बसों पर छिड़ा घमासान, मजदूर परेशान, कुछ देर में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सकती है कांग्रेस
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रवासी श्रमिकों को उनके घर तक पहुंचाने के लिए 1000 बसों पर यूपी सरकार और कांग्रेस के बीच सियासी घमासान लगातार आज भी जारी है। बसों को यूपी में प्रवेश की अनुमति न दिए जाने के बाद आज कांग्रेस पत्रकार वार्ता कर अपना पक्ष रखेगी। बता दें कि कांग्रेस नेता अजय कुमार लल्लू और प्रियंका के निजी सचिव पर एफआईआर दर्ज की गई है, इन दोनों को आज कोर्ट में पेश किया जाएगा।
गौरतलब है कि सोमवार-मंगलवार की दरमियानी रात दो बजे फिर से चिट्ठियों का दौर शुरू हुआ। यह सिलसिला दिनभर चला, पर बसें यूपी बॉर्डर से आगरा जिले में प्रवेश नहीं कर पाईं। जबकि, अपर मुख्य सचिव गृह ने इन बसों को पहले लखनऊ में और बाद में इस पर कांग्रेस की आपत्ति आने पर इन्हें नोएडा और गाजियाबाद के बस अड्डों पर भेजने के लिए कहा था। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि उनकी बसें यूपी बॉर्डर पर ऊंचा नागला पर खड़ी हैं, लेकिन आगरा प्रशासन हमें अंदर घुसने नहीं दे रहा है।
16 मई को कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने सीएम योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर 1000 बस देने की पेशकश की। ताकि, प्रवासी श्रमिकों को उनके घर तक छोड़ने के लिए इन बसों का इस्तेमाल हो सके। 18 मई को अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश अवस्थी ने प्रिंयका के निजी सचिव को पत्र लिखा कि समस्त बसों के फिटनेस सर्टिफिकेट और चालक के ड्राइविंग लाइसेंस के साथ ही परिचालक का पूरे ब्योरे समेत बसें 10 बजे लखनऊ के जिलाधिकारी को उपलब्ध कराने का कष्ट करें। यहां से एक के बाद एक चिट्ठियों का दौर प्रारंभ हो गया।
18-19 मई की दरमियानी रात 2:00 बजे : प्रियंका के निजी सचिव संदीप सिंह ने अपर मुख्य सचिव गृह को पत्र भेजकर लखनऊ में बसें उपलब्ध कराने पर कड़ा एतराज जताया। उन्होंने कहा कि संकट में फंसे प्रवासी मजदूर उत्तर प्रदेश की विभिन्न सीमाओं खासतौर पर दिल्ली-उत्तर प्रदेश बॉर्डर पर गाजियाबाद व नोएडा जैसी जगहों पर मौजूद हैं। यहां फंसे प्रवासी मजदूरों की संख्या लाखों में हैं।
हजारों मजदूर सड़कों पर पैदल चल रहे हैं और उत्तर प्रदेश के बॉर्डर पर हजारों की भीड़ पंजीकरण केंद्रों पर उमड़ी हुई है। तब 1000 खाली बसों को लखनऊ भेजना न सिर्फ समय और संसाधनों की बर्बादी है, बल्कि हद दर्जे की अमानवीयता है और गरीब विरोधी मानसिकता की उपज है। सरकार की यह मांग पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित है।
ऐसा नहीं लगता कि सरकार श्रमिक भाई-बहनों की मदद करना चाहती है। साथ ही आग्रह किया कि गाजीपुर बॉर्डर, गाजियाबाद और नोएडा बॉर्डर से हमारी बसों को चलने के लिए नोडल अधिकारियों की नियुक्ति करें, जिनसे संपर्क स्थापित कर उत्तर प्रदेश के श्रमिक भाई-बहनों को उनके गंतव्य तक पहुंचने में मदद कर सकें।
19 मई, प्रात: 10: 43 बजे मीडिया को जारी अवनीश अवस्थी का पत्र : अवनीश अवस्थी ने प्रियंका के निजी सचिव को फिर पत्र लिखा कि आपके (निजी सचिव) पत्र के अनुसार आप लखनऊ में बसें देने में असमर्थ हैं। नोएडा व गाजियाबाद बॉर्डर पर ही बस देना चाहते हैं। ऐसी स्थिति में जिलाधिकारी, गाजियाबाद को 500 बसें 12 बजे (19 मई को ही) तक उपलब्ध कराने का कष्ट करें। गाजियाबाद जिला प्रशासन इन बसों को रिसीव करके उनका उपयोग करेगा।
गाजियाबाद के कौशाम्बी बस अड्डा और साहिबाबाद बस अड्डा पर बसें उपलब्ध कराने के लिए कहा गया। इसके अलावा 500 बसें नोएडा में जिलाधिकारी, गौतमबुद्धनगर को एक्सपो मार्ट के नजदीक ग्राउंड पर मुहैया कराने के लिए कहा गया। यह भी कहा गया कि संबंधित जिलाधिकारी बसों का परमिट, फिटनेस, इंश्योरेंस के अभिलेख, वाहन चालक के लाइसेंस और परिचालक के अभिलेख चेक कर तत्काल बसों का उपयोग करेंगे। इस सबंध में उन्हें निर्देश दे दिए गए हैं।
