फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Police Files Thanedar of Chandni Chowk had written a letter to Kotwal regarding dead body of soldier

Police Files: थानेदार ने पूछा- हुजूर, लाश और तलवार पड़ी है...तलवार को बेचकर अंतिम संस्कार कर दूं? मिला ये जवाब

Fri, 28 Jul 2023 08:15 AM IST
आकाश दुबे पुरुषोत्तम वर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
पुरुषोत्तम वर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: आकाश दुबे Updated Fri, 28 Jul 2023 08:15 AM IST
सार

चांदनी चौक के थानेदार नाजिर अली ने चिट्ठी लिखकर कोतवाल से पूछा था कि इलाके में एक सैनिक की लाश पड़ी हुई है, साथ में उसकी तलवार है। क्या मैं उसकी तलवार बेचकर जो पैसे आएंगे उनसे सैनिक का अंतिम संस्कार कर दूं?

विज्ञापन
Police Files Thanedar of Chandni Chowk had written a letter to Kotwal regarding dead body of soldier
130 दिन तक आजाद रही आजाद दिल्ली की पुलिस - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

वह गदर का दौर था। बात 3 सितंबर, 1857 की है। चांदनी चौक के थानेदार नाजिर अली ने चिट्ठी लिखकर कोतवाल से पूछा था कि इलाके में एक सैनिक की लाश पड़ी हुई है, साथ में उसकी तलवार है। क्या मैं उसकी तलवार बेचकर जो पैसे आएंगे उनसे सैनिक का अंतिम संस्कार कर दूं? सैनिक 1857 के विद्रोह में भाग लेने दिल्ली आया था। उसके परिजनों का पता नहीं लगा है।

विज्ञापन


सकारात्मक जवाब मिलने पर तलवार बेचकर 2.10 रुपये 10 पैसे जुटाए गए और उन पैसों से सैनिक का अंतिम संस्कार किया गया। यह प्रसंग राष्ट्रीय अभिलेखागार में रखी एक चिट्ठी में दर्ज है। उस दौर की करीब 20 हजार चिट्ठियां यहां रखी हैं। इनमें से कुछ का अनुवाद करके दिल्ली पुलिस की ओर से कराया गया है। इन चिट्ठियों को विद्रोह पत्र (म्युटिनी पेपर्स) नाम दिया गया है। अमर उजाला इन चिट्ठियों तक पहुंचा तो उस दौर की पुलिस की कार्य प्रणाली और इतिहास के पन्नों मे दर्ज कई रोचक किस्से सालों का धूल झाड़ कर जीवंत हो उठे।

विज्ञापन

आजाद दिल्ली में 21 थाने थे
आजाद दिल्ली में कुल 21 थाने थे। कोतवाल पुलिस सिस्टम का प्रमुख था। कोतवाल के तहत दो नायब थानेदार एक मुस्लिम व एक हिंदू थे। बड़े थानों में कोतवाल के अलावा नायब थानेदार भी होता था। कोतवाल व थानेदार राजा द्वारा नियुक्त किए जाते थे। कमांडर इन चीफ(सेना कमांडर) हर दिन के कामकाज व कार्यप्रणाली को संभालता था।

130 दिन में हत्या व डकैती की एक भी वारदात नहीं हुई
फिरंगियों के चंगुल से 130 दिन आजाद रही दिल्ली की उस समय 1.5 लाख जनसंख्या थी। उस समय करीब 40 हजार विद्रोही दिल्ली में आ गए थे। इस कारण यहां पर चोरी व दुर्घटनाओं जैसी वारदात सामने आईं। उस समय पुलिस के पास काफी शिकायतें आईं, लेकिन हत्या व डकैती जैसी एक भी गंभीर वारदात सामने नहीं आई।

चिट्ठियों में मिले रोचक किस्से
अनैतिक कार्य में लगी महिला के घर की तलाशी के लिए पूछा आजाद दिल्ली में संवेदनशीलता व महिला की गरिमा का पूरा ध्यान रखा जाता था। चांदनी चौक के थानेदार का संदेह था कि चांदनी इलाके में अनैतिक कार्य करने वाली महिला के घर में चोरी का सामान है। थानेदार ने महिला के घर में तलाशी लेने के लिए कोतवाल को पत्र लिखकर इजाजत मांगी ताकि घर का गेट खोला जा सके।

22 मई- कोतवाल ने पत्र लिखकर सेना प्रमुख जनरल बख्त खान को सूचित किया कि उसने हिंदू व मुस्लिम के बीच संभावित दंगों को रोकने के लिए कदम उठाए हैं। इसके लिए पर्याप्त इंतजाम कर दिए गए हैं। अंग्रेज दंगा करवा सकते हैं। इसी दिन राजा ने थानेदार को पत्र लिखा कि कोतवाली इलाके में लावारिस मिले बच्चे के माता-पिता को ढूंढ़ा जाए।

विज्ञापन

27 मई- मो. खिज्र सुल्तान ने कोतवाल को चिट्ठी लिखकर भैंस की दो खाल भेजने के आदेश दिए। कहा कि खालों से ड्रम बनाए जाएंगे। जब अंग्रेज हमला करेंगे तो इन ड्रम को बजाकर लोगों को सतर्क कर दिया जाएगा।

4 जून- नायब कोतवाल भान सिंह ने राजा को चिट्ठी लिखकर बताया कि कैदियों ने भत्ते के तौर पर मिलने वाले आधा आना पैसे को लेने से मना कर दिया है। कैदियों का कहना है कि एलाउंस कम है। इस पर राजा ने एलाउंस बढ़ाने से इन्कार कर दिया।

11 जुलाई- सेना प्रमुख ने राजा आमिर अली को पत्र लिखकर बताया कि बेगमपुरा के थानेदार ने भारी मात्रा में अंग्रेजों के बॉक्स, राइफल व तलवार पकड़े हैं। ऐसे में थानेदार को उचित इनाम दिया जाए।

विद्रोही नर्तकी को साथ लेकर आए थे
30 जुलाई को नीमच की फोर्स जब अंग्रेजों से लड़ने दिल्ली आई तो वह नर्तकी को भी साथ लेकर आए। फैज बक्श ने कोतवाल को पत्र लिखकर इन महिलाओं को बड़े घर की मांग की थी। कोतवाल ने महिलाओं को घर देने से मना कर दिया था।

दिल्ली पुलिस में 166 वर्षों से चल रहा है डायरी सिस्टम
दिल्ली पुलिस में इन दिनों चल रहा डायरी सिस्टम मुगल काल से ही जारी है। 25 जुलाई, 1857 को कोतवाल सैयद मुबारक शाह ने सभी थानेदार को पत्र लिखकर कहा कि वह सुबह 8 बजे तक डायरी कोतवाल के घर भिजवाए। तभी से ये सिस्टम जारी है। आज भी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के घर सुबह आठ बजे डेली डायरी पहुंचाई जाती है। इस डायरी में पूरे दिन का घटनाओं व एफआईआर की जानकारी दी जाती है।

पिट की बताया थानों में होता था पशुखाना
जिस तरह आज के समय में पुलिस थानों में वाहनों को रखने के लिए पिट बनाई जाती है। उसी तरह मुगल व अंग्रेजों के समय में थाने में पशुओं को रखने के लिए पशुखाना होता था। पशुखाना हर थाने में होता था। उस समय पशु सबसे ज्यादा चोरी होते थे।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed