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बिजली कंपनियों ने बढ़ाई केजरीवाल की मुसीबत

Tue, 21 Jan 2014 02:19 PM IST
पवन कुमार/ अमर उजाला, नई दिल्ली
पवन कुमार/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 21 Jan 2014 02:19 PM IST
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power companies make Kejriwal in trouble

दिल्ली सरकार के सख्त रवैये के बाद भले ही डिस्कॉम्स सीधे तौर पर बिजली कीमत बढ़ाने की मांग नहीं कर सकी, लेकिन वितरण करने वाली तीनों कंपनियों ने दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग (डीईआरसी) को सौंपे अपने एआरआर में इस वित्तीय वर्ष में आठ हजार करोड़ रुपये का घाटा बताया है।

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वहीं निजीकरण के बाद डिस्कॉम्स ने अपना कुल घाटा 19000 करोड़ रुपये का दर्शाया है। अब डीईआरसी को इन खातों की जांच कर उनके घाटे पर अंतिम मुहर लगानी है।

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बिजली वितरण करने वाली बीएसईएस की राजधानी और यमुना पावर लिमिटेड तथा टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड (टीपीडीडीएल) ने वित्त वर्ष-2014-15 में बिजली कीमत तय करने के लिए आयोग के समक्ष एन्युअल रेवेन्यु रिक्वायरमेंट (एआरआर) सौंप दी है।
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एआरआर में तीनों कंपनियों ने वर्ष 2013-14 में 8000 करोड़ रुपये का घाटा दिखाया है। इसके पूर्व वित्त वर्ष 2012-13 में भी 11000 करोड़ रुपये का घाटा रहा था। ऐसे में डिस्कॉम्स के घाटे को पाटने के लिए बिजली कीमत बढ़ाने के अलावा दूसरा कोई विकल्प नजर नहीं आता।
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टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड का कहना है कि आयोग के समक्ष सभी दस्तावेज और घाटे की स्थिति को रख दिया गया है।

पुराने घाटे की भरपाई से लेकर वर्तमान में बिजली कीमत क्या होनी चाहिए, इसका फैसला आयोग को करना है। वहीं बीएसईएस की दोनों कंपनियों की ओर से आयोग को कहा गया है कि पुराने घाटे को खत्म करने के लिए कदम उठाया जाए और इसकी भरपाई के लिए कोई समय-सीमा भी निर्धारित हो।

दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग के चेयरमैन पीडी सुधाकर ने बताया कि तीनों कंपनियों ने एआरआर सौंप दी है। एआरआर में बीते वित्त वर्ष में 8000 करोड़ रुपये घाटे की बात कही है।

उनके खातों की जांच कर पता लगाया जाएगा कि वास्तव में उनका घाटा है कितना। उसके अनुसार घाटे की रकम तय होगी। डिस्कॉम्स के एआरआर जांच करने में अभी समय लगेगा, इसके बाद ही वास्तविक घाटे का आकलन हो सकेगा। हालांकि वित्त वर्ष-2012-13 तक आयोग डिस्कॉम्स का घाटा 11000 करोड़ रुपये मान चुकी है।

आसान और कम शब्दों में होगा एआरआर उपलब्ध
तीनों बिजली कंपनियों की एआरआर कई पन्नों की और बेहद तकनीकी है। इसलिए आम बिजली उपभोक्ताओं को एआरआर समझ में नहीं आ सकेगा। अब एआरआर की आसान और संक्षिप्त प्रति तैयार कराई जा रही है। एआरआर की प्रति आयोग की वेबसाइट और डीईआरसी कार्यालय में भी उपलब्ध होगा। एआरआर को पढ़ने के बाद कोई भी बिजली उपभोक्ता आयोग की ओर से बुलाई जाने वाली जन-सुनवाई में बिजली कीमत पर अपनी राय रख सकता है।

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