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क्या है कृत्रिम बारिश?: PM के प्रधान सचिव ने वायु प्रदूषण पर की हाईलेवल मीटिंग, गोपाल राय ने लिखी थी चिट्ठी

Fri, 11 Oct 2024 05:53 PM IST
अनुज कुमार अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: अनुज कुमार Updated Fri, 11 Oct 2024 05:53 PM IST
सार

Delhi Air Pollution: दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर पीएम मोदी के प्रधान सचिव डॉ. पी.के. मिश्रा ने अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय टास्क फोर्स की बैठक की। प्रदूषण की चुनौती से निपटने के लिए उपायों पर चर्चा हुई। 

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PM modi Principal Secretary held a high-level meeting on air pollution in delhi today
दिल्ली में वायु प्रदूषण को लेकर बैठक हुई - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली की हवा एक बार फिर जहरीली होने लग रही है। हवा में पराली का धुआं घुलने लगा है। इस सीजन में पहली बार है कि हवा में पराली के धुएं की हिस्सेदारी सामने आई है। 10 अक्तूबर को ही दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने वायु प्रदूषण को लेकर केंद्र सरकार को चिट्ठी लिख दी। जिसके बाद आज शुक्रवार को प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. पी.के. मिश्रा दिल्ली के हालातों पर उच्च स्तरीय बैठक कर रहे हैं। 

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पीएम मोदी के प्रधान सचिव डॉ. पी.के. मिश्रा ने वायु प्रदूषण से निपटने के लिए गठित उच्च स्तरीय टास्क फोर्स की बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में दिल्ली में वायु प्रदूषण को कम करने के लिए तत्काल और दीर्घकालिक उपायों को लागू करने पर चर्चा हुई। केंद्रीय मंत्रालयों और दिल्ली प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों वाले टास्क फोर्स ने मौजूदा रणनीतियों की समीक्षा की और प्रदूषण की चुनौती से निपटने के लिए अतिरिक्त कदम क्या उठाए जा सकते हैं। इसको लेकर चर्चा की है।
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गोपाल राय ने केंद्र को लिखी थी चिट्टी
जानकारी के लिए बता दें कि दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने वायु प्रदूषण से निपटने की तैयारियों के संबंध में एक बैठक करने की केंद्र से मांग की थी। चिट्ठी में गोपाल राय ने मांग की है कि क्लाउड सीडिंग (कृत्रिम बारिश) कराने की अनुमति को लेकर बैठक बुलाई जाए। गोपाल राय ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव को चिट्ठी लिखी थी। चिट्टी में दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर समय से पहले जरूरी कदम उठाने के लिए कहा था। 
 

क्या है कृत्रिम वर्षा?
दिल्ली में हर साल वायु प्रदूषण फैलता है। जिसकी वजह से लोगों को सांस लेने में परेशानी होती है। दिल्ली सरकार वायु प्रदूषण को कम करने के लिए कृत्रिम वर्षा यानी आर्टिफिशियल बारिश कराने की योजना बना रही है। दिल्ली में वायु प्रदूषण को बिना बारिश के कम नहीं किया जा सकता है। जानकारी के मुताबिक, दिल्ली सरकार और आईआईटी कानपुर के बीच राजधानी में कृत्रिम वर्षा कराने को लेकर वार्ता चली थी।

इसे पहले सितंबर 2023 में अरविंद केजरीवाल ने द कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (सीआईआई) के साथ बैठक में कहा था कि चीन व दुबई में क्लाउड सीडिंग तकनीक इस्तेमाल की जा रही है, उसी तर्ज पर दिल्ली में खासकर सर्दी के तीन महीने के दौरान इसकी संभावना देखेंगे। इसमें सीआईआई, दिल्ली सरकार का साथ देगी।

देश के नामचीन शिक्षण संस्थानों में शुमार आईआईटी कानपुर ने क्लाउड सीडिंग के जरिए कृत्रिम बारिश की टेक्नॉलजी विकसित की है। संस्थान ने जून 2023 में इसका परीक्षण किया था।  दरअसल, कृत्रिम वर्षा वह होती है जो कृत्रिम रूप से 'सूखी बर्फ' (जमे हुए कार्बन डाइऑक्साइड), सिल्वर आयोडाइड या अन्य उपयुक्त कणों के साथ बादलों को मंडराने से उत्पन्न होती है। इसमें कार्बन डाइऑक्साइड, सिल्वर आयोडाइड या अन्य कण संघनन नाभिक के रूप में कार्य करते हैं। 

सरल शब्दों में समझें तो विमानों के जरिए बादलों पर खास तरह के रसायनों का छिड़काव किया जाता है, जिसके बाद वह वर्षा होती है। कृत्रिम बारिश कराने के लिए मौसम में विशेष परिस्थिति की जरूरत होती है। जैसे पर्याप्त नमी के साथ बादल और हवा दोनों हो। यह तकनीक ठंड और गर्म बादलों दोनों के लिए अलग-अलग होती है। 

कृत्रिम वर्षा का इस्तेमाल कहां-कहां होता है
बौछार बढ़ाने में
बर्फबारी बढ़ाने में 
वर्षा में वृद्धि
ओलावृष्टि से होने वाले नुकसान को कम करने में 
कोहरा छांटने में 
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