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बेटे के प्रेम में अंधे दरोगा ने सुपारी देकर कराई लड़की की हत्या
अरीश रिजवी/अमर उजाला, गाजियाबाद
Updated Wed, 19 Feb 2014 09:22 AM IST
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ठीक एक साल पहले दरोगा बच्चू सिंह ने देश की सबसे बड़ी मर्डर मिस्ट्री आरुषि-हेमराज हत्याकांड के खुलासे में अहम गवाही दी थी। और अब इसी बच्चू सिंह ने पुत्र मोह में अंधे होकर एक मर्डर को मिस्ट्री बनाने के लिए सारे पुलिसया पैंतरे खेले।
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सूत्रों की मानें तो पहले महिला को केस वापस लेने के लिए 9 लाख रुपये का लालच दिया। न मानने पर हत्या की प्लानिंग बनाई। दो साथी सिपाहियों की मदद से हिस्ट्रीशीटर को हत्या की सुपारी दी।
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बागपत से फर्जी आईडी पर हत्यारोपी रश्मि को नया सिम और मोबाइल दिलाया। उस नंबर से रश्मि ने सिर्फ मृतका प्रियंका से ही बात की, ताकि पुलिस ट्रेस न कर सके।
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कविनगर थाने में दो दिसंबर 2013 को महिला के अपहरण की नामजद रिपोर्ट लिखाए जाने के बाद जब पुलिस ने मोबाइल को सर्विलांस पर लिया तो कोई भी क्लू नहीं मिल पाया था। प्रियंका के शव को अलीगढ़ नहर में फेंका गया है, ताकि शव बरामद न हो सके और अगर पकड़े भी जाएं तो केस कमजोर हो जाए।
मेरठ के चर्चित कविता हत्याकांड को भी इसी तरह से अंजाम दिया गया था। इस केस से यह भी साफ होता है कि वेस्ट यूपी में पुलिस और बदमाशों की जुगलबंदी रहती है।
हत्यारोपी रश्मि के फोटो से खुला खेल
पुलिस के प्रियंका के हत्यारोपियों तक पहुंचने की कहानी पूरी फिल्मी है। सीओ द्वितीय अतुल यादव ने बताया कि रश्मि का प्रियंका के घर आना-जाना हो गया था।
एक दिन प्रियंका के भाई ने रश्मि की फोटो अपने मोबाइल में खींच ली थी। जिस दिन प्रियंका लापता हुई, रश्मि गोविंदपुरम प्रियंका के घर गई थी। अपहरण की रिपोर्ट लिखाने के बाद पुलिस ने छानबीन की तो पता चला कि प्रियंका के भाई ने रश्मि का फोटो दिखाया।
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पुलिस ने फोटो से रश्मि की तलाश शुरू की। लेकिन फोटो से उसे तलाशने में दो माह लग गए। रश्मि को पुलिस ने अमरपाल के साथ गिरफ्तार किया। दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई तो कत्ल की गुत्थी सुलझ गई। पुलिस ने बताया कि केशवपुरी गोविंदपुरम निवासी प्रियंका मोबाइल शॉप चलाती थी।
वह एक बच्चे की मां थी और पति से अलग रहती थी। प्रियंका की दुकान के पास रहने वाले एसआई बच्चू सिंह के बेटे से दोस्ती हो गई थी। प्रियंका ने पुलिस से जून माह में शिकायत की थी बच्चू सिंह के बेटे ने शादी का झांसा देकर उससे संबंध बनाए।
पुलिस ने बच्चू सिंह के बेटे को गिरफ्तार कर लिया था। वह 12वीं में पढ़ता था। गिरफ्तार होने की वजह से अपना एग्जाम भी नहीं दे पाया था।
पुलिस हिरासत से भाग चुका है अमरपाल
अमरपाल अलीगढ़ के गोंडा थाने का हिस्ट्रीशीटर है। उस पर वहां आठ मुकदमे दर्ज हैं। अमरपाल पर 2005 में सगे ताऊ की हत्या करने का आरोप है। 2009 में वह अलीगढ़ पुलिस की हिरासत से फरार हो गया था।
आरोपी दरोगा को बैठाया कुर्सी पर
कविनगर पुलिस ने हत्या का आरोपी होने के बावजूद एसआई बच्चू सिंह को सम्मान दिया। पुलिस ने तीन आरोपियों को जहां दिन भर हवालात में बंद रखा, वहीं बच्चू सिंह को कार्यालय में कुर्सी पर बैठाकर रखा।
यही नही उसका चेहरा भी मंकी कैप से छुपाने दिया। और तो और उसके बेटे तरुण को भी मीडिया के सामने पेश्ा नहीं किया। उसे गुपचुप जेल भेज दिया।