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हर थाली तक शुद्ध आहार पहुंचाने की तैयारी, देश भर में फूड लैब होगी स्थापित

Sat, 06 Jul 2019 05:52 AM IST
दुष्यंत शर्मा परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 06 Jul 2019 05:52 AM IST
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Preparation for supply of pure food to every plate
आयुष्मान भारत - फोटो : अमर उजाला

दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना आयुष्मान भारत लाने के बाद अब सरकार देश के प्रत्येक नागरिक की थाली में शुद्ध आहार पहुंचाने की तैयारी में है। आधुनिक जीवनशैली में संतुलित दिनचर्या न होने के कारण गैर संक्रमणकारी रोगों के बढ़ते भार को देखते हुए सरकार अगले कुछ वर्षों में संतुलित आहार को लेकर निचले स्तर तक राहत दे सकती है। 

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इसके लिए पहली बार सरकार ने देश भर में खाद्य सुरक्षा को लेकर फूड लैब स्थापित करने का फैसला लिया है। इसीलिए सरकार ने पहली बार भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के बजट में रिकॉर्ड 154 फीसदी की बढ़तोरी की है।
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वित्तीय वर्ष 2018-19 में सरकार ने इस पर 141 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान किया था, जबकि इस बार 360 करोड़ रुपये रखा गया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन का कहना है कि एफएसएसएआई के बजट में 154.24 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है। ताकि देश भर में अत्याधुनिक फूड लैब स्थापित की जा सकें। इस बजट के जरिए मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब को विकसित किया जाएगा। 
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आंकड़ों की मानें तो फिलहाल देश में सवा करोड़ की आबादी पर एक लैब मौजूद है। देश में कुल 72 टेस्टिंग लैब काम कर रही हैं। इनमें से 65 लैब एनएबीएल यानि गुणवत्ता के स्तर पर मान्यता प्राप्त हैं। अपने शहर में खाने पीने की सामग्रियों में मिलावट की जांच कराने के लिए सरकार जागरूकता कार्यक्रम भी चला रही है। 

इतना ही नहीं खाद्य सामग्रियों की निजी लैब पर जांच कराने के बाद किसी भी तरह की मिलावट पाई जाती है तो एफएसएसएआई की ओर से उसका पूरा खर्चा वहन किया जाएगा। इसे लेकर मंत्रालय के पास लंबे समय से प्रस्ताव विचाराधीन था, जिसे अब क्रियान्वित किया जा रहा है।  


डॉ. हर्षवर्धन ने बताया कि पिछले कुछ दशक से देश में लगातार कैंसर का दायरा बढ़ता जा रहा है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) और भारतीय कैंसर रजिस्ट्री के अध्ययन की मानें तो देश में ओरल यानि मुंह के कैंसर के मरीज ज्यादा मिल रहे हैं। 

इसीलिए सरकार ने अबकी बार तंबाकू और उसके उत्पादों से लोगों में जागरूकता लाने के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम पर फोकस किया है। बजट में इसे लेकर 65 करोड़ रुपये प्रस्तावित हैं।

 निजी अस्पतालों को जल्द मिलेगा आयुष्मान

आयुष्मान भारत पर 6400 करोड़ रुपये खर्च की योजना में सालाना 5 लाख रुपये का बीमा देने वाली इस योजना के तहत 1300 पैकेज के उपचार की कीमतों में वृद्घि हो सकती है। इसी माह होने वाली बैठक में इस पर अंतिम फैसला भी लिया जाना है।

चूंकि लंबे समय से निजी अस्पतालों की शिकायत है कि आयुष्मान भारत के तहत उन्हें उपचार के लिए मिलने वाली राशि बेहद कम है। इसलिए सरकार अब सरकारी दरों से ज्यादा उपचार का भुगतान कर सकती है। ताकि मैक्स, अपोलो, फोर्टिस, वुकहार्ट, जैसे बड़े अस्पताल भी इसके दायरे में आ सकें। 

देश भर में बनेंगी लैब, 160 करोड़ की योजना
केंद्र ने देश भर में लैब स्थापित कर मच्छर जनित एवं संक्रामक बीमारियों की समय पर जांच के लिए 160 करोड़ रुपये की योजना तैयार की है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के तहत स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग को इसकी जिम्मेदारी दी है। हालांकि आयुष मंत्रालय के बजट में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत राज्यों को मिलने वाली सहायता में बदलाव नहीं किया है। जबकि आयुर्वेद अनुसंधान पर 292 करोड़ रुपये खर्च किए जा सकते हैं। 

स्वास्थ्य बजट एक नजर में

कुल बजट          62,659.12

केंद्रीय ऑफिस-अस्पताल-   5127.93 
केंद्रीय प्रोजेक्ट   -7450
नियामक निकाय  -395.73 
स्वायत्तशासी निकाय  -8304.99
अन्य संस्थाएं     -1829.47
केंद्र प्रायोजित सहायता योजना   -39551

आयुष्मान भारत में शुरू से ही निजी अस्पतालों की मांगों को दरकिनार किया जा रहा था, लेकिन अब बजट बढ़ने से अस्पतालों को उपचार की सही कीमत मिल सकेगी। सरकार ने इसका दिलासा भी दिया है। ऐसे में 6400 करोड़ रुपये के बजट से ये परेशानियां दूर हो सकती हैं।  -डॉ. विवेक कुमार, वरिष्ठ ह्दयरोग विशेषज्ञ, मैक्स अस्पताल

 

स्वास्थ्य को लेकर बजट से काफी उम्मीदें थीं, लेकिन सीधे तौर पर सरकार की ओर से बड़ी राहत देखने को नहीं मिली है। हालांकि पिछले वर्षों की तुलना में ओवरऑल स्वास्थ्य का बजट जरूर बढ़ा है। - डॉ. रजनीश मल्होत्रा, मैक्स अस्पताल

मुझे खुशी है कि सरकार हमारे कार्यों को देखते हुए आयुष्मान भारत को तरजीह दे रही है। जल्द ही हम योजना के विस्तार, अस्पतालों से करार और प्रशिक्षण के लिए नई योजना पर काम करेंगे। हमें उम्मीद है कि सरकार से सहायता मिलते हुए देश के 55 करोड़ लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं दे सकेंगे।  - डॉ. इंदुभूषण, सीईओ, राष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसी

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