खुलासा: एम्स में इलाज के लिए पहुंच रही 'डेड बॉडी'
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दिल्ली-एनसीआर के अलावा देश के अन्य राज्यों में कई ऐसे निजी अस्पताल हैं जो दम तोड़ने के बाद इलाज के लिए मरीज को एम्स ट्रॉमा सेंटर रेफर कर रहे हैं। औसतन हर दिन एक ऐसे मरीज को रेफर किया जा रहा है। नोएडा के एक निजी अस्पताल से दो माह में ऐसे तीन मरीजों को रेफर किया गया है।
इलाज में लापरवाही और निजी अस्पतालों के इस रवैये से परेशान होकर एम्स प्रशासन की ओर से भारत सरकार के स्वास्थ्य महानिदेशक और राज्यों के स्वास्थ्य सचिवों को पत्र लिखा है।
मरीज की मौत होने के बाद भी पैसा बनाने के लिए मरीज को वेंटीलेटर पर रखने अथवा अस्पताल में भर्ती रखने का आरोप पीड़ित परिजनों की ओर से निजी अस्पतालों पर लगाया जाता है। लेकिन निजी अस्पताल परिजनों के आरोपों को खारिज कर देते हैं। निजी अस्पतालों पर लगने वाले इन आरोपों को देश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल (एम्स) ने भी सही माना है।
मरे लोगों को ऑक्सीजन लगाकर कर दिया जाता है रेफर
ट्रॉमा सेंटर के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संजीव भोई का कहना है कि हर दिन एक ऐसे मरीज को एम्स ट्रॉमा सेंटर रेफर किया जाता है जिस मरीज की हालत इतनी खराब होती है कि उसे बचाना मुश्किल होता है अथवा उनकी मौत हो चुकी होती है।
उन्होंने कहा कि मरीज को वेंटीलेटर सपोर्ट अथवा ऑक्सीजन लगाकर ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया जाता है, लेकिन वास्तव में मरीज की मौत हो चुकी होती है।
एम्स के निदेशक और ट्रॉमा सेंटर के प्रमुख डॉ. एम सी मिश्रा ने बताया कि अस्पतालों की इस करतूत की जानकारी भारत सरकार के स्वास्थ्य महानिदेशक और राज्यों के स्वास्थ्य सचिव को पत्र लिखकर वहां की अस्पतालों की कमियों और गलतियों से अवगत कराया जा रहा है।
डॉक्टर मिश्रा ने बताया कि नोएडा के एक निजी अस्पताल से दो माह में तीन मरे हुए मरीजों को इलाज के लिए ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया है। उन्होंने कहा कि चिकित्सकों को यह प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए कि मरीज को किस हालत में रेफर करना चाहिए और किस हालत में नहीं।
पहली कैडेवर रिसर्च लैब शुरू
चिकित्सा क्षेत्र को और आधुनिक बनाने और मेडिकल स्टूडेंट को पढ़ाई के दौरान ही मानव शरीर पर सर्जरी करने का प्रशिक्षण मिल सके इसके लिए एम्स ट्रामा सेंटर में देश का पहला कैडेवर (डेड बॉडी) रिसर्च लैब शुरू किया गया है। लैब में एम्स के एमबीबीएस और पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल स्टूडेंट के अलावा देश-विदेश से फेलोशिप प्रोग्राम के तहत एम्स आने वाले चिकित्सकों को भी प्रशिक्षण का मौका मिलेगा।
ट्रॉमा सेंटर में देश का पहला कैडेवर रिसर्च लैब तैयार हुआ है जिसमें डेड बॉडी पर प्रशिक्षण की व्यवस्था होगी। रिसर्च लैब में जनरल सर्जरी, न्यूरो सर्जरी, ऑर्थोपेडिक्स, गाइनोकोलॉजी, ईएनटी, इमरजेंसी मेडिसिन, एनेस्थीसिया सहित दूसरे विभाग के चिकित्सक और मेडिकल स्टूडेंट प्रशिक्षण कर सकेंगे। लैब में दिल्ली पुलिस की सहयोग से उन शवों को परीक्षण अथवा प्रशिक्षण के लिए लाया जाएगा, जिसकी पहचान नहीं हो सकी हो।
जांच रिपोर्ट भी ऑनलाइन
एम्स में इलाज और जांच कराने के बाद रिपोर्ट के लिए बार-बार एम्स आने की जरूरत नहीं है। आप अपनी जांच रिपोर्ट एम्स की वेबसाइट पर भी देख सकते हैं। जांच रिपोर्ट का प्रिंट भी आप साइट से ले सकते हैं। रिपोर्ट कलेक्ट करने के बाद आप सीधे चिकित्सक के पास जा सकते हैं। ब्लड, यूरीन, स्टूल सहित करीब 90 फीसदी जांच रिपोर्ट साइट पर उपलब्ध होंगी।