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आरएमएल अस्पताल में निजी डॉक्टर की लग रही मुहर, मरीज भी असमंजस में
Tue, 25 Dec 2018 05:23 AM IST
Vikas Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Vikas Kumar
Updated Tue, 25 Dec 2018 05:23 AM IST
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रएमएल अस्पताल में मरीजों के कार्ड पर प्राइवेट डॉक्टर की मुहर
- फोटो : अमर उजाला
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केंद्र सरकार के नई दिल्ली स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल (आरएमएल) में इन दिनों बड़ी ही आश्चर्यचकित कर देने वाली घटना देखने को मिल रही है। राजधानी के एक प्राइवेट अस्पताल के डॉक्टर के नाम की मुहर आरएमएल अस्पताल में मरीजों के कार्ड पर लगाई जा रही है। जबकि डॉक्टर चार माह पहले ही वीआरएस ले चुके हैं। गौर करने वाली बात ये है कि इस बारे में डॉक्टर को भी अब तक जानकारी नहीं है। वहीं, अस्पताल प्रबंधन इसे एनआईसी की खामी बता पल्ला झाड़ रहा है।
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दरअसल, आरएमएल अस्पताल के हड्डी रोग विभागाध्यक्ष डॉ. दीपक चौधरी ने चार माह पहले अगस्त में सरकारी सेवाओं से वीआरएस ले लिया था। उनके अनुसार सेवाएं छोड़ने के दौरान उन्होंने अस्पताल प्रबंधन और स्वास्थ्य मंत्रालय को जानकारी दी है। इसके चंद दिनों बाद उन्होंने दिल्ली के बीएलके सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में बतौर वरिष्ठ डॉक्टर सेवाएं भी शुरू कर दी हैं। लेकिन मरीजों को आरएमएल अस्पताल में अभी भी डॉक्टर चौधरी के नाम पर कार्ड जारी किया जा रहा है। हड्डी रोग विभाग में पहुंचने वाले मरीजों के कार्ड पर डॉ. दीपक चौधरी की मुहर मिल रही है।
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अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. वीके तिवारी का कहना है कि डॉ. चौधरी का वीआरएस अब तक स्वीकार नहीं हुआ है। मंत्रालय से कोई आदेश नहीं आया है, नाम बदलने की जिम्मेदारी एनआईसी की है। ऐसे में बड़ा सवाल है कि बगैर वीआरएस स्वीकार किए डॉ. चौधरी को अस्पताल से सेवा मुक्त किसने कर दिया? बहरहाल, इसका जवाब मंत्रालय के अधिकारियों ने भी नहीं दिया।
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