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दिल्ली में कोई पार्टी नहीं बनाएगी सरकार

Wed, 04 Jun 2014 04:57 AM IST
Updated Wed, 04 Jun 2014 04:57 AM IST
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President's rule continues in Delhi

केन्द्रीय बजट आने तक दिल्ली में विधानसभा निलंबित रखकर राष्ट्रपति शासन बनाए रखने की कवायद चल रही है। विधायक फंड खर्च करने की सिफारिश को स्वीकृति मिलने से इस कवायद को और बल मिल रहा है।

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हालांकि विधायक फंड की राशि से विकास कार्य की शुरुआत होने में अभी दो महीने और लगेंगे। वहीं आम आदमी पार्टी या भाजपा की तरफ से सरकार बनाने का समीकरण भी बैठता नहीं दिख रहा है।
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दिल्ली में सरकार बनने की अटकलों पर विराम लगता दिख रहा है। विधानसभा के पूर्व सचिव एसके शर्मा का कहना है कि 2015 तक रह सकता है राष्ट्रपति शासन विधानसभा जिस हाल में निलंबित हैं, ऐसे फरवरी, 2015 तक बिना किसी अगली स्वीकृति या विस्तार लिए रखी जा सकती है।

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नहीं बैठ रहा है गणित

President's rule continues in Delhi

आम आदमी पार्टी के पास 27 विधायक हैं, जबकि 67 विधायकों की विधानसभा में सरकार गठित करने के लिए 34 विधायक चाहिए। अगर कांग्रेस पूरी तरह से समर्थन दे तब संख्या 35 पहुंचेगी। लेकिन अभी यह समीकरण बनता नहीं दिख रहा है।

कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि प्रदेश अध्यक्ष अरविंदर सिंह, विधायक दल के नेता हारून यूसुफ किसी भी सूरत में दोबारा ‘आप’ की सरकार बनवाने के पक्ष में नहीं हैं। बाकी छह से संख्या पूरी नहीं होगी क्योंकि विस अध्यक्ष टाई होने पर ही वोटिंग करते हैं।

भाजपा व अकाली दल विधायकों की संख्या अब 29 रह गई है। सरकार बनाने के लिए भाजपा को 34 की संख्या पूरी करने केलिए पांच सदस्य चाहिए।

जोड़तोड़ भी नहीं कर पा रहा कमाल

President's rule continues in Delhi

आम आदमी पार्टी से निकाले गए विनोद कुमार बिन्नी, निर्दलीय विधायक रामवीर शौकीन भाजपा के साथ जुड़ते भी हैं तो संख्या 31 पर अटक रही है। ‘आप’ के विधायक अगर ग्रुप बनाकर अलग होते हैं तो इसके लिए कम से कम 18 विधायकों को पार्टी से अलग होना पड़ेगा, जिसकी संभावना नहीं दिख रही है।

कांग्रेस के चार विधायक मुस्लिम हैं, जो भाजपा की तरफ जाने वाले नहीं। बाकी चार में एक प्रदेश अध्यक्ष हैं। ऐसे हालात में दिल्ली में सरकार बनती दिख नहीं रही है।

मौके का फायदा उठाते हुए भाजपा के विधायक अब विधायक निधि से प्रोजेक्ट और विकास योजनाएं तेजी से बनाकर स्वीकृति लेने में जुट गए हैं। वहीं ‘आप’ विधायक फंड का आसानी से इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं। ‘आप’ विधायक मोहल्ला सभा से सुझाव ले रहे हैं, जबकि तमाम ऐसे काम हैं जो उस फंड से नहीं होते हैं।

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