12:15 बजे : प्रियंका के निजी सचिव ने पुन: अवनीश अवस्थी को पत्र लिखा। कहा कि हमारी कुछ बसें राजस्थान से आ रही हैं और कुछ बसें दिल्ली से। इनके लिए दोबारा परमिट दिलवाने की कार्यवाही जारी है। बसों की संख्या अधिक होने के नाते इसमें कुछ घंटे लगेंगे। यह बसें गाजियाबाद और नोएडा बॉर्डर पर शाम पांच बजे पहुंच जाएंगी। आपसे आग्रह है कि 5 बजे तक आप भी यात्रियों की सूची और रूट मैप तैयार रखेंगे, ताकि इनके संचालन में कोई आपत्ति नहीं आए। यह एक एतिहासिक कदम होगा, जिसमें प्रदेश सरकार और कांग्रेस पार्टी मानवीयता के आधार पर सब राजनीतिक परहेजों को दूर करते हुए एक-दूसरे के साथ सकारात्मक व सेवाभाव से जनता की सहायता करने जा रहे हैं।
3:45 बजे : प्रियंका के निजी सचिव ने एक और पत्र अवनीश अवस्थी को लिखा। इसमें कहा गया, हम बसों को लेकर लगभग तीन घंटे से यूपी बॉर्डर पर ऊंचा नागला पर खड़े हैं, लेकिन आगरा प्रशासन हमें अंदर घुसने नहीं दे रहा है। आप तत्काल हमारी समस्त बसों को अनुमति पत्र भेजिए, ताकि हम आगे बढ़ सकें। प्रशासन अनुमति पत्र भेजे, ताकि हमारी बसें आगरा होते हुए गाजियाबाद और नोएडा तक पहुंच जाएं।
100 बसें लेकर नोएडा पहुंचे कांग्रेसियों के ऊपर एफआईआर
प्रदेश कांग्रेस की प्रभारी प्रियंका गांधी के कहने पर स्थानीय कांग्रेसी पदाधिकारियों ने श्रमिकों को घर पहुंचाने के लिए नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद के लिए करीब 100 बसों की व्यवस्था की, लेकिन पुलिस ने जगह-जगह पर बसें रोक दीं।
उत्तर प्रदेश कांग्रेस के सदस्य चौधरी रामकुमार तंवर ने बताया कि शाम को एमिटी विवि के पास बसों को यह कहकर रोक दिया कि यह स्कूल बसें हैं। कई बसों को थाना सेक्टर-39 ले जाकर जब्त कर दिया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि जब स्कूल बंद हैं तो इसमें खामी कहां है। देर रात तक पुलिस ने कांग्रेसियों की नहीं सुनी। इसका पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष पंकज मलिक, प्रदेश महासचिव विरेंद्र सिंह गुड्डू ,जिला अध्यक्ष मनोज चौधरी, नोएडा महानगर अध्यक्ष शहाबुद्दीन, प्रमोद शर्मा पीसीसी, सुभाष मिश्रा और रिजवान चौधरी ने विरोध जताया है।
पुलिस उपायुक्त (जोन प्रथम) संकल्प शर्मा ने बताया कि मंगलवार की देर रात को ओखला बैराज के पास कांग्रेस के पूर्व विधायक पंकज मलिक, उत्तर प्रदेश के महासचिव वीरेंद्र सिंह गुड्डू, दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अनिल चौधरी तथा पार्टी के महानगर अध्यक्ष शहाबुद्दीन अपने 50-60 समर्थकों के साथ कुछ बसों को लेकर खड़े थे।
शर्मा ने कहा कि ये लोग सामाजिक दूरी का पालन नहीं कर रहे थे तथा इनमें काफी लोगों ने मुंह पर मास्क भी नहीं लगा रखा था। उन्होंने बताया कि इन लोगों के हाथ में एक राजनीतिक दल का झंडा था।
शर्मा के अनुसार ये लोग कोविड-19 के प्रोटोकॉल का उल्लंघन कर रहे थे। जनपद में लॉकडाउन व धारा 144 लागू है। डीसीपी ने बताया कि कांग्रेस के नेताओं के खिलाफ उपनिरीक्षक गिर्राज किशोर की तहरीर पर थाना सेक्टर 39 में धारा 188, 269, 270 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
श्रमिकों को ले जाने वाली 5 बसें जब्त
नोएडा सेक्टर-4 और 5 में रहने वाले प्रवासी श्रमिकों को घर पहुंचाने के लिए खड़ी 5 बसों को पुलिस ने जब्त कर लिया है। हालांकि मौके पर कोई चालक परिचालक या सवारी नहीं मिली। पुलिस का कहना है कि सोमवार रात को पुलिस गश्त कर रही थी। तभी सेक्टर-4 में 3 और सेक्टर-5 में 2 बसें खड़ी दिखाई दीं। जांच में पता चला कि इन बसों के माध्यम से प्रवासी श्रमिकों को बिहार में पूर्वांचल ले जाने का झांसा दिया गया था।