है, जहां अलग-अलग क्षेत्रों, समुदायों, परंपराओं के लोग एक साथ मिलकर एक साझा राष्ट्रीय मकसद के लिए काम करते हैं। बहादुरी, बलिदान और हिम्मत की ये कहानियाँ सिर्फ़ मिलिट्री की कहानियां नहीं हैं, ये खुद भारत की कहानियां हैं। इन्हें याद रखना और शेयर करना हमारी सामूहिक यादों को बनाए रखने में मदद करता है और आने वाकाली पीढ़ियों को याद दिलाता है कि एकता और सेवा का असली मतलब क्या है।
भारतीय सेना की वर्दी, रैंक, मैडल की भी जानकारी
मेले में, भारतीय सेना के अलावा डेढ़ सौ साल पुराना राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा थिंक टैंक यानी यूनाइटेड सर्विस इंस्टीट्यूशन ऑफ इंडिया भी सहयोग कर रहा है, ताकि, युवाओं को भारत की थल,वायु और जल सेना की वर्दी, रैंक, मैडल से लेकर उनके कामकाज के तरीके के बारे में भी सही जानकारियां मिल सकें। वर्दी, मैडल, रैँक को भी प्रदर्शित किया जाएगा। इसमें तीन सेेना किस रंग के कॉरपेट बिछाती है, भी शामिल है। इसके अलावा, प्रदर्शनी, किताबों, फोटो, ऑडियो-वीडियो के माध्यम से भारतीय सैनिक और सैन्य अधिकारी बनने के अवसर, परीक्षा, योग्यता, वेतन, सुविधाओं की जानकारी मिलेगी।
वीरता में हिमाचल सबसे ऊपर, चार परमवीर चक्र भी मिले
दर्शकों को हिमाचल प्रदेश और सेना का अटूट रिश्ता दिखेगा। क्योंकि, देश में सबसे अधिक, करीब 1700 सैनिक सरहदों की रखवाली में शहीद तो 1200 से अधिक को वीरता पुरस्कार मिल चुका है। जबकि, 21 परमवीर चक्र में से चार हिमाचल के नाम हैं। जिसमें, आजाद भारत, 1947 में भारत-पाकिस्तान के बीच कश्मीर को बचाने के बड़गाव युद्ध में शहीद देश के पहले परमवीर चक्र विजेता मेजर सोमनाथ शर्मा, 1962 में भारत-चीन के लद्दाख युद्ध में शिमला के मेजर (बाद में लेफ्टिनेंट कर्नल)धन सिंह थापा, कारिगल युद्ध के हीरो कैप्टन विक्रम बत्तरा और सेवाकाल में राइफलमैन संजय कुमार को परमवीर चक्र मिला है। कारगिल युद्ध में हिमाचल के 52 सैनिक शहीद हुए थे, जिसमें,कैप्टन सौरभ कालिया भी शामिल हैं।
तेजस, आईएनएस विक्रांत से लेकर अर्जुन टैंक भी दिखेगा
दर्शकों को सूडान ब्लॉक, एनडीए खड़कवासला के अलावा भारतीय सेना के थल, जल और वायु सेना की ताकत, अर्जुन टैंक, लड़ाकू विमान, तेजस, आईएनएस विक्रांत के मॉडल दिखेंगे। इसके अलावा, भारतीय सेना के अधिकारी युवाओं को सर्जिकल व एयर स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर के बारे में जानकारी देंगे।