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पॉलीथीन बैग: सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की उड़ी धज्जियां

Thu, 17 Apr 2014 04:36 PM IST
Updated Thu, 17 Apr 2014 04:36 PM IST
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Polythene bag: no one implement supreme court orders

गुड़गांव में पॉलीथीन बैग पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा रखी है। लेकिन इसको लागू करने को लेकर प्रशासन का रवैया बेहद लापरवाही वाला है। सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेश के बावजूद शहर को पॉली बैग फ्री करने को लेकर कोई गंभीर पहल नहीं की जा रही है।

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शुरुआत में प्रशासन की ओर से इसको लेकर तरह-तरह की घोषणाएं की गईं, पर कुछ दिनों के बाद ही सब कुछ शांत हो गया। नजीता यह है कि आम दिनों की तरह ही आज भी दुकानदार और ग्रहक पॉलीथीन बैग का धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रहे हैं।
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मुहल्ले की दुकानों से लेकर बाजार और मॉल में पॉली बैग के इस्तेमाल पर कोई रोक नहीं। आम दिनों की तरह ही लोगों को पोली बैग सामान लाते-ले जाते देखा जा सकता है। प्रशासन के शुरुआती अभियान के दौरान लोग और दुकानदार पॉलीथीन बैग के इस्तेमाल से डरते थे।

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पहले चालान भी कटते थे, अब हो गया बंद

Polythene bag: no one implement supreme court orders

दुकानदारों ने एक तरह से इसका प्रयोग बंद ही कर दिया था। इसके चलते जूट और गत्ते के बैग का चलन बढ़ गया था। लोग खरीदारी के लिए घरों से थैला लेकर बाजार आया करते थे। लेकिन यह चलन बंद हो गया है।

सदर बाजार एवं सब्जी मंडी में जितने भी दुकानदार हैं पॉलीथीन बैग के मामले में नियमों का खुला उल्लंघन कर रहे हैं। कहने को अनुमति प्राप्त माइक्रो ग्राम वाले थैली के इस्तेमाल की बात करते हैं जबकि हो इसके विपरीत रहा है।

पॉलीथीन बैग के इस्तेमाल पर नजर रखने की जिम्मेवारी नगर निगम के पास है। इनके अधिकरी चुनाव की आड़ लेते हुए कहते हैं कि इसके चलते पॉली बैग के खिलाफ अभियान में नरमी आई है। शुरुआत के पहले महीने में लगभग रोजाना 10 से 15 चालान काटे जाते थे। उधर, दुकानदारों का कहना है कि ग्राहकों के कपड़े का थैला नहीं लाने के चलते उन्हें पॉली बैग रखना पड़ता है।

दुकानदार बताते हैं अपनी मजबूरी

Polythene bag: no one implement supreme court orders

निगम के हेल्थ अधिकारी सुमित धनखड़ का कहना है कि चुनाव की प्रक्रिया समाप्त होते ही सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ अभियान चलाया जाएगा। शुरुआती दौर में साढ़े तीन लाख रुपये का जुर्माना कि या गया था।

नए एक्ट में निगम को अधिक पॉवर मिलने के चलते अभियान को चलाने में और बल मिलेगा। जबकि दुकानदारों का कहना है कि ग्राहकों के कपड़े का थैला नहीं लाने के चलते उन्हें पॉली बैग रखना पड़ता है।

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