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नोएडा-दिल्ली संपर्क मार्ग से हटने को तैयार नहीं प्रदर्शनकारी, शाहीन बाग में सड़क पर चल रहा क्रिकेट
Tue, 07 Jan 2020 03:17 AM IST
Vikas Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Vikas Kumar
Updated Tue, 07 Jan 2020 03:17 AM IST
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शाहीन बाग में प्रदर्शन करते लोग
- फोटो : अमर उजाला
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हरियाणा-दिल्ली-यूपी को जोड़ने वाली नोएडा-सरिता विहार रोड (रोड नंबर-13ए) पर इन दिनों जमकर क्रिकेट चल रहा है। सर्दियों की छुट्टियों का बच्चे खूब मजा ले रहे हैं। प्रदर्शनकारी किसी भी सूरत में यह रोड खाली करने को तैयार नहीं हैं।
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उनका कहना है कि सीएए और एनआरसी वापस लेने के एलान के बाद ही वे सड़क छोड़ेंगे। पिछले 22 दिन से रोड बंद होने के कारण यहां से नोएडा व दिल्ली आने-जाने वाले वाहन चालक हलाकान हैं। उन्हें आश्रम से होकर ही निकलना पड़ रहा है। वहां पहले से अंडरपास निर्माण चल रहा है। ऐसे में आश्रम चौक पार करने में ही वाहन चालकों के पसीने छूट रहे हैं।
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हरियाणा और दिल्ली से बड़ी संख्या में वाहन चालक नोएडा-गाजियाबाद व अन्य स्थानों पर जाने के लिए रोड नंबर-13ए का इस्तेमाल करते हैं। इस पर 24 घंटे यातायात का भारी दबाव रहता है। 15 दिसंबर से शाहीन बाग के सामने प्रदर्शनकारी टेंट लगाकर सड़क के बीचों-बीच बैठे हैं। इससे सड़क के दोनों केरिजवे को बंद कर दिया गया है। यहां बड़ी संख्या में महिलाएं व बच्चे मौजूद हैं, इसलिए पुलिस भी कानून-व्यवस्था बिगड़ने के डर से सख्त कार्रवाई से हिचक रही है।
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पुलिस प्रदर्शनकारियों को लगातार समझाकर सड़क से हटाने का प्रयास कर रही है। सड़क बंद होने की वजह से बच्चों ने इसे खेल का मैदान बना लिया है। वे यहां बेफिक्र क्रिकेट व बैडमिंटन खेलते नजर आते हैं। रोज ही यह सिलसिला जारी है। बच्चों का कहना है कि स्कूल की छुट्टियां हैं। आसपास कोई ग्राउंड न होने के कारण वह सड़क पर खेल रहे हैं।
जामिया छात्रों को मिला यशवंत सिन्हा और वृंदा करात का समर्थन
जामिया विश्वविद्यालय में लगातार 25 दिनों से जारी छात्रों के सत्याग्रह और भूख हड़ताल को पूर्व भाजपा नेता यशवंत सिन्हा और सीपीआई नेता वृंदा करात ने छात्रों के बीच पहुंच उन्हें अपना समर्थन दिया। उन्होंने छात्रों को सत्याग्रह जारी रखने की सलाह देते हुये कहा कि सीएए और एनआरसी के मुद्दे पर छात्रों का ध्यान सत्याग्रह से भटकाने के लिए जेएनयू के छात्रों पर हमला किया गया है। जेएनयू के जिन छात्रों ने जामिया के छात्रों के सत्याग्रह का समर्थन किया था, उन्हें पहचान कर पीटा गया है।
जामिया विश्वविद्यालय खुला था और छात्र भी सामान्य तरीके से विश्वविद्यालय आ जा रहे थे लेकिन सत्याग्रह कर रहे छात्र अपनी जगह पर जमे हुए थे। यहां छात्रों के बीच पहुंचे यशवंत सिन्हा ने कहा कि देश में बेरोजगारी और भुखमरी चरम पर है, विश्वविद्यालयों में सरेआम छात्रों और पत्रकारों को मारा जा रहा है। वहीं मौजूदा केन्द्र सरकार अपनी नाकामियां छुपाने के लिए आए दिन गैरजरूरी कानून लेकर आती रहती है ताकि वह देश की मासूम जनता को गुमराह कर सके। उन्होंने छात्रों से कहा कि वह कभी सीएए और एनआरसी जैसे कानून नहीं स्वीकार करेंगे। वहीं वृंदा करात ने कहा कि मौजूदा सरकार को देश के किसी नागरिक की परवाह नहीं है, उसे छात्रों और उसके हितों से कोई लेना देना नहीं है। इसीलिए आए दिन उनकी पुलिस विश्वविद्यालयों के अंदर घुसकर छात्रों को पीटती रहती है।
भूख हड़ताल जारी, रोजाना निकल रहा कैंडल मार्च
सीएए के खिलाफ आवाज उठाते हुए जिन लोगों की पुलिस द्वारा पिटाई की गई है, जो लोग प्रभावित हुए हैं, उनके सम्मान में जामिया परिसर और शाहीन बाग में रोजाना कैंडल मार्च निकाला जाता है। सोमवार को भी दोनों जगहों पर सत्याग्रह जारी रहा। जामिया विश्वविद्यालय के पांच छात्र सोमवार को भी भूख हड़ताल पर बैठे रहे।
जामिया विश्वविद्यालय खुला था और छात्र भी सामान्य तरीके से विश्वविद्यालय आ जा रहे थे लेकिन सत्याग्रह कर रहे छात्र अपनी जगह पर जमे हुए थे। यहां छात्रों के बीच पहुंचे यशवंत सिन्हा ने कहा कि देश में बेरोजगारी और भुखमरी चरम पर है, विश्वविद्यालयों में सरेआम छात्रों और पत्रकारों को मारा जा रहा है। वहीं मौजूदा केन्द्र सरकार अपनी नाकामियां छुपाने के लिए आए दिन गैरजरूरी कानून लेकर आती रहती है ताकि वह देश की मासूम जनता को गुमराह कर सके। उन्होंने छात्रों से कहा कि वह कभी सीएए और एनआरसी जैसे कानून नहीं स्वीकार करेंगे। वहीं वृंदा करात ने कहा कि मौजूदा सरकार को देश के किसी नागरिक की परवाह नहीं है, उसे छात्रों और उसके हितों से कोई लेना देना नहीं है। इसीलिए आए दिन उनकी पुलिस विश्वविद्यालयों के अंदर घुसकर छात्रों को पीटती रहती है।
भूख हड़ताल जारी, रोजाना निकल रहा कैंडल मार्च
सीएए के खिलाफ आवाज उठाते हुए जिन लोगों की पुलिस द्वारा पिटाई की गई है, जो लोग प्रभावित हुए हैं, उनके सम्मान में जामिया परिसर और शाहीन बाग में रोजाना कैंडल मार्च निकाला जाता है। सोमवार को भी दोनों जगहों पर सत्याग्रह जारी रहा। जामिया विश्वविद्यालय के पांच छात्र सोमवार को भी भूख हड़ताल पर बैठे रहे।