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क्रिकेट सट्टेबाजी से कमाए मुनाफे अपराध से अर्जित संपत्ति : हाईकोर्ट
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने सोमवार को एक अहम फैसले में कहा कि क्रिकेट सट्टेबाजी से प्राप्त मुनाफा मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत अपराध से अर्जित संपत्ति की श्रेणी में आएगा। कोर्ट ने कहा कि ऐसी संपत्ति पर शुरू से ही अपराध का दाग लगा होता है और बाद में उसका किसी भी रूप में उपयोग करने पर भी यह दाग नहीं मिटता।
न्यायमूर्ति अनिल क्षेत्रपाल और न्यायमूर्ति हरीश वैद्यनाथन शंकर की बेंच ने कहा कि भले ही क्रिकेट सट्टेबाजी अपने आप में कोई अलग संज्ञेय अपराध न हो, लेकिन सुपर मास्टर आईडी की अनुपलब्धता के बिना अंतरराष्ट्रीय सट्टेबाजी का पूरा रैकेट चलना असंभव था। यह फैसला 2015 के कथित 2,400 करोड़ रुपये के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट सट्टेबाजी रैकेट से जुड़े कई आरोपियों की याचिकाओं को खारिज करते हुए दिया गया। आरोपियों ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा 2015 में जारी प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर और शो-कॉज नोटिस को चुनौती दी थी।
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नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने सोमवार को एक अहम फैसले में कहा कि क्रिकेट सट्टेबाजी से प्राप्त मुनाफा मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत अपराध से अर्जित संपत्ति की श्रेणी में आएगा। कोर्ट ने कहा कि ऐसी संपत्ति पर शुरू से ही अपराध का दाग लगा होता है और बाद में उसका किसी भी रूप में उपयोग करने पर भी यह दाग नहीं मिटता।
न्यायमूर्ति अनिल क्षेत्रपाल और न्यायमूर्ति हरीश वैद्यनाथन शंकर की बेंच ने कहा कि भले ही क्रिकेट सट्टेबाजी अपने आप में कोई अलग संज्ञेय अपराध न हो, लेकिन सुपर मास्टर आईडी की अनुपलब्धता के बिना अंतरराष्ट्रीय सट्टेबाजी का पूरा रैकेट चलना असंभव था। यह फैसला 2015 के कथित 2,400 करोड़ रुपये के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट सट्टेबाजी रैकेट से जुड़े कई आरोपियों की याचिकाओं को खारिज करते हुए दिया गया। आरोपियों ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा 2015 में जारी प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर और शो-कॉज नोटिस को चुनौती दी थी।
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