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Delhi HC: विमान में कृपाण ले जाने को लेकर चुनौती संबंधी पीआईएल वापस, याचिकाकर्ता बोला- दबाव में लिया फैसला

Mon, 22 Aug 2022 06:59 PM IST
आकाश दुबे अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: आकाश दुबे Updated Mon, 22 Aug 2022 06:59 PM IST
सार

अधिवक्ता हर्ष विभोर सिंघल के माध्यम से दायर याचिका में चार मार्च को जारी डीजीसीए की अधिसूचना को चुनौती दी गई थी, जिसमें कहा गया था कि एक सिख यात्री कृपाण घरेलू उड़ानों में ले जा सकता है, बशर्ते उसके ब्लेड की लंबाई 15.24 सेमी (6 इंच) से अधिक न हो और कुल लंबाई 22.86 सेमी (9 इंच) से ज्यादा नहीं हो।

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PIL Returned who filed in Delhi High Court regarding challenge to carry kirpan in aircraft
सांकेतिक फोटो - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

सिखों को घरेलू उड़ानों में कृपाण (कटार) ले जाने को लेकर उच्च न्यायालय में दायर चुनौती संबंधी जनहित याचिका सोमवार को वापस ले ली गई। न्यायमूर्ति सतीश चंदर मिश्रा और न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने कहा कि वह कुछ दबाव के कारण याचिका वापस ले रहा है। पीठ ने याचिका को वापस लेने की अनुमति प्रदान कर दी।

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अधिवक्ता हर्ष विभोर सिंघल के माध्यम से दायर याचिका में चार मार्च को जारी डीजीसीए की अधिसूचना को चुनौती दी गई थी, जिसमें कहा गया था कि एक सिख यात्री कृपाण घरेलू उड़ानों में ले जा सकता है, बशर्ते उसके ब्लेड की लंबाई 15.24 सेमी (6 इंच) से अधिक न हो और कुल लंबाई 22.86 सेमी (9 इंच) से ज्यादा नहीं हो।

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याचिका में कहा गया था कि यदि राज्य अपनी धार्मिक विधि और पवित्रता को बनाए रखने के लिए भारत में उड़ानों में व्यक्ति पर कृपाण ले जाने की मांग को स्वीकार कर लेता है, तो उन देशों में ऐसी निर्देशात्मक पवित्रता का क्या होता है जहां विमानन नीति द्वारा इसके साथ परिवहन पर प्रतिबंध है? यदि कृपाण को केवल चेक इन बैगेज में ही पैक करके ले जाया जाए तो क्या आस्था अपवित्र हो जाती है? इसके अलावा याचिका में अन्य यात्रियों की सुरक्षा का भी मुद्दा उठाया गया था।

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने हिंदू सेना द्वारा इसी तरह की एक अन्य जनहित याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया, जिसमें नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो के फैसले को चुनौती दी गई थी, जिसमें सिख यात्रियों को घरेलू उड़ानों में कृपाण ले जाने की अनुमति दी गई थी।

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