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Delhi NCR News: दिल्ली में पीजी को व्यापक नियमों के दायरे में लाने की तैयारी
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कानून बनाने से पहले संचालकों से लिया फीडबैक
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली में पीजी आवास अब नए नियामक कानून के दायरे में आएंगे। शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने सोमवार को पीजी मालिकों, संचालकों और प्रबंधकों के साथ बैठक कर नए नियमों को लेकर उनकी राय और व्यावहारिक समस्याएं जानीं। मंत्री ने कहा कि किसी भी नए कानून का मसौदा तैयार करने से पहले छात्रों के साथ-साथ पीजी संचालकों से भी बातचीत की जा रही है।
बैठक में पीजी चलाने के तरीके, छात्रों की सुरक्षा, मूलभूत सुविधाओं, किराये और संचालन से जुड़ी समस्याओं पर चर्चा हुई। मंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता दिल्ली में छात्रों को सुरक्षित, भरोसेमंद और उचित दरों पर पीजी आवास उपलब्ध कराना है। हर साल देशभर से छह लाख से अधिक छात्र दिल्ली आते हैं और बड़ी संख्या में छात्र पीजी में रहते हैं।
छात्रों की शिकायतों से शुरू हुई प्रक्रिया
इससे पहले आठ सितंबर को मंत्री ने अलग-अलग विश्वविद्यालय क्षेत्रों में पीजी में रहने वाले छात्रों से संवाद किया। छात्रों ने मनमाने बिजली शुल्क, ज्यादा किराया, सुरक्षा की कमी और मकान मालिकों के सत्यापन न होने जैसी समस्याएं बताई थीं। इन शिकायतों के बाद सरकार ने पीजी व्यवस्था को नियमों के दायरे में लाने की प्रक्रिया तेज की।
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20 सदस्यीय समिति ने सुझाए उपाय
15 सितंबर को मंत्री की अध्यक्षता में छात्र आवास और सुरक्षा से जुड़ी 20 सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति की पहली बैठक हुई। इसमें मानकीकृत किराया अनुबंध, केंद्रीकृत ‘गोवपीजी’ पोर्टल के जरिये नगर निकाय पंजीकरण, भवन और अग्नि सुरक्षा ऑडिट व उचित किराया तय करने जैसे उपायों पर चर्चा हुई थी। अब हितधारकों से मिले सुझावों को अंतिम नियामक ढांचे में शामिल किया जाएगा।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली में पीजी आवास अब नए नियामक कानून के दायरे में आएंगे। शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने सोमवार को पीजी मालिकों, संचालकों और प्रबंधकों के साथ बैठक कर नए नियमों को लेकर उनकी राय और व्यावहारिक समस्याएं जानीं। मंत्री ने कहा कि किसी भी नए कानून का मसौदा तैयार करने से पहले छात्रों के साथ-साथ पीजी संचालकों से भी बातचीत की जा रही है।
बैठक में पीजी चलाने के तरीके, छात्रों की सुरक्षा, मूलभूत सुविधाओं, किराये और संचालन से जुड़ी समस्याओं पर चर्चा हुई। मंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता दिल्ली में छात्रों को सुरक्षित, भरोसेमंद और उचित दरों पर पीजी आवास उपलब्ध कराना है। हर साल देशभर से छह लाख से अधिक छात्र दिल्ली आते हैं और बड़ी संख्या में छात्र पीजी में रहते हैं।
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छात्रों की शिकायतों से शुरू हुई प्रक्रिया
इससे पहले आठ सितंबर को मंत्री ने अलग-अलग विश्वविद्यालय क्षेत्रों में पीजी में रहने वाले छात्रों से संवाद किया। छात्रों ने मनमाने बिजली शुल्क, ज्यादा किराया, सुरक्षा की कमी और मकान मालिकों के सत्यापन न होने जैसी समस्याएं बताई थीं। इन शिकायतों के बाद सरकार ने पीजी व्यवस्था को नियमों के दायरे में लाने की प्रक्रिया तेज की।
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20 सदस्यीय समिति ने सुझाए उपाय
15 सितंबर को मंत्री की अध्यक्षता में छात्र आवास और सुरक्षा से जुड़ी 20 सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति की पहली बैठक हुई। इसमें मानकीकृत किराया अनुबंध, केंद्रीकृत ‘गोवपीजी’ पोर्टल के जरिये नगर निकाय पंजीकरण, भवन और अग्नि सुरक्षा ऑडिट व उचित किराया तय करने जैसे उपायों पर चर्चा हुई थी। अब हितधारकों से मिले सुझावों को अंतिम नियामक ढांचे में शामिल किया जाएगा।