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हो जाएं सावधान: पर्स, मोबाइल और कैश नहीं 'पिज्जा' चुराते हैं नोएडा के ये लुटेरे
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नोएडा
Updated Thu, 19 Jan 2017 01:39 PM IST
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पिज्जा लूट (प्रतीकात्मक चित्र)
- फोटो : बीसीसीएल
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पर्स, मोबाइल, गहने, कैश, बाइक, बैग आदि की छिनैती या लूट तो आपने बहुत सुना होगा। हर रोज के अखबार ऐसी खबरों से पटे पड़े रहते हैं। लेकिन अगर आपको पता चले कि इन कीमती सामानों के अलावा इन दिनों औद्योगिक हब नोएडा में पिज्जा लूटने की वारदातें दिनों दिन तेजी से बढ़ रही हैं तो आपको जरूर हैरानी होगी।
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बीते कुछ महीनों में पिज्जा चोरी की घटनाएं नोएडा में तेजी से बढ़ रही हैं। डिलीवरी ब्वॉय की मानें तो हर महीने ऐसी आठ से दस घटनाएं होती हैं, लेकिन ज्यादातर की कोई रिपोर्ट नहीं होती। लेकिन इस अजीब लूट की वारदातें ज्यादा बढ़ने से अब पिज्जा डिलीवरी ब्वॉयज परेशान हैं।
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डॉमिनोज में काम करने वाला रमेश कहता है कि अब ये तो नहीं कह सकते कि पूरे नोएडा में कितनी चोरी होती है, पर सुनने में आता है सबसे कि दो-तीन घटनाएं हो जाती हैं।
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पिज्जा लूट (प्रतीकात्मक चित्र)
- फोटो : बीसीसीएल
रमेश का ही एक साथी बताता है कि ऐसा नहीं है कि जब वो लूटने आते हैं तो एक-दो पिज्जा लेकर चले जाते हैं बल्कि वो सारे ले जाते हैं जितने हों आपके पास। सामान्य तौर पर एक डिलीवरी ब्वॉय के पास 4-5 पिज्जा होते हैं।
वहीं एफआईआर के झंझट से बचने के लिए पिज्जा कंपनियों के मालिक भी प्राथमिकी दर्ज नहीं कराते। हालांकि लिखित शिकायत जरूर करा देते हैं क्योंकि कंपनी में रिपोर्ट करने के लिए लिखित शिकायत करानी होती है। डॉमिनोज की नोएडा स्थित एक शाखा के मैनेजर कहते हैं कि 'एफआईआर का झंझट कौन लेगा? पिज्जा ही तो है।'
ऐसी घटनाएं कॉलेजों के पास ज्यादा होती हैं। लेकिन इनका कोई टाइम फिक्स नहीं है। हालांकि ज्यादातर ये वारदातें दिन ढलने के बाद होती हैं लेकिन एक्सप्रेसवे और नॉलेज पार्क जैसी जगहों पर ये दिन में भी हो जाती हैं।
डिलीवरी ब्वॉयज का कहना है कि जब वो शुरु-शुरु में इस बात को अपने मैनेजर को बताते थे तो उन्हें लगता था कि हम झूठ बोल रहे हैं। पहले तो ये बड़ा मजाकिया भी लगता था। मैनेजर हमसे पूछते थे कि तुमने कोई घपला तो नहीं किया और अब कह रहे हो चोरी हो गया। इसलिए अब ये लोग रिपोर्ट भले न लिखवाएं पुलिस को बता तो देते ही हैं।
वहीं एफआईआर के झंझट से बचने के लिए पिज्जा कंपनियों के मालिक भी प्राथमिकी दर्ज नहीं कराते। हालांकि लिखित शिकायत जरूर करा देते हैं क्योंकि कंपनी में रिपोर्ट करने के लिए लिखित शिकायत करानी होती है। डॉमिनोज की नोएडा स्थित एक शाखा के मैनेजर कहते हैं कि 'एफआईआर का झंझट कौन लेगा? पिज्जा ही तो है।'
ऐसी घटनाएं कॉलेजों के पास ज्यादा होती हैं। लेकिन इनका कोई टाइम फिक्स नहीं है। हालांकि ज्यादातर ये वारदातें दिन ढलने के बाद होती हैं लेकिन एक्सप्रेसवे और नॉलेज पार्क जैसी जगहों पर ये दिन में भी हो जाती हैं।
डिलीवरी ब्वॉयज का कहना है कि जब वो शुरु-शुरु में इस बात को अपने मैनेजर को बताते थे तो उन्हें लगता था कि हम झूठ बोल रहे हैं। पहले तो ये बड़ा मजाकिया भी लगता था। मैनेजर हमसे पूछते थे कि तुमने कोई घपला तो नहीं किया और अब कह रहे हो चोरी हो गया। इसलिए अब ये लोग रिपोर्ट भले न लिखवाएं पुलिस को बता तो देते ही हैं।