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PMO से संजीव को झटका, 2 साल में RTI नहीं मिली

Mon, 21 Dec 2015 03:18 PM IST
Updated Mon, 21 Dec 2015 03:18 PM IST
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PMO did not give information to this officer in two years

भारतीय वन सेवा के अधिकारी संजीव चतुर्वेदी ने हरियाणा वन विभाग में हुए भ्रष्टाचार और उस पर कार्रवाई के संबंध में सूचना के अधिकार कानून के तहत प्रधानमंत्री कार्यालय से जानकारी मांगी थी, लेकिन इस कानून को मुख्य सूचना आयोग कार्यालय से ही झटका लगा है।

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दो वर्ष बीत जाने के बाद भी प्रधानमंत्री कार्यालय से उन्हें जानकारी नहीं दी गई है। इसके बावजूद सूचना आयुक्त ने अपने फैसले में कहा कि लगता नहीं कि प्रधानमंत्री कार्यालय से गलत नीयत से जानकारी नहीं दी जा रही है,लिहाजा पीएमओ के सेंट्रल पब्लिक इंफॉर्मेशन ऑफिसर (सीपीआईओ) और डिम्ड सीपीआईओ के खिलाफ जारी कारण बताओ नोटिस और 25-25 हजार रुपये के जुर्माने के फैसले को निवर्तमान सूचना आयुक्त ने अपने सेवानिवृत्ति से एक दिन पहले रद्द कर दिया।
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कारण बताओ नोटिस और जुर्माने का फैसला तत्कालीन सूचना आयुक्त का था। संजीव चतुर्वेदी ने अक्तूबर 2013 में प्रधानमंत्री कार्यालय में सूचना के अधिकार कानून के तहत जानकारी मांगी थी कि हरियाणा के वन विभाग में हुए भ्रष्टाचार पर डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग (डीओपीटी) की टिप्पणी के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय ने क्या कार्रवाई की है।
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टिप्पणी की जानकारी शामिल आरोपियों को ही दे दी गई

PMO did not give information to this officer in two years

साथ ही यह भी पूछा था कि कैसे इस मामले में डीओपीटी की टिप्पणी की जानकारी मामले में शामिल आरोपियों को ही दे दी गई। इस संबंध में ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल और कुछ सांसदों ने भी प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र लिखकर जानकारी मांगी थी।

सूचना के अधिकार कानून के तहत जब उन्हें जानकारी नहीं मिली तब नवंबर 2013 में संजीव ने पहली अपील की। इसके बाद 25 नवंबर 2013 को 15 दिनों में आयोग ने सूचना देने का आदेश दे दिया।

सूचना नहीं मिलने पर संजीव ने 20 दिसंबर 2013 को सूचना आयोग में अर्जी लगाई। इसके बाद 20 मई 2014 को केंद्रीय सूचना आयुक्त ने आदेश दिया की सात दिनों के अंदर पीएमओ सूचना के अधिकार के तहत जानकारी दे।

और तो और जारी कारण बताओ नोटिस भी रद्द कर दिया गया

PMO did not give information to this officer in two years

यही नहीं सूचना देने में देरी की वजह से सूचना आयुक्त ने पीएमओ के सीपीआईओ और डिम्ड सीपीआईओ को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया और 25-25 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया।


इस फैसले के खिलाफ पीएमओ की ओर से पुनर्विचार याचिका दायर की गई, जिसे 30 जुलाई 2014 को सीआईसी ने खारिज कर दिया और पीएमओ को कार्रवाई रिपोर्ट देने का आदेश दिया।

25 अगस्त 2014 को दोबारा से पुनर्विचार याचिका दायर कर दी गई। इसके बाद निवर्तमान सूचना आयुक्त ने 30 नवंबर 2015 को आदेश दे दिया कि सूचना देने में देरी की वजह कोई बदनीयती नहीं है और सीपीआईओ और डिम्ड सीपीआईओ के खिलाफ जारी कारण बताओ नोटिस को रद्द कर दिया, जबकि सुहास चकमा बनाम भारत सरकार के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट का आदेश है कि सूचना आयोग के फैसले को रिव्यू नहीं किया जा सकता। इसके खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील की जा सकती है।

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