फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   pm degree issue and rti rights

पीएम की डिग्री का मामला : सूचना आयुक्त भी पीएमओ के मामले संज्ञान में ले सकता है

Sat, 07 May 2016 07:23 PM IST
अमित कुमार निरंजन/अमर उजाला, नई दिल्ली
अमित कुमार निरंजन/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 07 May 2016 07:23 PM IST
सार

  • सूचना आयोग में अधिकार क्षेत्र की बाध्यता नहीं
  • वर्तमान एवं पूर्व सूचना आयुक्तों के मुताबिक सी.आई.सी का फैसला सही

विज्ञापन
pm degree issue and rti rights

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की बी.ए और एम.ए. की डिग्री सार्वजनिक करने को लेकर दिए गए आदेश की आलोचना हो रही है। दरअसल भ्रम की स्थिति इसके आर.टी.आई. एक्ट और दिए गए आदेश के तकनीकी पहलुओं को बारीकी से न समझने के कारण पैदा हुई है।

विज्ञापन


केन्द्रीय सूचना आयोग (सी.आई.सी.) के मुताबिक अरविंद केजरीवाल के पत्र को एक अनुरोध के तौर पर लिया है न की एक आवेदन के तौर पर। इसके अलावा सी.आई.सी. का आधिकारिक क्षेत्र काम के बंटवारे को लेकर बंधा हुआ नहीं है, वह पूरी तरह से स्वतंत्र है।
विज्ञापन


सी.आई.सी. के सूचना आयुक्त श्रीधर आचार्युलु ने कहा कि "आरटीआई एक्ट की सभी धाराओं को ध्यान में रखकर ही मैंने आदेश दिया था। "
 
गौरतलब है कि सी.आई.सी. के इस फैसले से प्रधानमंत्री कार्यालय भी नाराज़ है। सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री कार्यालय को खुद ही नरेन्द्र मोदी की डिग्री की जानकारी देनी चाहिए थी (सेक्शन 4, शो-मोटो)। जबकि नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री पद संभाले हुए दो साल होने वाले हैं। इस तरह की जानकारी सार्वजनिक करने में देरी करना सैद्धांतिक और व्यवहारिक रूप से सही नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन


व्यवहारिक रूप से सही फैसला
सी.आई.सी के पूर्व सूचना आयुक्त शैलेश गांधी ने कहा कि मेरे हिसाब से यह पहली घटना है। सीआईसी के इस फैसले को मैं व्यवहारिक रूप से सही मानता हूं। हां तकनीकी स्तर पर कुछ बिंदुओं पर जरुर चर्चा की जा सकती है, लेकिन फिर भी यह विववाद का विषय नहीं होना चाहिए।

वर्तमान एवं पूर्व केंद्रीय सूचना आयुक्तों के मुताबिक
सवाल:- क्या केंद्रीय सूचना आयुक्त पी.एम.ओ. के मामले देख सकता है?
जवाब:- केंद्रीय सूचना आयेग में सहूलियत के हिसाब से अधिकार क्षेत्र (ज्यूरिडिकशन) के काम में बंटवारा किया गया है। इस तरह के काम में किसी तरह की बाध्यता नहीं है। इसलिए एक सूचना आयुक्त भी पी.एम.ओ. के मामले देख सकता है।

सवाल:- क्या अरविंद केजरीवाल के पत्र को आर.टी.आई. आवेदन माना गया?
जवाब:- अरविंद केजरीवाल के पत्र को अनुरोध (रिक्वेस्ट) पत्र मानकर इसे संज्ञान मे लिया गया। क्योंकि यह फ्रेश आर.टी.आई. आवेदन नहीं है। इस कारण इसे आर.टी.आई. के सेक्शन 6(1) में नहीं रखा जा सकता।

सवाल:- क्या सी.आई.सी. गुजरात विश्वविद्यालय (राज्य के अंतर्गत आने वाली संस्था) को जानकारी सार्वजनिक करने का निर्देश दे सकती है?
जवाब:- आर.टी.आई. की धारा 18 और 19 के तहत सुनवाई और सेकंड अपील के दौरान अगर कमीशन को लगता है की  सूचना सार्वजनिक की जानी चाहिए तो कमीशन जानकारी देने के लिए किसी को भी (राज्य एवं केन्द्र संस्थाएँ)  ऐसा करने के लिए आदेश दे सकती है।


इसके अलावा इस तरह की शिकायत सुनने का अधिकार सी.आई.सी. के पास तब है जब इससे संबन्धित ब्यौरा सार्वजनिक हो।  इससे संबन्धित ब्यौरा एक टी.वी. इंटरव्यू और चुनाव आयोग में नरेन्द्र मोदी द्वारा दिए गए शपथ पत्रों में दिए गए हैं। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed