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प्रदूषण ने बढ़ाई समस्या: धूम्रपान न करने वालों में तेजी से बढ़ रहा लंग्स कैंसर...इनके इस्तेमाल से स्थिति गंभीर

Thu, 01 Aug 2024 12:52 PM IST
शाहरुख खान राकेश शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
राकेश शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शाहरुख खान Updated Thu, 01 Aug 2024 12:52 PM IST
सार

लंग्स कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं। धूम्रपान नहीं करने वालों में लंग्स कैंसर तेजी से बढ़ रहा है। पिछले दस साल में आंकड़ा बढ़कर 40 फीसदी तक पहुंच गया है। प्रदूषण ने समस्या बढ़ा दी है। डीजल और केरोसिन का इस्तेमाल स्थिति को गंभीर बना रही है।

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Pollution has increased problem Lung cancer is increasing rapidly among non-smokers
Pollution - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बढ़ता प्रदूषण धूम्रपान नहीं करने वालों में लंग्स कैंसर के मामलों को बढ़ा रहा है। मौजूदा समय में धूम्रपान न करने वालों में फेफड़ों का कैंसर का आंकड़ा बढ़कर 40 फीसदी तक पहुंच गया है। दस साल पहले तक यह आंकड़ा न के बराबर था।
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विशेषज्ञों के अनुसार बीते सालों में यह देखने में आया है कि मरीज धूम्रपान नहीं करता, फिर भी वह लंग्स कैंसर से पीड़ित हैं। इन मरीजों की मेडिकल हिस्ट्री बताती है कि यह लंबे वक्त से ऐसी जगहों पर हैं, जहां की हवाएं प्रदूषित हैं। बाहर के साथ घरों के अंदर में भी उनको साफ-सुथरी हवा नहीं मिल रही। 
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यह प्रवृत्ति बीते दस सालों में तेजी से बढ़ी है। यह वही दौर है, जब प्रदूषण का स्तर भी तेजी से बढ़ा है। एम्स के पल्मोनरी, क्रिटिकल केयर एंड स्लीप मेडिसिन विभाग के पूर्व प्रमुख प्रोफेसर डॉ. जीसी खिलनानी ने बताया कि बढ़ते प्रदूषण स्तर से इनडोर और आउटडोर में स्थिति खराब हुई है। 
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इसके कारण धूम्रपान न करने वालों में लंग्स कैंसर के मामले 40 फीसदी तक पहुंच गए हैं। यह चिंता का विषय है। बढ़ते प्रदूषण से एक्पोजर बढ़ा है। जो भविष्य में समस्या को बढ़ाएगा। जबकि पहले धूम्रपान करने वालों में लंग्स कैंसर के मामले मिलते थे।

40 के बाद करवाएं जांच
डॉक्टरों का कहना है कि ज्यादा धूम्रपान करने वालों को 40 साल के बाद साल में एक बार लो डोज सिटी स्कैन करवा लेना चाहिए। इसकी मदद से जल्द ही लंग्स कैंसर की पकड़ हो सकती है। वहीं, अन्य मरीजों को 50 साल के बाद यह जांच करवानी चाहिए। कुछ मामलों में यह कम उम्र के मरीजों में मामले दिख जाते हैं, लेकिन अक्सर यह रोग 40 साल के बाद ही होता है।

टीबी का करवाते हैं जांच
डॉक्टरों का कहना है कि मरीजों की जांच के दौरान यह पाया गया है कि काफी मरीज लक्षण न मिलने के कारण टीबी का इलाज करवाते हैं। स्थिति गंभीर होने के बाद कैंसर का पता चलता है। ऐसी स्थिति में इलाज मुश्किल हो जाता है। यदि ऐसे मरीज समय रहते कैंसर की भी जांच करवा ले तो शुरुआती स्तर में पकड़ा आसान हो जाता है। आंकड़ों के अनुसार हर साल देश में 81 हजार से अधिक मामले पकड़ में आते हैं। अधिकतर मामले एडवांस स्टेज में होने के कारण मरीजों को बचाना मुश्किल हो जाता है।

इलाज के लिए मिली नई दवाइयां
डॉक्टरों का कहना है कि लंग्स कैंसर के इलाज में हर साल सुधार हो रहा है। शोध और परीक्षण के बाद कुछ अतिरिक्त एडवांस दवाएं भी मिल गई हैं। इनकी मदद से एडवांस स्टेज के मरीज की जिंदगी भी बढ़ सकती है। लंग्स कैंसर के एडवांस स्टेज के मरीजों की जिंदगी कुछ माह की मानी जाती है, लेकिन नई दवाओं से इसके सुधार हुआ है। वहीं, शुरुआती स्टेज के मरीजों की स्थिति पहले से और बेहतर हुई है।

दिखते हैं यह लक्षण
- ज्यादा खांसी
- खांसी के साथ खून आना
- छाती में दर्द होना
- सांस लेने में दिक्कत होना
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