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प्रदूषण दिल्ली नहीं, पूरे उत्तर भारत का मुद्दा, केजरीवाल ने पर्यावरण मंत्री को लिखा पत्र

Sun, 03 Nov 2019 12:02 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Sun, 03 Nov 2019 12:02 AM IST
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Pollution is not only for Delhi it is issue of entire North India said arvind kejriwal
अरविंद केजरीवाल - फोटो : ANI

लगातार बिगड़ती दिल्ली की आबोहवा के बीच मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शनिवार को केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावडेकर को पत्र लिखकर गुजारिश की है कि वायु प्रदूषण से निपटने के लिए बड़े स्तर पर कार्ययोजना बनानी जरूरी है। इसके लिए पराली जलाने के मामलों को रोकने के लिए ठोस रणनीति तैयार करनी होगी। उनका कहना है कि प्रदूषण केवल दिल्ली नहीं, बल्कि पूरे उत्तर भारत का मसला है।

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केंद्र सरकार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे का जिक्र करते हुए अरविंद केजरीवाल ने कहा कि केंद्र ने माना है कि पराली जलने से अक्तूबर-नवंबर में दिल्ली समेत एनसीआर की हवा खराब हुई है। इसके मुताबिक, केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2018-19 में पंजाब के किसानों के लिए 33,075, हरियाणा के लिए 11,941 और यूपी के किसानों के लिए 18,706 मशीनें दी हैं। 
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मौजूदा वित्त वर्ष में इन तीनों राज्यों के लिए 24,214, 14,677 और 7,418 मशीनों को मंजूरी दी गई है। प्रयास यह है कि मशीन मिलने पर किसानों को पराली को जलाना नहीं पड़ेगा। केजरीवाल ने कहा कि हलफनामे से पैदा होने वाले सवालों पर केंद्र को तत्काल प्रभाव से कदम उठाना चाहिए। इसके लिए सभी राज्यों को ठोस रणनीति तैयार करनी है। एक साथ बैठकर पराली जलाने के मामलों को रोकने के लिए व्यावहारिक और समयबद्ध योजना बनाई जाए। 
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दिल्ली की खराब आबोहवा न सिर्फ लोगों की सेहत के लिए नुकसानदेह है, बल्कि इससे विदेशों में भारत की छवि भी खराब होती है। मास्क पहनकर क्रिकेट खेलने वाले अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटरों की नजरों में भारत की अच्छी छवि नहीं बनेगी।

केजरीवाल ने कहा कि वह प्रदूषण के उच्च स्तर को लेकर काफी फिक्रमंद हैं। प्रदूषण हमारे बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है। बड़ी संख्या में लोग श्वसन संबंधी समस्याओं से ग्रस्त हो रहे हैं। दिल्ली के लोगों ने वायु प्रदूषण से लड़ने के लिए असाधारण साहस और इच्छाशक्ति दिखाई है। लेकिन हमारे सभी प्रयास व्यर्थ हो रहे हैं। पड़ोसी राज्यों में बड़े पैमाने पर पराली जलने के कारण दिल्लीवालों की सारी मेहनत बेकार हो गई है।

केजरीवाल के मुताबिक, हलफनामे से उठे सवाल
. पराली जलाने पर पूर्ण रोकथाम के लिए इन तीन राज्यों में से प्रत्येक को आवश्यक मशीनों की कुल संख्या क्या है?
. केंद्र इन मशीनों को वार्षिक किस्तों में क्यों दे रहा है? इन राज्यों को केंद्र कितने वर्षों में अपेक्षित मशीनें प्रदान कर देगा? दिल्ली के लोगों का पराली के
धुएं से मुक्ति कब तक मिल पाएगी?
. क्या उन क्षेत्रों में मशीनों के प्रभाव का आकलन किया गया है, जहां किसान इनका उपयोग कर रहे हों? क्या उन्होंने पराली जलाना बंद कर दिया है?

