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Delhi NCR News: रामायण पाठ की आस्था पर बदहाल रास्तों का ग्रहण, कीचड़ में कलश लेकर चलने को मजबूर हुईं महिलाएं
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संवाद न्यूज एजेंसी
नूंह।
जिले के गांव आलदोका स्थित शिव मंदिर (छैंपी वाला) में बुधवार को श्री अखंड रामायण पाठ का शुभारंभ पूरे धार्मिक उत्साह और श्रद्धा से हुआ। सुबह निकली कलश यात्रा में महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों ने बड़ी संख्या में भाग लिया तथा भगवान श्रीराम के जयघोष से गांव का माहौल भक्तिमय हो गया। लेकिन इस धार्मिक आयोजन के दौरान गांव के बदहाल रास्तों ने प्रशासनिक दावों की हकीकत भी सामने ला दी। कलश यात्रा जैसे ही गांव की गलियों से गुजरी, महिलाओं को कीचड़ और जलभराव से भरे रास्तों से गुजरना पड़ा। कई स्थानों पर फिसलन के कारण श्रद्धालुओं को संभलकर चलना पड़ा और कलश सिर पर रखे महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ी। ग्रामीणों ने कहा कि मंदिर में हर वर्ष बड़े धार्मिक आयोजन होते हैं, इसके बावजूद गांव की सड़कों और गलियों की मरम्मत नहीं कराई गई। यदि आयोजन से पहले रास्तों की सफाई और मरम्मत कर दी जाती तो श्रद्धालुओं को इस परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता। लोगों ने सवाल उठाया कि जब धार्मिक आयोजनों में हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने की जानकारी पहले से थी, तो संबंधित विभागों ने व्यवस्था सुधारने की पहल क्यों नहीं की।
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नूंह।
जिले के गांव आलदोका स्थित शिव मंदिर (छैंपी वाला) में बुधवार को श्री अखंड रामायण पाठ का शुभारंभ पूरे धार्मिक उत्साह और श्रद्धा से हुआ। सुबह निकली कलश यात्रा में महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों ने बड़ी संख्या में भाग लिया तथा भगवान श्रीराम के जयघोष से गांव का माहौल भक्तिमय हो गया। लेकिन इस धार्मिक आयोजन के दौरान गांव के बदहाल रास्तों ने प्रशासनिक दावों की हकीकत भी सामने ला दी। कलश यात्रा जैसे ही गांव की गलियों से गुजरी, महिलाओं को कीचड़ और जलभराव से भरे रास्तों से गुजरना पड़ा। कई स्थानों पर फिसलन के कारण श्रद्धालुओं को संभलकर चलना पड़ा और कलश सिर पर रखे महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ी। ग्रामीणों ने कहा कि मंदिर में हर वर्ष बड़े धार्मिक आयोजन होते हैं, इसके बावजूद गांव की सड़कों और गलियों की मरम्मत नहीं कराई गई। यदि आयोजन से पहले रास्तों की सफाई और मरम्मत कर दी जाती तो श्रद्धालुओं को इस परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता। लोगों ने सवाल उठाया कि जब धार्मिक आयोजनों में हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने की जानकारी पहले से थी, तो संबंधित विभागों ने व्यवस्था सुधारने की पहल क्यों नहीं की।