इस गैंग का अलग है काम, फर्जी मोहर से करवाता था अरेस्ट बदमाशों की जमानत
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सूरजपुर कोतवाली पुलिस ने बुधवार को फर्जी जमानतगीर गिरोह का खुलासा कर छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे से 14 फर्जी मुहरें, फर्जी बेल बांड, फर्जी शपथ पत्र और कागजात बरामद हुए हैं। एसएसपी डॉ. अजयपाल शर्मा के मुताबिक गिरोह हरेंद्र नागर हत्याकांड में सुंदर भाटी गैंग के सदस्यों की जमानत देने की तैयारी कर रहा था।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान कमल जाटव निवासी अमीनगर सराय जिला बागपत, शेखर शर्मा व लोकेंद्र सिंह निवासी मोदीनगर, दयानंद जाटव निवासी खरखौदा मेरठ, देवेंद्र राजपूत निवासी खुर्जा, राजू निवासी हापुड़ के रूप में हुई है। इनमें से कमल जाटव गिरोह का मास्टरमाइंड है वह एक वकील का मुंशी है।
बुधवार को सूरजपुर कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में एसएसपी डॉ. अजयपाल शर्मा ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से फर्जी जमानतगीरों के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। सूरजपुर पुलिस को सूचना मिली कि फर्जी जमानतगीर गिरोह इकोटेक-3 के एक मुकदमे में 2015 हरेंद्र नागर हत्याकांड में आरोपी छह लोगों की जमानत देने की तैयारी कर रहा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट से दिसंबर 2017 में इन्हें जमानत दे दी गई थी लेकिन बदमाशों को जमानतगीर न मिलने के कारण यह बाहर नहीं आ पा रहे थे।
पुलिस टीम ने मौके से गिरोह के छह आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। सभी के पास से पुलिस ने 14 फर्जी मुहरें, फर्जी बेल बांड, फर्जी शपथ पत्र, फर्जी खतौनी, फर्जी आधार कार्ड, फर्जी पहचान पत्र, स्वयं व अन्य के फोटो, एटीएम कार्ड, फर्जी कोर्ट फीस टिकट, फर्जी एडवोकेट कार्ड, 30 हजार रुपये नगद व दो मोटरसाइकिल बरामद की गई है।
अब तक छह मामलों में एक दर्जन से अधिक दी फर्जी जमानतें
एसएसपी ने बताया कि आरोपी पिछले कई वर्षों से बदमाशों व अन्य आरोपियों की जमानत देते चले आ रहे हैं। अभी तक पूछताछ में छह मामलों में एक दर्जन से अधिक फर्जी जमानत देने के मामलों का पता चला है। अनुमान है कि इस गिरोह से कई अधिक फर्जी जमानत के मामलों का खुलासा हो सकता है।
10 से 50 हजार में देते थे जमानत
एसएसपी ने बताया कि फर्जी जमानतगीर किसी अन्य के प्रमाणपत्र और नाम से किसी अन्य का फोटो लगाकर जमानत दिलवाते थे। ऐसे में आरोपियों के पेश न होने पर जब जमानतगीरों का पता लगाया जाता था तो इस नाम का कोई जमानतगीर नहीं पाया जाता था। बताया जा रहा है कि जमानत कराने वाला गिरोह फर्जी कागजात तैयार कर जमानत देने के लिए 10 से लेकर 50 हजार रुपये तक लेते थे।