दिल्ली में शुरू होने वाली है सत्ता की जंग!
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लोकसभा चुनाव में मतदान का अंतिम चरण पूरा होने के साथ ही एग्जिट पोल का दौर शुरू हो गया है, लेकिन अब दिल्ली विधानसभा की जंग के दिन फिर से आने वाले हैं।
लोकसभा चुनाव में देश भर में चुनावी ड्यूटी में लगाए गए दिल्ली के विभिन्न दलों के नेता आज से लौटने शुरू हो जाएंगे।
ऐसे में काफी समय से दिल्ली प्रदेश में राजनीतिक बयानबाजी व दांवपेंच की मंद गति एकदम से तेज हो जाने वाली है, जिसकी रणनीति राजनीतिक दलों ने पहले ही तैयार कर ली है।
AAP को है बहुमत की आस
आम आदमी पार्टी के दिल्ली सरकार की कुर्सी छोड़ने के बाद एलजी के दिल्ली में विधानसभा को निलंबित करने को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी हुई है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार ‘आप’ विधानसभा चुनाव का मुद्दा उठाए जाने के साथ भ्रष्टाचार, बिजली व पानी की कीमतों व जनता के काम रुक जाने को मुद्दा बनाकर आंदोलन शुरू करने की तैयारी किए हुए है।
पार्टी का मानना है कि हरियाणा सहित अन्य राज्यों में इस वर्ष के अंत में होने वाले चुनावों के साथ दिल्ली विधानसभा के चुनाव होंगे। ऐसे में जनता के मुद्दों पर सरकार से हटने के बाद जल्द होने वाले चुनाव उसे स्पष्ट बहुमत दिला सकते हैं।
अभी बीजेपी को है थोड़ी टेंशन
दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि 16 मई को लोकसभा चुनाव के परिणाम आने तक उसे इंतजार करना होगा।
पार्टी सूत्रों के अनुसार अगर भाजपा को इसमें स्पष्ट बहुमत मिलता है तो वह विधानसभा चुनाव में तुरंत जाने को तैयार होगी, क्योंकि मौजूदा समीकरण में उसके पास विधायकों के नंबर कम हैं।
बता दें कि बीजेपी ने दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष डॉ. हर्षवर्धन समेत कुल तीन विधायकों को लोकसभा चुनाव मैदान में उतारा था। अगर वे सांसद चुने जाते हैं तो बीजेपी के विधायकों की संख्या खुद ब खुद कम हो जाएगी।
बदला लेना चाहती है कांग्रेस
मात्र 8 विधायकों वाली कांग्रेस के तरकश में आम आदमी पार्टी व भाजपा पर हमले के कई तीर हैं। वह दिल्ली में बिजली व पानी के मुद्दे पर ‘आप’ को घेरने की रणनीति तैयारी किए हुए है।
उसने चुनाव लड़ चुके अपने उम्मीदवारों, पूर्व विधायकों व नेताओं को क्षेत्र में लोगों की समस्याए निपटाने, खासकर ‘आप’ के कब्जे वाले विधानसभा क्षेत्रों (लक्ष्मी नगर के विधायक बिन्नी को पार्टी से निकाले जाने के बाद 27 सीटों) में ज्यादा सक्रिय होने के आदेश दिए हैं।
दरअसल, कांग्रेस को पिछले चुनाव में सबसे ज्यादा नुकसान ‘आप’ ने ही पहुंचाया था, इसलिए अब वह बदला लेने के मूड में हैं।
बीजेपी को मिल सकता है एक चांस
सुप्रीम कोर्ट में सरकार से बाहर हो चुकी ‘आप’ की याचिका पर सुनवाई के दौरान अभी अदालत विधानसभा चुनाव में सबसे बड़े दल के रूप में उभरी भाजपा से सरकार बनाने पर उसका फैसला पूछ सकती है।
अगर वह सरकार बनाने की इच्छा जाहिर कर देती है तो निलंबित चल रही विधानसभा को बहाल करने की स्थिति में उसे आम आदमी पार्टी के स्पीकर के चलते तीन अन्य विधायकों की जरूरत पड़ेगी।
इसके अलावा उसके तीन विधायकों ने लोकसभा का चुनाव भी लड़ा है, ऐसे में वे सांसद चुने जाते हैं तो विधानसभा से इस्तीफा दे सकते हैं और इससे विधानसभा में उसकी संख्या और कम हो जाएगी।