मनीष सिसोदिया ने केंद्र सरकार को घेरा

Pollution is not only for Delhi it is issue of entire North India said arvind kejriwal
मनीष सिसोदिया - फोटो : अमर उजाला

उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने प्रदूषण के मसले पर केंद्र सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि आज जब पूरा उत्तर भारत काले धुएं की मार झेल रहा है, केवल दिल्ली प्रदूषण से निपटने के लिए सभी संभव प्रयास कर रहा है। 

उन्होंने सवाल किया कि बढ़ते प्रदूषण से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने अब तक क्या कदम उठाए? सुप्रीम कोर्ट में केंद्र कह रहा है कि बीते दो साल में पंजाब और हरियाणा के किसानों को मात्र 63,000 मशीनें बाटी गई हैं, जबकि हरियाणा और पंजाब में किसानों की संख्या लगभग 26 लाख है।

मनीष सिसोदिया ने कहा कि इस रफ्तार से केंद्र सरकार किसानों को मशीनें देने में 50 से 60 साल लगा देगी। तब तक हरियाणा और पंजाब के किसान क्या करें? तब तक क्या पूरा उत्तर भारत काले धुएं में जीने को मजबूर रहे? केंद्र सरकार बताए कि दिल्ली की जनता तब तक क्या पराली का यह काला धुआं पीती रहे? सिसोदिया ने आरोप लगाया कि देश की सबसे बड़ी समस्या प्रदूषण को केंद्र सरकार ने मजाक बना दिया है।

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की तरफ से पराली जलाने के मामलों के बढ़ने की सूचना देने के बाद भी केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने प्रदूषण के मुद्दे पर एक बार भी उत्तर भारत के राज्यों की सामूहिक बैठक नहीं बुलाई। 12 सितंबर को एक बैठक फोन के माध्यम से ली गई, जबकि 17 और 19 अक्टूबर की बैठक के लिए मेल से जानकारी दे दी गई। साफ है कि पर्यावरण मंत्रालय इस बारे में लापरवाही बरत रहा है।उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने प्रदूषण के मसले पर केंद्र सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि आज जब पूरा उत्तर भारत काले धुएं की मार झेल रहा है, केवल दिल्ली प्रदूषण से निपटने के लिए सभी संभव प्रयास कर रहा है। 

उन्होंने सवाल किया कि बढ़ते प्रदूषण से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने अब तक क्या कदम उठाए? सुप्रीम कोर्ट में केंद्र कह रहा है कि बीते दो साल में पंजाब और हरियाणा के किसानों को मात्र 63,000 मशीनें बाटी गई हैं, जबकि हरियाणा और पंजाब में किसानों की संख्या लगभग 26 लाख है।

मनीष सिसोदिया ने कहा कि इस रफ्तार से केंद्र सरकार किसानों को मशीनें देने में 50 से 60 साल लगा देगी। तब तक हरियाणा और पंजाब के किसान क्या करें? तब तक क्या पूरा उत्तर भारत काले धुएं में जीने को मजबूर रहे? केंद्र सरकार बताए कि दिल्ली की जनता तब तक क्या पराली का यह काला धुआं पीती रहे? सिसोदिया ने आरोप लगाया कि देश की सबसे बड़ी समस्या प्रदूषण को केंद्र सरकार ने मजाक बना दिया है।

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की तरफ से पराली जलाने के मामलों के बढ़ने की सूचना देने के बाद भी केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने प्रदूषण के मुद्दे पर एक बार भी उत्तर भारत के राज्यों की सामूहिक बैठक नहीं बुलाई। 12 सितंबर को एक बैठक फोन के माध्यम से ली गई, जबकि 17 और 19 अक्टूबर की बैठक के लिए मेल से जानकारी दे दी गई। साफ है कि पर्यावरण मंत्रालय इस बारे में लापरवाही बरत रहा है।

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