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बारातघरों की ऑनलाइन बुकिंग, खाली भूखंडों पर भी होगी शादी
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा
Updated Sat, 09 Jan 2016 05:23 AM IST
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प्राधिकरण की योजना सफल रही तो नोएडावासी कार्यक्रमों के लिए बारातघरों की बुकिंग प्राधिकरण की वेबसाइट पर ऑनलाइन करा सकेंगे। लोगों को आवासीय संगठनों के पदाधिकारियों की खुशामद नहीं करनी पड़ेगी। प्राधिकरण बारातघरों की कमान अपने हाथों में लेने की तैयारी कर रहा है।
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नोएडा के आवासीय सेक्टरों में सामुदायिक केंद्र/बारातघरों का निर्माण और रखरखाव खुद नोएडा प्राधिकरण करता है, लेकिन उनकी बुकिंग खुद आवासीय संगठनों के पदाधिकारी करते हैं। बुकिंग को लेकर विवाद आए दिन प्राधिकरण के पास पहुंचता रहता है।
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कभी ज्यादा रकम वसूलने तो कभी बुकिंग रद्द करने की शिकायत मिलती रहती है, इसलिए प्राधिकरण अब सभी बारातघरों की व्यवस्था अपने पास रखने की कवायद कर रहा है। सभी बारातघरों की सूची बनाकर कंप्यूटर पर डाली जाएगी। आयोजन कराने वाले अपनी सुविधानुसार इनकी बुकिंग कर सकेंगे।
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बुकिंग व जमानत राशि भी चालान या ऑनलाइन जमा करने का विकल्प होगा। इससे आवासीय संगठनों के पदाधिकारियों की दखलंदाजी खत्म हो जाएगी।
साथ ही, प्राधिकरण बारातघरों की बुकिंग व अन्य जरिये से प्राप्त धनराशि का ऑडिट कराएगा। बारातघरों की बुकिंग धनराशि आवासीय संगठनों के पदाधिकारी लेते हैं। इसके खर्च का अता-पता नहीं है। अगर सेक्टरों में भी मरम्मत का कोई काम होना है तो प्राधिकरण ही कराता है। गेट पर सुरक्षा गार्ड तैनात करने और सफाई के नाम पर आरडब्ल्यूए वाले वहां के निवासियों से हर महीने तय शुल्क भी वसूलते हैं।
कई आरडब्ल्यूए के खातों में लाखों रुपये जमा हैं। आरडब्ल्यूए का पद पाने के लिए होने वाली जद्दोजेहद के लिए इसे भी वजह माना जा रहा है। इसकी वजह से आवासीय संगठनों से जुड़े लोग अलग-अलग गुटों में बंट जाते हैं। यह आपसी तनाव की वजह भी बन रहा है, इसलिए प्राधिकरण ने तय किया है कि आरडब्ल्यूए के आय-व्यय का ब्योरा लेकर ऑडिट कराया जाएगा। कितनी आमदनी हुई और उसे कहां-कहां खर्च किया, इसका हिसाब लिया जाएगा। नोएडा में 40 से अधिक बारातघर हैं।
प्राधिकरण शहर के खाली भूखंडों पर शादियां कराने की योजना बना रहा है। प्राधिकरण के एसीईओ पीके अग्रवाल ने बताया कि भूखंडों को चिह्नित किया जा रहा है। बुकिंग की जिम्मेदारी निजी कंपनी को दी जाएगी। उसके साथ पहले समझौता होगा। जिसमें जिक्र होगा कि जब भी भूखंड पर निर्माण कार्य होना होगा तब उसे खाली कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि सिर्फ उन्हीं भूखंडों का इस्तेमाल किया जाएगा, जिसके आसपास पार्किंग की उपलब्धता हो।