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अभी भी कच्चे व उबड़-खाबड़ रास्तों से गुजर रहे ग्रामीण
राजुद्दीन जंग/अमर उजाला, गुड़गांव
Updated Fri, 15 Apr 2016 09:00 AM IST
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भादस-शिकरावा मार्ग पर बसे गांव वाजीदपुर को प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना के तहत नगीना उपतहसीलदार ने गोद लिया हुआ है। अधिकारी के गोद लेने से गांव में जो बुनियादी सहुलियतें आनी चाहिए, वे अभी जमीन पर तो दिखाई नहीं दे रही। कुछ कामों में सुधार जरूर देखने को मिला है।
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स्कूल का दर्जा बढ़ाकर 12वीं तक किया गया है। आंगनवाड़ी केन्द्रों में कार्यकर्ताओं की हाजरी बढ़ी है। किंतु मध्याह्न में नौनिहालों, गर्भवती, किशोरियों और दूध पिलाने वाली माताओं को वक्त पर भोजन नहीं मिलता। गांव में प्रवेश करते ही उबड़-खाबड़ फिरनी सौंदर्यकरण में बाधा बनी है।
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तो वहीं मुय आम रास्ते के कच्चे पक्के पर गंदा पानी भरा रहता है। वाजीदपुर में गंदे पानी की निकासी के लिए खास इंतजाम नहीं हैं। उप स्वास्थ्य केन्द्र महीने में एक दो दिन ही खुलता है। बिजली के पुराने नंगे तारों को बदलने के लिए ग्रामवासी कई बार प्रस्ताव भेज चुके हैं।
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रैनीवेल परियोजना का एक टैंक गांव में बना है जिससे पूरे घरों तक पानी की सप्लाई नहीं हो पाती। बाजीदपुर गांव की कुल आबादी 3443 है और 437 घर हैं। आधा दर्जन घर अनुसूचित जाति के भी हैं। बुजुर्ग सुबेदार का कहना है कि पौध रोपण, गंदे पानी निकासी और स्कूल में अध्यापकों की कमी है।
हाजी जोरमल बताते हैं कि सबसे ज्यादा परेशानी पेयजल की है। रैनीवेल का वाटर टैंक तो बना है। उसमें से पूरे गांव को सप्लाई नहीं हो पाती। तहसीलदार ने बैठक में भरोसा दिलाया है।
चौकीदार नब्बाखां ने बताया कि कई मोहल्लों में पक्के रास्ते नहीं हैं।
स्कीमें तो बहुत हैं उनका लाभ लेने का तरीका हमें नहीं पता। पिछली बैठक में हमें कुछ जानकारी अधिकारी ने दी थी। बिजली के तार बंशीलाल सरकार के लगे हैं वे बिल्कुल जर्जर है और बार बार टूटते रहते हैं।
सरपंच राजुद्दीन ने बातचीत में बताया कि साढे़ तीन हजार की जनसंया में केवल 300 घरों में शौचालय हैं। खुले में शौच की प्रथा को बंद करने के लिए लोगों से अपील की जा रही है। स्कूलों और आंगनवड़ी केन्द्रों में मिड-डे-मील का भोजन बने इसके लिए कर्मचारियों की बैठक ली गई है। उन्होंने बताया कि स्कूल में अध्यापकों की भारी कमी है। पेयजल, बिजली और कच्ची गलियों के लिए भी ग्राम पंचायत प्रयासरत है।
उप तहसीलदार ने बताया कि आदर्श ग्राम योजना के अधीन गांव बाजीदपुर को मैंने गोद लिया है। स्कूल और आंगनवाड़ी केन्द्रों के कायाकल्प के प्रयास जारी हैं। बिजली पानी की समस्या का कुछ हद तक समाधान हुआ है।