नोटबंदी से भी भयानक खतरे में फंस चुके हैं दिल्लीवाले, 'जानलेवा इमरजेंसी' में है राजधानी
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बीते तीन महीनों से दिल्लीवाले नोटबंदी से भी बड़े खतरे से गुजर रहे हैं और मौसम बदलने के बाद तो ये खतरा और भी बढ़ गया है। गौरतलब है कि राष्ट्रीय राजधानी में ठंड की दस्तक के साथ ही वायु गुणवत्ता की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। बीते तीन महीनों में वायु गुणवत्ता एक दिन भी सामान्य स्तर पर नहीं आ सकी है।
बृहस्पतिवार को राष्ट्रीय राजधानी में पंजाबी बाग, आनंद विहार, सिरी फोर्ट, मंदिर मार्ग, आरके पुरम, आईटीओ के साथ अन्य स्थानों पर वायु गुणवत्ता बदतर स्थिति में पहुंच गई है। वहीं, पर्यावरणविदों ने वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुरूप जल्द से जल्द इमरजेंसी एक्शन प्लान लागू करने की मांग की है।
सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट की कार्यकारी निदेशक व पर्यावरणविद अनुमिता रॉय चौधरी ने कहा कि आने वाले दिनों में ठंड और बढ़ेगी इसके साथ ही वायु गुणवत्ता भी खराब हो सकती है। अभी मौजूदा स्थिति में वायु गुणवत्ता के इमरजेंसी हालात हैं।
वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को जल्द से जल्द इस बारे में अधिसूचना जारी करनी चाहिए। नए साल में यदि वाहनों की चहल - पहल बढ़ती है और मास बर्निंग जैसी गतिविधियों पर रोक नहीं लगती है तो स्थिति बेकाबू हो सकती है। ऐसे में तत्काल कदम उठाए जाने की जरूरत है।
नहीं लिए कड़े फैसले तो होगी स्थिति और भी बदतर
दिल्ली के पर्यावरण मंत्री इमरान हुसैन ने भी बृहस्पतिवार को पर्यावरण विभाग और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण कमेटी (डीपीसीसी) के अधिकारियों के साथ बैठक की।
हालांकि इस समीक्षा बैठक में अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली में मौसम सुधरने और हवा की गति बढ़ने की वजह से वायु गुणवत्ता सुधरी है। जबकि सीपीसीबी के आंकड़ों पर गौर करें तो यह दावा सही नहीं है।
डीपीसीसी ने अपने ग्राफ चार्ट में यह बताया है कि हवा में पर्टिकुलेट मैटर 2.5 और 10 का स्तर धीरे-धीरे नीचे की तरफ आया है। यह अच्छा संकेत है। इसके उलट सीपीसीबी और डीपीसीसी के रीयल टाइम डाटा में आंकड़े कुछ और ही कहानी बयां करते हैं।
सीपीसीबी के मुताबिक बृहस्पतिवार को सुबह से ही कई स्थानों पर वायु गुणवत्ता गहरे लाल यानी आपात स्थिति को दर्शा रही है। वहीं इस अतिगंभीर वायु गुणवत्ता में सबसे प्रमुख प्रदूषण तत्व पर्टिकुलेट मैटर 2.5 मौजूद है। पर्टिकुलेट मैटर हवा में मौजूद खतरनाक बारीक कण है।
क्रिसमस के बाद राष्ट्रीय राजधानी में भले ही नए साल पर पटाखे जलाने या अन्य गतिविधियों पर रोक लगाने की बात की जा रही है। लेकिन इसमें सख्ती नहीं बरती गई और इमरजेंसी एक्शन प्लान नहीं लागू किया गया तो हालात बदतर हो सकते हैं।
29 दिसंबर को रात 8:30 बजे वायु गुणवत्ता सूचकांक की स्थिति
सीपीसीबी के मुताबिक 29 दिसंबर को रात 8:30 बजे वायु गुणवत्ता सूचकांक की स्थिति
स्थान वायु गुणवत्ता
एनएसआईटी द्वारका 267 (खराब)
शादीपुर 358 (बहुत खराब)
मंदिर मार्ग 405 (अति गंभीर )
आईएचबीएस 299 (खराब )
आनंद विहार 467 (अति गंभीर)
आरके पुरम 405 (अति गंभीर)
पंजाबी बाग 438 (अति गंभीर)
आईटीओ 499 (अति गंभीर)
डीटीयू 481 (अति गंभीर)
सिरी फोर्ट 431 (अति गंभीर)
नोट : वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) के मुताबिक 301 से 400 के बीच आंकड़े बहुत खराब (लाल निशान) की स्थिति को दर्शाते हैं। जबकि 401 से 500 के बीच के एक्यूआई आंकड़े वायु गुणवत्ता की स्थिति को अंतिगंभीर यानी गहरे लाल की श्रेणी में रखा जाता है।