अब पीएम मोदी करेंगे संजीव की प्रतिनियुक्ति पर अंतिम फैसला
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उत्तराखंड कैडर के भारतीय वन सेना के 2002 बैच के अधिकारी संजीव चतुर्वेदी को दिल्ली सरकार में प्रतिनियुक्ति पर भेजने पर अंतिम निर्णय अब प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली अपॉइंटमेंट कमेटी ऑफ कैबिनेट (एसीसी) को लेना है।
संजीव को दिल्ली सरकार में प्रतिनियुक्ति पर भेजने के संबंध में उत्तराखंड शासन की ओर से पहले एनओसी जारी की गई थी, लेकिन बाद में वापस ले ली गई। अब एक बार फिर एनओसी जारी की गई है।
अधिकारी के कूलिंग ऑफ (उपशमन अवधि) पर फैसला लेने का निर्णय केंद्र सरकार पर छोड़ दिया गया है। बता दें कि संजीव को केजरीवाल ने ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (ओएसडी) के लिए मांगा है।
उत्तराखंड शासन के संयुक्त सचिव आरके तोमर की ओर से 3 मार्च 2016 को आदेश जारी कर संजीव चतुर्वेदी को दिल्ली सरकार में प्रतिनियुक्ति पर भेजने की अनुमति दे दी गई।
आदेश की प्रति पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सचिव, उत्तराखंड के प्रमुख वन संरक्षक और अधिकारी संजीव चतुर्वेदी को भेजी गई है।
आदेश में एसएमएस और व्हाट्स ऐप संदेशों का भी जिक्र
जारी आदेश में संजीव चतुर्वेदी की ओर से शासन के अधिकारियों को भेजे गए एसएमएस और व्हाट्स ऐप संदेशों का भी जिक्र किया गया है। आदेश में कहा गया है कि संजीव चतुर्वेदी के कूलिंग ऑफ पर फैसला केंद्र सरकार ले, क्योंकि संजीव के सर्विस रिकॉर्ड संबंधी दस्तावेज राज्य सरकार के पास उपलब्ध नहीं हैं।
संजीव को जून 2019 तक के लिए एनओसी दी गई है। संजीव वर्ष 2012 से अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत हैं। हालांकि फिलहाल उनके पास एम्स में कोई काम नहीं है, जिसके लिए वे अदालती लड़ाई लड़ रहे हैं।
कुलिंग ऑफ (उपशमन अवधि) के संदर्भ में अधिकारी संजीव चतुर्वेदी की ओर से कैबिनेट सचिव पीके सिन्हा को पत्र लिखा गया है, जिसमें कहा गया है कि वन और पर्यावरण मंत्रालय के कुछ अधिकारी इस मामले में अपॉइंटमेंट कमेटी ऑफ कैबिनेट को गुमराह कर रहे हैं।
पत्र में कुछ अधिकारियों के नाम भी लिखे गए हैं, जो केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर होने के दौरान इंटर कैडर डेपुटेशन पर अलग-अलग राज्यों में प्रतिनियुक्ति पर भेजे गए हैं।