{"_id":"6ae79e1deb6c6127120a1ab7","slug":"pollution-in-delhi-rises-due-to-north-westerly-winds-2026-11-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"सांसों का संकट: उत्तर-पश्चिमी हवाओं से दिल्ली में बढ़ा प्रदूषण, एक्यूआई में 144 अंकों का उछाल; बीएस मानक लागू","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सांसों का संकट: उत्तर-पश्चिमी हवाओं से दिल्ली में बढ़ा प्रदूषण, एक्यूआई में 144 अंकों का उछाल; बीएस मानक लागू
Mon, 02 Nov 2026 01:48 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 02 Nov 2026 01:48 AM IST
सार
महज एक दिन में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) में 144 अंकों का उछाल दर्ज किया गया। शनिवार को दिल्ली का औसत एक्यूआई 117 यानी मध्यम श्रेणी में था, जो रविवार को बढ़कर 261 पर पहुंच गया। शाम छह बजे के बाद यह और बढ़कर 272 दर्ज किया गया।
विज्ञापन
दिल्ली के हालात
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
राजधानी दिल्ली की हवा एक बार फिर जहरीली हो गई है। महज एक दिन में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) में 144 अंकों का उछाल दर्ज किया गया। शनिवार को दिल्ली का औसत एक्यूआई 117 यानी मध्यम श्रेणी में था, जो रविवार को बढ़कर 261 पर पहुंच गया। शाम छह बजे के बाद यह और बढ़कर 272 दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली की हवा खराब श्रेणी में पहुंच गई।
विज्ञापन
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के निगरानी केंद्रों के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली के कुल 59 निगरानी केंद्रों में से 43 पर हवा खराब से बेहद खराब श्रेणी में दर्ज की गई। इनमें 23 इलाके ऐसे हैं, जहां एक्यूआई 300 के पार पहुंच गया। वहीं, 20 इलाकों में हवा खराब श्रेणी में रही। केवल 14 इलाकों में एक्यूआई मध्यम श्रेणी में दर्ज किया गया।
विज्ञापन
जहांगीरपुरी में सबसे ज्यादा प्रदूषण
दिल्ली में सबसे खराब स्थिति जहांगीरपुरी की रही, जहां एक्यूआई 388 दर्ज किया गया। पंजाबी बाग और रोहिणी में यह 365, मुंडका में 353, आरके पुरम में 342 और अलीपुर में 338 रहा। चांदनी चौक, नरेला और विवेक विहार में एक्यूआई 336 दर्ज किया गया। वहीं, बवाना में यह 329 रहा। लगभग सभी प्रदूषित इलाकों में पीएम 2.5 प्रमुख प्रदूषक रहा।
विज्ञापन
पराली के धुएं का असर बढ़ने की आशंका
आईआईटीएम के पूर्वानुमान के मुताबिक, दिल्ली के प्रदूषण में पराली जलाने का योगदान करीब 18 फीसदी रहने का अनुमान था। रविवार को उत्तर-पश्चिम दिशा से चली हवाओं के कारण पंजाब और हरियाणा की ओर से प्रदूषक दिल्ली पहुंच सकते हैं। इसके अलावा वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण गतिविधियां और स्थानीय प्रदूषण भी हवा की गुणवत्ता बिगाड़ रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, हवा की दिशा और रफ्तार प्रदूषकों के फैलाव को प्रभावित करती है। ऐसे में स्थानीय उत्सर्जन के साथ बाहरी स्रोतों से आने वाला प्रदूषण भी दिल्ली की वायु गुणवत्ता पर असर डाल रहा है।
बीएस मानक: कहीं सख्ती, कहीं ढिलाई.... चिल्ला बॉर्डर पर नहीं दिखा प्रतिबंध का असर
दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण के बीच बीएस-6 से कम श्रेणी के वाहनों की एंट्री पर रोक का असर रविवार को पूर्वी दिल्ली से सटे बॉर्डर पर अलग-अलग नजर आया। आनंद विहार, गाजीपुर, अप्सरा और लोनी बॉर्डर पर पुलिस ने दूसरे राज्यों से आने वाले वाहनों की जांच की। वहीं, चिल्ला बॉर्डर पर पुलिस की तैनाती के बावजूद वाहनों को रोकने की कार्रवाई दिखाई नहीं दी।
गाजीपुर बॉर्डर पर दिल्ली की ओर आने वाले रास्तों पर पुलिसकर्मी वाहनों के दस्तावेज और उत्सर्जन मानक की जांच करते रहे। आनंद विहार बॉर्डर पर भी खासतौर पर डीजल वाहनों पर नजर रखी गई। प्रतिबंधित श्रेणी के वाहनों को दिल्ली में प्रवेश देने के बजाय वापस लौटाया गया। अप्सरा और लोनी बॉर्डर पर भी पुलिसकर्मियों ने जांच के दौरान बीएस-6 से कम श्रेणी के वाहनों को रोका।
