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पीटी टीचर के चलते एक बाई की बेटी ने ओलंपिक में जीते 4 मेडल

Sat, 08 Aug 2015 04:53 PM IST
Updated Sat, 08 Aug 2015 04:53 PM IST
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pt teacher made pushpa win 4 medals in special olympics 2015

बात साल 2013 जुलाई की है जब सरोजनी नगर के सरकारी बालिका विद्यालय में अनुपमा सिंह की मुलाकात पुष्पा कदायत से हुई। वो स्कूल के इंस्पेक्शन पर आईं थीं।

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उस वक्त पुष्पा की मां उसके बगल में खड़ी रो रही थी। 16 साल की पुष्पा का वजन 110 किलो था। इसके साथ ही एक अबूझ बीमारी की वजह से वो अपने बोलने और सुनने की क्षमता खो चुकी थी।
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यही नहीं वो खुद का बैलेंस भी नहीं बना पाती थी और उसे संभालने के लिए हमेशा कोई न कोई उसके साथ होना ही चाहिए ताकि वो नियंत्रण खोकर गिर ना जाए।

उस दिन ना मिलती पीटी टीचर तो पुष्पा न बन पाती ओलंपियन

pt teacher made pushpa win 4 medals in special olympics 2015

आप सोच रहे होंगे कि आखिर ये पुष्पा कौन है जिसके बारे में हम आपको बता रहे हैं। पुष्पा एक बहुत ही खास खिलाड़ी है जिसने स्पेशल ओलंपिक्स 2015 ‌में एक सिल्वर और तीन ब्रॉन्ज समेत चार मेडल जीते।

पुष्पा ने ये मेडल पॉवर लिफ्टिंग में जीते हैं। जिसका बहुत बड़ा श्रेय अनुपमा सिंह को जाता है जो एक पीटी टीचर हैं। शायद ये मेडल देश के नाम नहीं होते अगर साल 2013 में जब पुष्पा की मां उसका ट्रांसफर सर्टिफिकेट लेने आई थी और अनुपमा सिंह ने उन्हें समझाया ना होता।

पुष्पा ने अनुपमा से ट्रेनिंग लेकर ही स्पेशल ओलंपिक 2015 में 4 मेडल जीते हैं। वो लड़की जिसे संभालने के लिए हर वक्त कोई चाहिए था उसने ओलंपिक में पदक जीतक कमाल कर दिया है। पुष्पा की तारीफ खुद मनीष सिसोदिया अपने ट्वीट में कर चुके हैं।

दो साल पहले किसी के छूने भर से गिर जाती थी पुष्पा

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अगर पुष्पा के रोग की बात की जाए तो पांच-छह साल पहले अचानक से पुष्पा का वजन बढ़ गया और उसने अपने आंखों की रोशनी और बोलने की क्षमता गंवा दी। उसके समन्वय की क्षमता भी जाती रही।

पु‌ष्पा की बहन रूपा बताती है कि अगर कोई उसे छू भी लेता था तो वो गिर जाती थी। उन्होंने पुष्पा का कई तरह का इलाज करवाया लेकिन उसकी बहन अब भी नहीं बता पाती कि आखिर उसे हुआ क्या था।

पुष्पा की मां घरों में काम करती हैं और उसका पिता सिक्योरिटी गार्ड हैं और उन दोनों में से किसी के लिए ही स्कूल में पूरे समय उसके साथ रहना काफी मुश्किल था।

रूपा कहती है कि उस दिन मेरी मां पुष्पा को नेपाल में स्थित हमारे गांव भेजना चाहती थी जिसके लिए वो स्कूल से उसकी टीसी लेने गई थी, जहां उसकी अनुपमा मैडम से मुलाकात हुई।

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अनुपमा ने पहचाना पुष्पा का हुनर

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पुष्पा को अनुपमा सिंह अपने जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि मानती हैं। अनुपमा कहती हैं कि मुझे नहीं पता कि अगर वो मेरी अपनी बेटी होती तब भी मुझे इतनी खुशी होती की नहीं।

अनुपमा ने पुष्पा को देखते ही पहचान लिया था और उसकी मां से 10-15 दिन का समय मांगा था और उनपर विश्वास रखने को कहा था। अनुपमा ने सबसे पहले उसके क्लास के बच्चों से बात की तब उन्हें पता चला कि उसे बहुत कम दिखाई और सुनाई देता है।

पुष्पा के साथ ही अनुपमा ने और आठ विकलांग बच्चों की पहचान की। इसके बाद अनुपमा ने क्लास के बच्चों को सारी बात के बारे में बताया जिससे उनका आधा काम ऐसे ही आसान हो गया।

शॉटपुट में भी जीत चुकी है गोल्ड मेडल

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इसके बाद तो बच्चे वाशरूम जाने में उसकी मदद करने लगे और उसे क्लास तक भी पहुंचा देते थे। शिक्षकों ने भी उसकी मदद की और एक स्पेशल टीचर रखने के बाद कई सारे प्रयोग पुष्पा पर किए गए।

अनुपम कहती हैं कि उसे गाना पसंद है और पुष्पा को नाचना भी बहुत पसंद है। 2013 से लगातार डांस करने की वजह से पुष्पा के बॉडी बैलेंस और कॉर्डिनेशन में बहुत मदद मिली है। अनुपमा ने उसे शॉटपुट सिखाना शुरू किया।

शुरूआत में अनुपमा को डर था कि कहीं वो बॉल अपने पैर या गर्दन पर न गिरा ले ‌लेकिन उसने ऐसा कुछ नहीं हुआ और उसने जिला स्तर पर गोल्ड मेडल ‌जीता। इसके बावजूद पुष्पा को शॉटपुट बहुत अच्छा नहीं लगा और स्पेशल ओलंपिक भारत के कहने पर अनुपमा ने उसे पॉवर लिफ्टिंग में डाल दिया।

पुष्पा की बहन को अब नहीं छोड़नी पड़ेगी पढ़ाई

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पॉवर लिफ्टिंग की शुरूआत पुष्पा ने पेड़ों की शाखाओं को उठाकर की। इसके बाद अनुपमा ने पहल कर 500 रुपए प्रति महीने देकर पुष्पा को वर्कआउट करने के लिए भेजने लगीं। ये बात है 2014 में पटियाला की।

इस प्रैक्टिस के बाद पुष्पा ने राष्ट्रीय स्तर पर दो गोल्ड, एक सिल्वर मेडल लाकर स्पेशल ओलंपिक्स 2015 में अपनी जगह बनाई।

रूपा कहती है कि पहले वो डरती थी कि उसे अपनी बहन की देखभाल करने के लिए पढाई छोड़नी पड़ेगी। लेकिन अब उसे विश्वास है कि पुष्पा ठीक से रहेगी और उसने ये साबित भी कर दिया है।

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