सोशल ट्रेडिंग के नाम पर ठगी करने के मामले में पेवे कंपनी की जांच शुरू
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दिल्ली निवासी दो पीड़ितों की शिकायत पर पुलिस ने कंपनी के दो डायरेक्टरों, एमडी और दो अन्य लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज की है। पुलिस का दावा है कि जल्द ही सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
साहिबाबाद के पैसिफिक बिजनेस पार्क में तीन ऑफिसों में चल रही पेवे कंपनी पर करीब 20 हजार लोगों से एक हजार करोड़ रुपये की ठगी का आरोप है। कंपनी ने लोगों को मेंबर बनाकर ऑनलाइन क्लिक के नाम पर रुपये कमाने का झांसा दिया।
आरोप है कि एक माह तक तो कंपनी ने लोगों के अकाउंट में रुपये डाले। इसके बाद खाते में रुपये आने बंद हो गए। वहीं, जब लोग कंपनी के ऑफिस पहुंचे तो वहां ताला लगा मिला। इसके बाद पीड़ितों ने एसएसपी को मामले की शिकायत दी।
एसएसपी ने साहिबाबाद एएसपी अनूप सिंह को जांच के आदेश दिए थे। इसके बाद बुधवार सुबह एफआईआर दर्ज की गई। एसएचओ लिंक रोड रोजंत त्यागी ने बताया कि दिल्ली के शाहदरा निवासी विकास और पुष्पेंद्र ने शिकायत दी थी कि पांच माह पहले वह पेवे कंपनी के संपर्क में आए थे।
उन्होंने साढ़े चार लाख रुपये जमा कर मेंबरशिप ली। कंपनी ने उन्हें चार आईडी दी थीं। आईडी पर क्लिक करने के बाद उनके खाते में रोजाना 1700 रुपये आने थे। उन्होंने अपने दोस्त पुष्पेंद्र को 2 लाख तीस हजार रुपये, मुजफ्फरनगर निवासी सौरभ को 4.60 लाख रुपये में कंपनी से जोड़ा।
इन दोनों ने करीब 43 लोगों से एक लाख 15 हजार रुपये जमा करवाकर आईडी दिलवाई। आरोप है कि तीन माह तक तो सभी के अकाउंट में रुपये आए लेकिन करीब एक माह पहले रुपये आने बंद हो गए। इसके बाद उन्होंने पुलिस से शिकायत की।
एसएचओ ने बताया कि कंपनी के डायरेक्टर वरुण गुप्ता व अमन शर्मा, एमडी मनोज बंसल व दो अन्य अधिकारियों मनोज वर्मा और जतिन के खिलाफ धोखाधड़ी की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की गई है। अगर कुछ और लोग मामले में शिकायत देने आते हैं तो उन्हें भी वादी बनाया जाएगा।
रुपये लौटाने होटल में बुलाया, बाद में नहीं दिए पैसे
पीड़ित लोगों ने बताया कि आरोपी एमडी मनोज वर्मा ने चार अप्रैल को उन्हें रुपये लौटाने के लिए गाजियाबाद के होटल डिलाइट में बुलाया था।
जब वह लोग इकट्ठा होकर वहां पहुंचे तो मनोज ने कहा कि अमन और वरुण उनके रुपये देंगे। दोनों लोनी में हैं। लोग उसे लेकर लोनी गए तो वहां पहुंचकर वह उन्हें धमकाने लगा। आरोप है कि उसने वहां लोगों को जान से मारने तक की धमकी दी।
आरोपी एमडी मनोज को चार अप्रैल को ही पीड़ितों ने पकड़कर मसूरी पुलिस के हवाले किया था। इस दौरान एक भाजपा नेता के कहने पर उन्हें 20-20 लाख के चेक भी दिए गए। मसूरी पुलिस ने कहा कि अगले दिन आरोपी मनोज के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की जाएगी।
आरोप है कि जब अगले दिन लोग वहां पहुंचे तो मनोज को छोड़ दिया गया था। लोगों का कहना है कि अगर मसूरी पुलिस मामले में उन्हें न छोड़ती तो आज आरोपी सलाखों के पीछे होते। सूत्रों की मानें तो कंपनी के दोनों डायरेक्टरों को बचाने में कई आला अधिकारी शामिल हैं, जिन्होंने भाजपा नेता और डायरेक्टरों के साथ मिलीभगत कर उन्हें छुड़वाने में अहम भूमिका निभाई।
एफआईआर में नहीं है भाजपा नेता का नाम
लोगों का आरोप है कि उन्होंने जब एमडी मनोज को पुलिस के हवाले किया तो एक भाजपा नेता ने मामले में दखल देते हुए उन्हें पुलिस से छुड़वाया था। इतना ही नहीं भाजपा नेता पर लोगों को धमकाने का भी आरोप है। इसके बावजूद पुलिस ने भाजपा नेता का नाम एफआईआर में शामिल नहीं किया।
गुस्साए लोग बुधवार को अमित शाह और राजनाथ सिंह से मिलने दिल्ली मुख्यालय पहुंचे हालांकि वहां अमित शाह से मुलाकात नहीं हो सकी। इसके बाद उन्होंने अमित शाह और राजनाथ के नाम एक ज्ञापन सौंपा।
इसमें मामले में संलिप्त भाजपा नेता पर कार्रवाई की मांग की गई। लोगों ने बताया कि अगर भाजपा नेता के खिलाफ कार्रवाई नहीं करते तो वे भाजपा मुख्यालय पर धरना देंगे।