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कोटला झील के नाम पर हो रही है राजनीति
मलिक असगर हाशमी/अमर उजाला, गुड़गांव
Updated Wed, 26 Mar 2014 03:59 PM IST
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पानी के नाम पर मेवात को निरंतर छला जा रहा है। अब यह कोशिश कोटला झील के नाम पर शुरू हो गई है। विपक्षी दलों ने अपने एजेंडे में इसे प्रमुखता से शामिल किया है। लेकिन, यह भी वास्तविकता है कि इनमें से अधिकांश ने कोटला झील के मुद्दे को कभी गंभीरता से नहीं लिया।
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झील बन जाए तो न सिर्फ मेवात और इससे लगते राजस्थान के जिलों का जलस्तर सुधर जाए। हजारों एकड़ की सिंचाई की समस्या भी खत्म हो जाएगी। कोटला झील के नाम पर सियासत पिछले चार वर्षों से चल रही है। इस बार चुनावी आहट के साथ यह मुद्दा फिर गर्मा गया है।
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‘आप’ इसे लेकर सक्रिय दिख रही है। जबकि, सत्ता पक्ष इसके नाम पर वाहवाही लूटने के प्रयास में है। बता दें कि 20 फरवरी को नूंह में कांग्रेस की एक रैली हुई। इसमें मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने दक्षिण हरियाणा की कोटला झील सहित पानी की अनेक परियोजना को जल्द पूरा करने का आश्वासन दिया। ‘आप’ के नूरूद्दीन नूर का आरोप है कि इसके नाम पर मेवात के लोगों को ठगा जा रहा है।
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कोटला झील के अलावा प्रदेश के जिन दो और प्राकृतिक जल स्रोत को विकसित करने का ऐलान किया गया, उनपर काम शुरू हो गया है। जबकि, कोटला की योजना कागज से बाहर नहीं निकल पाई है।
इनेलो के जाकिर हुसैन और बसपा के धर्मपाल पहलवान राठी आरोप लगाते हैं कि मेवात में रेल पहुंचाने की तरह कोटला झील के नाम पर भी कांग्रेस सरकार सब्जबाग दिखा रही है। अभी तक मात्र सेक्शन चार के तहत नोटिस जारी किए गए हैं। जबकि, इसके बाद की कार्रवाई पूरी करने में 18 महीने तक लग जाते हैं। इस लिहाज से अगले दो वर्षों तक झील पर कोई काम होना संभव नहीं।
क्या है योजना
सरकार ने 2011 में मेवात के कोटला, कुरुक्षेत्र के बीबीपुर और कैथल के ओटूृका में प्राकृतिक जल स्रोत विकसित करने के लिए तीन झील के निर्माण की योजना बनाई थी। ताकि यहां बरसात का पानी एकत्रित कर सिंचाई की समस्या दूर की जा सके। बारिश के दिनों में कोटला में बाढ़ की शक्ल में अरावली की पहाड़ियों से गिरने वाली जल धारा को रोकने की योजना है।
ये होगा फायदा
नूंह के कोटला गांव के पास 108 एकड़ में 81 करोड़ रुपये की लागत से झील के निर्माण का प्रस्ताव है। कृषि वैज्ञानिक मानते हैं कि इसके निर्माण से इलाके के 1,620 एकड़ में लगने वाली खरीफ और रबी पैदावार में भारी इजाफा होगा। जबकि, झील के पानी से साढ़े पांच हजार एकड़ जमीन सिंचित की जा सकती है।