Noida Authority Fraud Case: पुलिस का दावा- हिरासत में जालसाज अब्दुल खादर, पूरे मामले का मास्टरमाइंड कोई और
जालसाज अब्दुल खादर ने खुद को नोएडा प्राधिकरण का अकाउंट अफसर बताकर 3.90 करोड़ रुपये तीन अलग-अलग अकाउंट में ट्रांसफर करा लिए थे। जहां से रकम गुजरात के 15 अलग-अलग खातों में ट्रांसफर की थी।
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फर्जी अकाउंट अधिकारी बनकर नोएडा प्राधिकरण के खाते से 3.90 करोड़ रुपये निकालने के मामले में प्राधिकरण और बैंक के 20 कर्मचारी पुलिस के रडार पर हैं। वहीं गुरुवार देर रात पुलिस ने बैंक से पैसे निकालने वाले जालसाज अब्दुल खादर को हिरासत में ले लिया है। सभी संदिग्धों से लगातार पूछताछ की जा रही है। इस हाई प्रोफाइल मामले की निगरानी लखनऊ से की जा रही है।
नोएडा प्राधिकरण ने 23 जून को बैंक ऑफ इंडिया के सेक्टर-62 ब्रांच में 200 करोड़ रुपये एफडी के लिए जमा कराए थे। प्राधिकरण ने सभी कागजात बैंक को सौंप दिए थे। लेकिन बैंक की तरफ से एफडी नहीं की गई। इस दौरान जालसाज अब्दुल खादर ने खुद को नोएडा प्राधिकरण का अकाउंट अफसर बताकर 3.90 करोड़ रुपये तीन अलग-अलग अकाउंट में ट्रांसफर करा लिए थे। जहां से रकम गुजरात के 15 अलग-अलग खातों में ट्रांसफर की थी। वह दोबारा 9 करोड़ रुपये ट्रांसफर करा रहा था। तभी मामले का खुलासा हो गया।
अहम है कि मामले में बुधवार आधी रात तक बैंक से लेकर प्राधिकरण व थाने में गहमागहमी चलती रही। नोएडा जोन के एडीसीपी शक्ति मोहन अवस्थी के मुताबिक इस प्रकरण में सभी बिंदुओं की पड़ताल की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि जल्द ही अब्दुल खादर को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। नोएडा पुलिस की चार टीम दिल्ली-एनसीआर से लेकर गुजरात, पुडुचेरी और तमिलनाडु तक में दबिश दे रही है। पुलिस और क्राइम ब्रांच के अधिकारी मामले की जांच कर रहे हैं।
अब्दुल सिर्फ मोहरा, मास्टरमाइंड की तलाश शुरू
पुलिस जांच में पता चला है कि पूरे प्रकरण में अब्दुल सिर्फ मोहरा है। इसके पीछे मास्टरमाइंड कोई और है। सरगना ने जालसाजी के लिए अब्दुल को हायर किया था। पुलिस के मुताबिक सरगना बैंक या प्राधिकरण का अधिकारी भी हो सकता है। अब्दुल की गिरफ्तारी के बाद ही पूरे मामले की जानकारी मिल सकेगी।
महिला अधिकारी की सजगता से बचे 9 करोड़
बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से 3.90 करोड़ के ट्रांसफर करने के बाद नौ करोड़ रुपये भी ट्रांसफर कर दिए गए थे। इस बीच बैंक की एक महिला अधिकारी को शक हो गया। उन्होंने जब चेक किया तो जालसाजी की बात सामने आ गई। जिसका पता चलते ही महिला अधिकारी ने तुरंत ही उन्होंने रकम को होल्ड कर दिया। इससे रकम प्राधिकरण के खाते में रह गई।