गोपनीय दस्तावेज मामले में पुलिस का शिकंजा
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पेट्रोलियम मंत्रालय जासूसी मामले में गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट (ओएसए) लगाने की प्रक्रिया मंगलवार को शुरू हो गई। दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने संबंधित मंत्रालयों को गोपनीय दस्तावेज भेजने के लिए अपने अधीनस्थ पुलिस अफसरों को हरी झंडी दे दी है।
इसके बाद क्राइम ब्रांच के अफसरों ने पेट्रोलियम मंत्रालय को गोपनीय दस्तावेज भेज दिए, बाकी मंत्रालयों को एक-दो दिन में कागजात भेज दिए जाएंगे। दूसरी तरफ दिल्ली पुलिस ने फैसला लिया कि पेट्रोलियम मंत्रालय के कुछ कर्मचारियों को गिरफ्तार किए बिना ही उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जाएगी।
क्राइम ब्रांच के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों से दो हजार से ज्यादा गोपनीय दस्तावेज बरामद किए गए हैं। इनमें से सबसे ज्यादा पेट्रोलियम मंत्रालय के हैं। ओएसए लगाने के लिए ये पता करना जरूरी है कि बरामद दस्तावेज कितने गोपनीय हैं।
शिकंजा कसने की शुरू हुई प्रक्रिया
इसके लिए कागजात को संबंधित मंत्रालयों को भेजना था। मंगलवार को हरी झंडी मिलने के बाद कागजात भेज दिए गए। कागजात छांटकर सेट बनाए जा रहे हैं। इनकी जांच के बाद ही संबंधित मंत्रालय ये बताएंगे कि उनके दस्तावेज कितने गोपनीय थे और वह ओएसए के तहत आते हैं या नहीं। इसके बाद ओएसए लगाने पर विचार किया जाएगा।
पुलिस जांच में ये बात सामने आई है कि पेट्रोलियम मंत्रालय के करीब छह एमटीएस स्तर के कर्मचारी गोपनीय कागजात चुराकर आरोपियों को देते थे। हालांकि इनके पास से पुलिस को कोई सबूत या गोपनीय दस्तावेज नहीं मिले हैं, इस कारण इन कर्मचारियों को गिरफ्तार नहीं किया गया है।
इन कर्मचारियों के खिलाफ बिना गिरफ्तार किए ही चार्जशीट दाखिल की जाएगी। इसके अलावा दिल्ली पुलिस जीएमआर के मैनेजर राजवीर सिंह समेत करीब एक दर्जन लोगों से पूछताछ कर रही है।