चिल्ला बॉर्डर पर स्थिति अलग रही। रामलीला मैदान में इंडिया गठबंधन की वोट बचाओ, देश बचाओ महारैली के कारण नोएडा से दिल्ली आने वाले यातायात को नहीं रोका गया। ऐसे में यहां प्रतिबंध का असर स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं दिया।
रविवार को कम रहा वाहनों का दबाव
अवकाश होने के कारण गाजीपुर और आनंद विहार बॉर्डर पर सामान्य दिनों के मुकाबले वाहनों की संख्या कम रही। आम दिनों में गाजियाबाद और नोएडा से नौकरी व कारोबार के सिलसिले में दिल्ली आने वालों के कारण सुबह-शाम इन बॉर्डर पर दबाव बढ़ जाता है। हालांकि, रविवार को भी पुलिस जांच में सतर्क रही।
बीएस-4 समझकर रोकी बाइक, निकली बीएस-6
जांच के दौरान दिल्ली जा रहे सतीश की बाइक को पुलिसकर्मियों ने बीएस-4 समझकर रोक लिया। दस्तावेजों की जांच में बाइक बीएस-6 मानक की निकली, जिसके बाद उन्हें प्रवेश की अनुमति दे दी गई। सतीश ने कहा कि प्रदूषण कम करने के लिए सरकार और प्रशासन के साथ आम लोगों को भी नियमों का पालन करना चाहिए।
रैली में जाने वाले वाहनों की भी जांच
गाजीपुर बॉर्डर पर महारैली में शामिल होने के लिए उत्तर प्रदेश से दिल्ली पहुंच रहे लोगों के वाहनों की भी जांच की गई। पुलिस ने बीएस मानक और दस्तावेजों की पड़ताल के बाद ही नियमानुसार प्रवेश दिया।
पहले दिन नहीं दिखा बीएस-4 वाहनों पर रोक का असर, बेरोक-टोक निकले वाहन
प्रदूषण के चलते एक नवंबर से दिल्ली में बीएस-4 या इससे पुराने वाहनों की एंट्री पर रोक का असर रविवार को पहले दिन दिखाई नहीं दिया। दिल्ली के सभी बॉर्डर क्षेत्र से बेरोक-टोक वाहनों का प्रवेश हुआ।दिल्ली के रामलीला मैदान में इंडिया गठबंधन की रैली और रविवार को रोक का पहला दिन होने के चलते वाहनों की जांच नहीं की गई। हालांकि, सभी सीमाओं पर ट्रैफिक पुलिस के जवान तैनात रहे।
दिल्ली में एनसीआर से कुल 125 सीमा प्रवेश बिंदु हैं। इनमें से प्रवेश के 23 प्रमुख स्थानों से करीब 97 फीसदी यातायात गुजरता है। दिल्ली में प्रतिदिन एनसीआर और आसपास के राज्यों से आने वाले वाहनों की संख्या करीब 11 से 12 लाख है। हालिया रिपोर्टों में सामने आए आंकड़ों के अनुसार इनमें नोएडा-गाजियाबाद से करीब 5 लाख वाहन आते हैं। इनमें से भारी मालवाहक ट्रक करीब 16,900 आते हैं। इनमें से करीब 30 प्रतिशत वाहन बीएस-4 या इससे अधिक पुराने हैं। यदि इन वाहनों पर प्रतिबंध लगा तो करीब चार लाख वाहनों पर लगाम लग सकेगी।
दिल्ली की सीमा में प्रमुख रूप से सिंघु, टिकरी, गाजीपुर, चिल्ला, बदरपुर, कालिंदी कुंज और कपासहेड़ा बॉर्डर की ओर बड़ी संख्या में वाहनों ने प्रवेश किया। हालांकि, रविवार को एक नवंबर का पहला दिन होने और दिल्ली के रामलीला मैदान में विपक्षी दलों की रैली के चलते वाहनों की जांच नहीं की गई। इस दौरान दिल्ली की सभी सीमाओं से वाहन बेरोक-टोक आते रहे। वहीं, राजधानी में भी वाहनों की जांच अभियान नहीं चलाया गया। इसके बावजूद दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक ऑरेंज जोन में रहा। माना जा रहा है सोमवार से कार्यदिवस होने के चलते एनसीआर से बड़ी संख्या में वाहन दिल्ली में प्रवेश करेंगे। इस दौरान जांच अभियान चल सकता है।
सीमाओं पर वाहनों की जांच से जाम लगने की संभावना
प्रदूषण रोकने के लिए सरकार के फैसले से यदि दिल्ली में प्रवेश करने वाले 11 से 12 लाख वाहनों की चेकिंग की जाएगी तो गाजीपुर, चिल्ला, बदरपुर, सिंघु, टिकरी, कालिंदी कुंज और कपासहेड़ा बॉर्डर समेत अन्य स्थानों पर जाम लगने की संभावना है। ऐसे में यातायात पुलिस और परिवहन निगम की टीमें कैसे वाहनों को चिह्नित करेंगी।
एनसीआर में पंजीकृत हैं 48 लाख बीएस-4 या इससे पुराने वाहन
एक रिपोर्ट के अनुसार नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद, गुरुग्राम, सोनीपत समेत अन्य एनसीआर स्थानों पर बीएस-4 या इससे पुराने करीब 48 लाख वाहन पंजीकृत हैं।