मंगोलपुरी अग्निकांड: बिना फायर एनओसी के चल रही थी जूता फैक्टरी, इमारत में नहीं था कोई आपातकालीन निकास द्वार
एमसीडी और पुलिस की कथित लापरवाही के चलते पांच साल तक फैक्टरी बिना किसी रोक-टोक के संचालित होती रही।
विस्तार
मंगोलपुरी औद्योगिक क्षेत्र फेज-1 में शुक्रवार रात जिस जूता फैक्टरी में भीषण आग लगी, उसके पास फायर एनओसी नहीं थी। वर्ष 2021 में फैक्टरी के निर्माण के समय मालिक की ओर से केवल एमसीडी में नक्शा पास कराने के लिए आवेदन किया गया था।
दमकल विभाग के अधिकारियों ने बताया कि एमसीडी की ओर से एनओसी के लिए पत्र प्राप्त हुआ था। इसके बाद दमकल कर्मियों ने फैक्टरी का निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार की थी। रिपोर्ट के आधार पर दमकल विभाग ने फैक्टरी में फायर सेफ्टी के इंतजाम करने के निर्देश दिए थे। हालांकि, इसके बाद फैक्टरी मालिक ने दमकल विभाग में एनओसी के लिए दोबारा कभी आवेदन नहीं किया।
इसके बावजूद एमसीडी और पुलिस की कथित लापरवाही के चलते पांच साल तक फैक्टरी बिना किसी रोक-टोक के संचालित होती रही। ऐसे में सवाल उठता है कि हादसे में चार लोगों की जान जाने का जिम्मेदार आखिर कौन है।
फायर एनओसी नहीं होने की बात सामने आने के बाद पुलिस और एमसीडी की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। बिना फायर एनओसी फैक्टरी का निर्माण कैसे हुआ और पांच साल तक इसका संचालन कैसे होता रहा।
दमकल विभाग के मुताबिक, शुरुआत में केवल 200 गज की फैक्टरी के लिए एनओसी का आवेदन किया गया था। बाद में बगल का प्लॉट किराये पर लेकर फैक्टरी का विस्तार 400 गज तक कर लिया गया। फैक्टरी में आने-जाने के लिए केवल एक ही गेट था। आपातकालीन स्थिति में बाहर निकलने के लिए कोई अलग निकास द्वार नहीं बनाया गया था।
दम घुटने से हुई थी कर्मियों की मौत
पोस्टमार्टम की शुरुआती जांच में चारों कर्मियों की मौत दम घुटने से होने की बात सामने आई है। मौत का सटीक कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही पता चल पाएगा। दमकल अधिकारियों के मुताबिक, इमारत के बेसमेंट में आग लगी थी। समय पर सूचना मिलने के कारण दमकल कर्मियों ने आग की लपटों को बेसमेंट तक ही सीमित कर दिया था। हालांकि, फैक्टरी में धुआं बाहर निकलने की कोई उचित व्यवस्था नहीं थी। इस वजह से ऊपरी मंजिलों पर भारी मात्रा में धुआं भर गया और दम घुटने से चारों कर्मियों की मौत हो गई।
सीढ़ियों पर भी रखा था भारी मात्रा में सामान
त्योहारों का सीजन होने के कारण फैक्टरी में जूतों का बड़े पैमाने पर निर्माण हो रहा था। इस वजह से सीढ़ियों पर भी भारी मात्रा में सामान रखा हुआ था। सामान के कारण सीढ़ियों पर आने-जाने के लिए पर्याप्त जगह नहीं बची थी। हादसे के समय कर्मियों को बाहर निकलने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। दमकल विभाग के कर्मियों को एक कर्मचारी सीढ़ियों पर अचेत अवस्था में मिला था।
फायर एनओसी के लिए जरूरी नियम
- बिल्डिंग में पर्याप्त फायर एक्सटिंग्विशर होने चाहिए।
- फायर हाइड्रेंट और होज रील की व्यवस्था, जहां निर्धारित हो।
- इमरजेंसी एग्जिट और सुरक्षित सीढ़ियां।
- पर्याप्त प्रवेश एवं निकास मार्ग।
- इलेक्ट्रिकल पैनल और वायरिंग में फायर सेफ्टी।
- आवश्यकता के अनुसार फायर अलार्म और ऑटोमैटिक स्प्रिंकलर सिस्टम।
- ज्वलनशील पदार्थों का सुरक्षित भंडारण।
नोट - मंगोलपुरी इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 में यदि औद्योगिक बिल्डिंग का कुल क्षेत्रफल 250 वर्ग मीटर से अधिक है, तो फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट लेना आवश्यक होता है।
दो और शवों का पोस्टमार्टम, परिजन बोले-अब तक नहीं मिली आर्थिक मदद
मंगोलपुरी स्थित जूता फैक्टरी में आग लगने से जान गंवाने वाले अशोक और लालबाबू के शव का रविवार को पोस्टमार्टम कराया गया। शनिवार को प्रेमचंद और हरिहर के शवों का पोस्टमार्टम हो चुका था। अशोक और लालबाबू के परिजनों के दिल्ली नहीं पहुंच पाने के कारण दोनों के शवों का पोस्टमार्टम रविवार तक टल गया था।
अशोक के पिता नागेंद्र रविवार को रिश्तेदार के साथ फ्लाइट से दिल्ली पहुंचे। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद वह बेटे का शव लेकर एंबुलेंस से अपने गांव के लिए रवाना हो गए। अशोक के फूफा उमेश ने बताया कि परिवार पहले से आर्थिक तंगी से गुजर रहा है। हादसे ने परिवार की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। वहीं, लालबाबू के शव का पोस्टमार्टम होने के बाद उनका बेटा मुकेश शव लेकर उत्तर प्रदेश के देवरिया स्थित गांव के लिए रवाना हुआ।
इधर, मृतकों के परिजनों ने अब तक आर्थिक सहायता नहीं मिलने पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि हादसे के बाद से प्रशासन की ओर से परिवारों को कोई आर्थिक मदद नहीं दी गई है। ऐसे में अपनों को खोने के बाद परिवारों के सामने रोजमर्रा की जरूरतों और भविष्य के खर्च को पूरा करने का संकट खड़ा हो गया है।