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ऑटो-कार से चलना मजबूरी, आर्थिक सेहत बिगाड़ सकता है प्रदूषण

Sat, 12 Dec 2015 06:02 PM IST
यशलोक सिंह/अमर उजाला, गुड़गांव
यशलोक सिंह/अमर उजाला, गुड़गांव Updated Sat, 12 Dec 2015 06:02 PM IST
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pollution can create worsen economic health

प्रदूषित शहरों की सूची में दिल्ली-गुड़गांव का नाम वैश्विक स्तर पर बदनाम होने लगा है। प्रदूषण इस कदर बढ़ रहा है कि हरियाणा की आर्थिक राजधानी गुड़गावं गांव में यह पूंजी निवेश के भी आड़े आ सकता है। यही बात यहां के कॉरपोरेट जगत को काफी परेशान करने लगी है। इसका असर उनके कारोबार और कामकाज पर भी पड़ने लगा है। विदेश से आने वाले विजिटरों की संख्या भी तेजी से घटने लगी है। अगर बढ़ते प्रदूषण पर ठोस तरीके से नियंत्रण नहीं किया गया तो आने वाला समय गुड़गांव की आर्थिक सेहत को भी बिगाड़ देगा।

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कॉरपोरेट सेक्टर वालों का कहना है कि अब तो विदेशी क्लाइंट भी गुड़गांव में बढ़ते प्रदूषण को मुद्दा बनाने लगे हैं। यही कारण है कि  बढ़ते प्रदूषण से निपटने की सबसे अधिक छटपटाहट कॉरपोरेट जगत में ही दिखाई दे रही है। कार फ्री डे को लेकर यह सेक्टर काफी संजीदा है। गुड़गांव की सड़कों पर कारों की संख्या कम से कम हो जाए इसके लिए कॉरपोरेट जीतोड़ मुहिम चला रहा है।
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फिलहाल यह मुहिम ठीक वैसी ही है कि ‘अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता’। कॉरपोरेट सेक्टर में अधिकारी विमल कुमार का कहना है कि गुड़गांव आईटी का बड़ा हब है। इसका सबसे अधिक कारोबार विदेशों से होता है। अब वहां भी गुड़गांव के प्रदूषण की चर्चा होने लगी है।
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कॉरपोरेट सेक्टर की प्रदूषण से चिंता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह अपने कर्मचारियों और अधिकारियों पर साइकिल से आने का दबाव बनाने लगे है। कॉरपोरेट सूत्रों की मानें तो आने वाले समय में साइकिल और सार्वजनिक वाहनों से आने वाले कर्मचारियों के लिए विशेष इंसेंटिव देने की भी तैयारी की जा रही है।

यही नहीं कंपनी के बड़े अधिकारी अपनी जान जोखिम में डालकर साइकिल की सवारी भी करने लगे हैं। वहीं शटल बसों को बढ़ावा देने का भी काम कॉरपोरेट करने लगा है। सॉफ्टवेयर कंपनी नगारो इस मंगलवार 17 शटल बसें चलवाने का शटल से करार कर चुकी है। इसी प्रकार स्नैपडील और इंसीटो कंपनी भी इसी प्रकार से बसें चलाने की मुहिम शुरू कर रहे हैं।

बढ़ते प्रदूषण के कारण गुड़गांव अपने कारोबार प्रदाता देशों अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, कनाडा और जर्मनी के निशाने पर आ गया है। यही कारण है कि गुड़गांव में मौजूद इन देशों की कंपनियां यहां अपना विस्तार नहीं कर रही हैं। प्रदेश सरकार की मुहिम है कि हरियाणा खासकर गुड़गांव में विदेशी पूंजी निवेश हो। मगर बढ़ता प्रदूषण इस मार्ग में सबसे बड़ी बाधा है।


बढ़ते प्रदूषण के लिए कहीं न कहीं सरकार जिम्मेदार है। जिस तरह दिल्ली में डीजल वाहनों के रजिस्ट्रेशन पर रोक लगी है ठीक उसी प्रकार का कदम यहां भी उठाने की जरूरत है। लेकिन इससे पहले यहां पर सार्वजनिक परिवहन सुविधाएं बढ़ानी होंगी। यही काम सरकार नहीं कर रही है। कारों और ऑटो से सफर मजबूरी बन गया है। गुड़गांव में जितना भी वायु प्रदूषण है उसका सबसे बड़े जिम्मेदार वाहन हैं। वाहनों के कारण 40 से 45 प्रतिशत प्रदूषण हो रहा है। इसके बाद कंस्ट्रक्शन साइटों का नंबर आता है। गुड़गांव में कंस्ट्रक्शन कार्य के कारण 25 प्रतिशत प्रदूषण होता है। वहीं इसके बाद डीजल जेनरेटर सहित अन्य कारणों का स्थान है।

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