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दिल्ली मेट्रो के ट्रैक पर दौड़ेगी निजी ट्रेन, केंद्र सरकार ने पीपीपी मॉडल के तहत बनाया नया फॉर्मूला

Tue, 06 Nov 2018 01:56 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली Updated Tue, 06 Nov 2018 01:56 AM IST
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Private train runs on Delhi Metro track
मेट्रो स्टेशन - फोटो : amarujala

दिल्ली मेट्रो के ट्रैक पर आने वाले वक्त में निजी मेट्रो दौड़ सकती है। केंद्र सरकार मेट्रो को आर्थिक संकट से उबारने के लिए इस योजना पर काम कर रही है। पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के तहत नया फॉर्मूला बनाया गया है। इसके तहत मेट्रो कोच को किराये पर लेने के साथ उसे चलाने का जिम्मा भी निजी कंपनी को दिया जा सकता है। अधिकारियों का मानना है कि इससे बगैर बड़ी रकम खर्च किए मेट्रो को अतिरिक्त कोच मिल जाएंगे। केंद्रीय आवास व शहरी मामलों के मंत्रालय और डीएमआरसी बोर्ड ने हाल ही में इस नीति पर मुहर लगा दी है। नए फॉर्मूले पर जल्द ही टेंडर मंगाया जाएगा।

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मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि वैश्विक स्तर का अनुभव है कि पूरी मेट्रो को पीपीपी मॉडल पर चलाना घाटे का सौदा रहता है। दिल्ली में रिलायंस एयरपोर्ट मेट्रो का अनुभव भी खराब रहा। ऐसे में पीपीपी के अलग-अलग मॉडल पर काम किया जा रहा है। पूरी मेट्रो को निजी हाथों में देने की और संचालन की अलग-अलग गतिविधियों से निजी कंपनियों को जोड़ा जाएगा। मसलन कोच खरीदने से लेकर ट्रैक बिछाने, निर्माण करने, एटीसी मशीन लगाने और टिकट बिक्री से जुड़ी गतिविधियां निजी कंपनियों को दी जाएंगी।
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मंत्रालय के अधिकारी बताते हैं कि फिलहाल दिल्ली मेट्रो को फौरी तौर पर करीब 300 कोच की जरूरत है। नया कोच खरीदने की जगह निजी कंपनियों से किराये पर लिया जाएगा। इसकी एवज में दिल्ली मेट्रो कंपनी को किराया देगी। अगर कंपनी की दिलचस्पी कोच देने के साथ उसे चलाने में भी रही, तो संचालन का ठेका भी उसे दे दिया जाएगा। इसके अलावा टिकट वेंडिंग मशीन, एटीसी मशीन, टिकट बिक्री काउंटर, ट्रैक जैसे काम भी पीपीपी मॉडल पर चलाए जाएंगे। मंत्रालय से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि नए फॉर्मूले को जल्द ही डीएमआरसी में अपनाया जाएगा। इसके कामयाब रहने पर इसे पूरे देश में लागू किया जाएगा।
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आरआरटीएस में नए पेंच से बढ़ी मुश्किल
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि दिल्ली-मेरठ रीजनल रैपिड ट्रांसपोर्ट सिस्टम (आरआरटीएस) प्रोजेक्ट के तहत सराय काले खां में एलिवेटेड ट्रांसपोर्ट तैयार किया जाना था। यूपी सरकार से मंजूरी मिलने के बाद दूसरी तैयारियां भी पूरी कर ली गई थीं, लेकिन आखिरी वक्त में अब दिल्ली सरकार का कहना है कि इसे अंडरग्राउंड बनाया जाए। 


मंत्री का कहना है कि अंडरग्राउंड ट्रांसपोर्ट हब बनाने से करीब 4500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च पड़ेगा। इसके लिए किराये में बढ़ोतरी करनी होगी। इससे आरआरटीएस आर्थिक तौर पर ज्यादा उपयोगी नहीं रहेगा। वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि दिल्ली सरकार के साथ इस पर चर्चा की जा रही है। उम्मीद है जल्द ही कोई बीच का रास्ता निकल आएगा।            

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