जब एक ट्रेन भटक गई रास्ता!
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शनिवार को पटना से दिल्ली के आनंद विहार के लिए रवाना ट्रेन रविवार को नई दिल्ली स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर पहुंच गई।
इस दौरान साहिबाबाद से चलने के बाद ट्रेन किसी हादसे का शिकार नहीं हुई, लेकिन यात्रियों के साथ-साथ रेलवे प्रशासन के भी हाथ पांव फूल गए। यात्रियों ने स्टेशन पर हंगामा भी किया। उनका कहना था कि परिजन आनंद विहार में इंतजार करते रहे और गाड़ी नई दिल्ली पहुंच गई।
मामले को बड़ी चूक और गंभीर मानते हुए रेल प्रशासन ने दो सहायक स्टेशन मास्टर, दो लोको पायलट और एक गार्ड को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है।
पहली यात्रा ऐसी
रविवार की शाम करीब साढ़े पांच बजे नई दिल्ली रेलवे स्टेशन अधिकारियों के हाथ-पांव उस समय फूल गए जब एक अंजानी ट्रेन को प्लेटफॉर्म पर जगह देनी पड़ी।
हुआ यूं की पटना से आनंद विहार (02393) रेलवे स्टेशन के लिए एक स्पेशल ट्रेन चली थी। साहिबाबाद रेलवे स्टेशन तक तो यह ट्रेन ठीक आई, लेकिन यहां से आगे चलकर ट्रेन अपना रास्ता भटक गई। यात्रियों से भरी ट्रेन आनंद विहार रेलवे स्टेशन नहीं जाकर नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पहुंच गई। ऐसे में नई दिल्ली स्टेशन पहुंचे यात्री भी परेशान हुए और थोड़ी देर तक हंगामा भी किया।
उत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी नीरज शर्मा ने ट्रेन के नई दिल्ली स्टेशन पहुंचने और लापरवाही में निलंबित अधिकारियों व कर्मियों की भी पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि इस मामले में तीन सदस्यीय जांच कमेटी भी गठित की गई है। हालांकि उन्होंने इसे सुरक्षा कीदृष्टि से विशेष लापरवाही नहीं बताया है। उन्होंने बताया कि यात्रियों को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर उतार कर ट्रेन को वापस आनंद विहार रेलवे स्टेशन भेज दिया गया है।
रेल सुरक्षा पर बड़ा सवाल
रेलवे ट्रैक पर एक तरफ हाई स्पीड ट्रेन चलाने की बात हो रही है, वहीं ट्रेन पटरी बदल देती है और रेलवे प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं होती। रेलवे कंट्रोल रूम, पॉवर केबिन, ऑटोमेटिक सिग्नलिंग व्यवस्था के बावजूद इस तरह की लापरवाही देखने को मिल रही है।
पटना-आनंद विहार स्पेशल ट्रेन का आनंद विहार स्टेशन पर नहीं जाकर नई दिल्ली स्टेशन पहुंचना एक बड़ी चूक के रूप में देखा जा रहा है। शुक्र है कि पटरी पर कोई दूसरी ट्रेन नहीं थी। ऐसा होता तो आमने-सामने की टक्कर से बड़ा हादसा हो सकता था। कई यात्रियों की जान जा सकती थी।
पांच लेयर में हुई गलती
रेलवे के सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि भले ही जांच रिपोर्ट में इसे तकनीकी खामी बताई जाए, लेकिन पांच लेयर में गलती हुई है। पहले तो कंट्रोल रूम अंजान रहा। जबकि एलईडी लाइट कंट्रोल रूम में जलती रहती है, जिससे पता चलता है कि कौन ट्रेन किस ट्रैक पर चल रही है। कंट्रोल रूम में पूरे यार्ड की जानकारी होती है। इसी तरह पॉवर केबिन भी अंजान रहा। क्योंकि कंट्रोल रूम के डायरेक्शन पर पॉवर केबिन ट्रेन को दिशा देने में सहायक होता है।
विशेषज्ञों ने यह भी सवाल किया है कि दो-दो ट्रेन चालक क्या कर रहे थे जब ट्रेन दिशा भटक गई । संभव है कि ऑटोमेटिक सिग्नलिंग के गलत निर्देश के कारण ऐसा हुआ हो, लेकिन ऐसे में ड्राइवर ने वॉकी-टॉकी से कंट्रोेल रूम से संपर्क क्यों नहीं साधा। इसी तरह गार्ड की भी लापरवाही इस स्थिति में कम करके नहीं आंकी जा सकती। इसमें जिस स्टेशन से ट्रेन गुजरी वहां के भी स्टेशन मास्टर परिचालन की गलती है।