अब नेताजी को भी लगेगा कटौती का झटका
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दिल्ली के न्यू अशोक नगर संगम गली में राकेश शर्मा पिछले बीस वर्षों से रहते हैं। उनका कहना है कि गर्मियों में बिजली कटौती की मार के इससे बुरे दिन उन्होंने राजधानी में कभी नहीं देखे... अभी तक इंवर्टर खरीदने की जरूरत कभी महसूस नहीं हुई।
कटौती शुरू होते ही इंवर्टर खरीदे, लेकिन पूरी रात बिजली न आने से अब जनरेटर की जरूरत महसूस होने लगी है। तकरीबन यही हाल एनडीएमसी व दिल्ली कैंट क्षेत्र के लोगों को छोड़कर राजधानी के लगभग सभी इलाकों का है।
बहरहाल, बिजली कटौती को हथियार बनाकर राजनैतिक दल आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुट गए हैं। आरोप-प्रत्यारोप के दौर में मौजूदा विधायकों की जनता के बीच बन आई है।
बिजली पर हुई राजनीति है जिम्मेदार
2013 के विधानसभा चुनाव में बिजली दरें बड़ा मुद्दा थीं। इस बार बिजली कटौती एक बड़ा मुद्दा बनना तय है। दरअसल, दिल्ली में इससे पहले इतनी भारी बिजली कटौती कभी नहीं हुई।
आम आदमी पार्टी ने 49 दिनों की अपनी सरकार में बिजली के बिल के दाम 400 यूनिट तक खपत करने वालों के लिए कम किए गए थे। अब केजरीवाल ने वीआईपी इलाके में पूरी बिजली सप्लाई होने और दिल्ली के अन्य हिस्सों में संकट को मुद्दा बना दिया है।
मौजूदा समय में केंद्र में भाजपा की सरकार है जाहिर है कि ‘आप’ के पास उसे घेरने का मौका भी है। जबकि भाजपा ‘आप’ सरकार के कार्यकाल में इस ओर न सोचने व सरकार से भाग जाने को मुद्दा बनाने की योजना तैयार कर रही है।
विधायकों की हालत खराब
कांग्रेस अपने 15 साल के कार्यकाल में बिजली की निर्बाध आपूर्ति व मौजूदा विधायकों को बिजली कटौती पर घेरने की तैयारी कर चुकी है। मुख्य सचिव के कार्यालय पर धरने पर बैठकर इसके लिए भाजपा व ‘आप’ को दोषी ठहराना भी कांग्रेस की इसी रणनीति का हिस्सा रहा।
बिजली कटौती की मौजूदा स्थिति में विधायकों को अपने क्षेत्र की जनता की खरी-खरी सुननी पड़ रही है। जाहिर है कि इसमें मात्र आठ सीट वाली कांग्रेस के पास भुनाने को काफी कुछ है।
दिल्ली में जहां सरकार पर आपूर्ति का जिम्मा है, वहां 24 घंटे निर्बाध बिजली है। मसलन, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री से लेकर केंद्र के मंत्रियों और सांसदों के सरकारी आवास वाले एनडीएमसी क्षेत्र के अलावा दिल्ली कैंट इलाके में नो कट है। लेकिन राजधानी के जिन इलाकों में तीन निजी बिजली वितरण कंपनियों पर आपूर्ति का जिम्मा है, वहां बुरा हाल है।
क्या हैं असली कारण?
राजधानी के नॉर्थ व आउटर सहित अन्य इलाके में टीपीडीडीएल, पूर्वी दिल्ली में यमुना पावर लिमिटेड और दक्षिणी, मध्य, दक्षिण पूर्व और पश्चिमी दिल्ली में राजधानी पावर लिमिटेड के पास बिजली आपूर्ति का जिम्मा है।
इन सभी क्षेत्रों में चार से आठ घंटे तक बिजली कटौती हो रही है। बिजली कंपनियों का आरोप है कि जब उन्हें दिल्ली ट्रांसको लिमिटेड से पूरी बिजली नहीं मिल रही तो वे सप्लाई आगे कैसे दें।
हकीकत यह है कि आंधी-तूफान आने के दस दिनों बाद भी सरकार ग्रिड तक सप्लाई पहुंचाने के संसाधनों को दुरुस्त नहीं करा सकी। अगले पंद्रह दिनों तक इसकी संभावना कम ही है।