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विश्लेषणः भाजपा-अकाली गठबंधन टूटने से दिल्ली में दिखेगा सियासी बदलाव
Mon, 28 Sep 2020 06:09 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 28 Sep 2020 06:09 AM IST
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भाजपा-अकाली दल
- फोटो : अमर उजाला
एनडीए के साथ शिरोमणी अकाली दल का गठबंधन टूटने से दिल्ली सियासत में बदलाव दिखेगा। दिल्ली में भाजपा-सिख गठबंधन की राजनीति शुरू से रही है। गठबंधन के तहत विधानसभा व एमसीडी में सीटों का बंटवारा भी किया जाता रहा है लेकिन अब इस गठबंधन के टूटने से सिख मतदाताओं का रूझान किस दल की तरफ होता है यह तो वक्त बताएगा, लेकिन दिल्ली अकाली दल से ही टूट कर जागो पार्टी के उदय होने और भाजपा की तरफ झुकाव होने से एक नये गठबंधन की राह दिख रही है।
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अकाली-भाजपा गठबंधन टूटने का असर दिल्ली में भी देखने को मिल सकता है। पूर्वी दिल्ली और पश्चिमी दिल्ली में सिख मतदाताओं का झुकाव बराबर गठबंधन की तरफ रहता है। सिख दंगा के बाद कांग्रेस से मोह भंग की स्थिति में भाजपा इस वर्ग के वोट को अपना मान कर चलती है और गठबंधन के तहत विधानसभा में 3-4 सीट भी अकालियों को देती रही है। हालांकि बीते चुनाव में गठबंधन के तहत अकाली नेता चुनाव नहीं लड़े थे।
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सियासतदारों का कहना है कि दिल्ली में गठबंधन टूटने से भाजपा पर ज्यादा असर नहीं दिखेंगा। हालांकि सिख मतदाताओं का एक बड़ा वर्ग आम आदमी पार्टी की तरफ जरूर आकर्षित होगा, क्योंकि बड़ी संख्या में आप सिखों को चुनाव में उम्मीदवार भी बनाती रही है। अगामी एमसीडी चुनाव में भी भाजपा-अकाली गठबंधन टूटने का असर देखा जा सकता है। हालांकि राजनीति करवट लेती है और भाजपा जागो पार्टी के साथ गठबंधन करती है तो सिख वोटर आकर्षित हो सकते हैं।
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भाजपा के सिख नेता कभी भी गठबंधन के पक्ष में नहीं रहे
दिल्ली के सिख नेता गठबंधन के पक्ष में नहीं रहते। सीटों के बंटवारें को लेकर तो सिख नेता आलाकमान से नाराजगी जाहिर करते रहे हैं। लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर अकालियों के साथ गठबंधन की मजबूरी को देखते हुए भाजपा का राष्ट्रीय नेतृत्व हर बार विधानसभा चुनाव में 3-4 सीट देता रहा है जबकि उन सीटों पर भी अकाली जीतने में कम ही कामयाब होते हैं। भाजपा के सिख नेताओं का कहना है कि गठबंधन के तहत चुनाव तो लड़ते हैं, लेकिन अकाली कभी भी दूसरी सीट पर भाजपा उम्मीदवार की मदद नहीं करते।
प्रदेश भाजपा प्रवक्ता हरीश खुराना का कहना है कि भाजपा चुनाव में कभी भी अकालियों के भरोसे नहीं रही है।
अकालियों का सिखों में जनाधार बिखर गया है: जागो
जागो पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता परमिंदर पाल सिंह का कहना है कि भष्टाचार में आकंठ डूबी अकाली पार्टी की राजनीति खत्म हो गई है। झूठ की बिसात पर राजनीति करने वाले अकाली नेता अगामी दिल्ली सिख गुरुद्वारा कमेटी के चुनाव में भी बुरी तरह हारेंगे। जहां तक भाजपा से तालमेल की बात है तो आगे की रणनीति के लिए जल्द ही बैठक होगी और निर्णय लिया जाएगा।
बैठक में तय होगी रणनीति: कालका
शरोमणि अकाली दल की दिल्ली इकाई बैठक कर आगे की रणनीति तय करेगी। दिल्ली ईकाई के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका ने बताया कि सोमवार को बैठक होगी। कोर कमेटी की बैठक में विचार विमर्श किया जाएगा। दिल्ली के हालात के बारे में योजनाबद्ध बात की जाएगी और पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए पूरी रणनीति बनाई जायेगी। अगामी चुनाव अपने बल-बूते पर पार्टी लड़ेगी।